
नॉन-एसी तत्काल टिकट बुकिंग की विंडो जैसे ही सुबह 11 बजे खुली, आईआरसीटीसी की वेबसाइट और ऐप पूरी तरह लंगड़ाने लगे। लाखों यात्रियों ने एक साथ लॉगिन करने की कोशिश की तो सर्वर बोझ तले ढह गया। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (बीपीएससी) की असिस्टेंट इंजीनियर डेवलपमेंट ऑफिसर (एईडीओ) परीक्षा के बीच यह विफलता परीक्षार्थियों के लिए करारा झटका साबित हुई। बेतिया जाने वाली अनामिका जैसी सैकड़ों अभ्यर्थी 19 अप्रैल को टिकट बुक करने में नाकाम रही, जिससे 20 अप्रैल की परीक्षा का सफर दांव पर लटक गया।
तत्काल विंडो का ब्लैकआउट
यह कोई नई समस्या नहीं है। तत्काल बुकिंग, जो यात्रा के एक दिन पहले खुलती है, हमेशा से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के सिद्धांत पर चलती है। सीमित सीटों पर भारी डिमांड के चलते सुबह 10 बजे एसी और 11 बजे नॉन-एसी विंडो खुलते ही ट्रैफिक 200-400 प्रतिशत तक उछल जाता है। इस बार भी वही हुआ। जैसे ही ब्राउजर खुले, साइट स्लो हो गई। कई यूजर्स को लॉगिन ही नहीं हो सका।
जो लॉगिन कर पाए, उन्हें बफरिंग का सामना करना पड़ा। पेज लोडिंग में मिनटों लग गए, एरर मैसेज जैसे ‘ट्राई अगेन’, ‘सर्वर अनअवेलेबल’ या ‘सेशन एक्सपायर्ड’ बार-बार स्क्रीन पर चमके। कुछ सेकंड में सिस्टम जवाब देना बंद कर दिया।
पेमेंट फेलियर का दर्द
सबसे बड़ी मार तब पड़ी जब पेमेंट गेटवे तक पहुंचे यात्रियों के खाते से पैसे कट गए, लेकिन टिकट कन्फर्म नहीं हुआ। अनामिका ने बताया, “10:30 बजे से लॉगिन थी, लेकिन 11 बजे बुकिंग फेल हो गई। पैसे तो कटे, टिकट नहीं मिला। अब बेतिया कैसे जाऊं?” सोशल मीडिया पर गुस्सा फूट पड़ा। ट्विटर और फेसबुक पर स्क्रीनशॉट की बौछार हो गई। #IRCTCDown और #TatkalFail ट्रेंड करने लगे। बिहार के यात्रियों ने खास तौर पर शिकायत की, क्योंकि दिल्ली-बिहार, मुजफ्फरपुर-पटना जैसे रूट्स पर डिमांड चरम पर रहती है। एजेंट्स और बॉट्स आम यूजर्स से पहले कब्जा जमाते हैं, जबकि काउंटर पर पीआरएस से टिकट मिलते रहते हैं।
आईआरसीटीसी की सफाई
आईआरसीटीसी ने इसे ‘अस्थायी तकनीकी खराबी’ बताया। कंपनी का बयान आया कि भारी ट्रैफिक, नेटवर्क इश्यू और डिवाइस कनेक्टिविटी के कारण ऐसा हुआ। यूजर्स को लॉगआउट-रीलॉगिन, ऐप अपडेट और तेज इंटरनेट इस्तेमाल की सलाह दी। लेकिन यह सफाई यात्रियों को रास नहीं आई। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वर कैपेसिटी पुरानी है। मेंटेनेंस के बावजूद लाखों सिमल्टेनियस यूजर्स को हैंडल करने में कमी रह जाती है।
पिछले दिवाली-छठ रश में भी यही हुआ था, जब साइट 30-35 मिनट ठप रही। बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्य में, जहां रेल यात्रा मुख्य साधन है, यह बार-बार दोहराया जा रहा नजारा है।
परीक्षा और यात्रा का संकट
बीपीएससी एईडीओ परीक्षा के संदर्भ में समस्या और गंभीर हो जाती है। पटना, मुजफ्फरपुर, बेतिया जैसे केंद्रों पर पहुंचने के लिए तत्काल ही एकमात्र विकल्प बचता है। परीक्षार्थी, ज्यादातर युवा, आर्थिक तंगी से जूझते हैं। होटल या वैकल्पिक ट्रेन का खर्च वहन मुश्किल। रेलवे के नए नियमों जैसे आधार लिंकिंग और ओटीपी वेरिफिकेशन के बावजूद सिस्टम सुधार नहीं हो रहा। यूजर्स का आरोप है कि एजेंट्स सॉफ्टवेयर टूल्स से आगे निकल जाते हैं।
समाधान की राह
क्या करें यात्री? तत्काल से पहले लॉगिन रहें, 4जी/5जी नेटवर्क चुनें, पेमेंट सेव रखें। एक से ज्यादा डिवाइस या रेल कनेक्ट/रेल वन ऐप आजमाएं। लेकिन मूल समस्या सर्वर अपग्रेड की है। आईआरसीटीसी को अब ठोस कदम उठाने होंगे, वरना बिहार जैसे राज्यों में यात्रियों का भरोसा डगमगाएगा। सरकार और रेल मंत्रालय को हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि डिजिटल इंडिया का सपना रेल यात्रा में साकार हो। यह क्रैश न सिर्फ सुविधा का संकट है, बल्कि लाखों जिंदगियों का सवाल है।









