
आरबीआई ने अप्रैल 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर लगातार तीसरी बार अपरिवर्तित रखा। यह फैसला ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच आया है, जहां वेस्ट एशिया संकट से क्रूड ऑयल के दाम चढ़े हैं और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों ने इसे स्वागतयोग्य बताया, क्योंकि इससे होम लोन की ब्याज दरें स्थिर रहेंगी और ईएमआई का बोझ नहीं बढ़ेगा।
रिजर्व बैंक के इस ‘वेट एंड वॉच’ अप्रोच को कोलियर्स इंडिया के रिसर्च हेड विमल नादर ने सतर्क लेकिन संतुलित करार दिया। उन्होंने कहा कि महंगाई 4.6 प्रतिशत के आसपास रहेगी, जो आरबीआई के लक्ष्य से थोड़ी ऊपर है। जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9 प्रतिशत रखा गया है, लेकिन जियोपॉलिटिकल टेंशन और कमोडिटी मूल्यों की अस्थिरता ने दर कटौती को टाल दिया। स्क्वायर यार्ड्स के को-फाउंडर व सीएफओ पीयूष बोथरा का मानना है कि यह स्थिरता होमबायर्स को भरोसा देगी, खासकर मीडियम और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में जहां डिमांड मजबूत है।
होमबायर्स को मिली राहत, ईएमआई स्थिर
मौजूदा और नए होम लोन पर ईएमआई पुराने स्तर पर बनी रहेगी। उदाहरण के लिए, 50 लाख रुपये के 20 साल के लोन पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर से मासिक ईएमआई करीब 42,600 रुपये होती है। अगर रेपो रेट बढ़ता, तो यह 44,000 रुपये से ऊपर चली जाती, लेकिन स्थिरता से सालाना हजारों रुपये की बचत हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लोटिंग रेट लोन वाले ग्राहकों को तत्काल फायदा नहीं, लेकिन भविष्य की बढ़ोतरी रुक गई है। क्रेडाई प्रेसिडेंट शेखर जी पटेल ने इसे ‘संतुलित कदम’ कहा, जो विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखता है।
गंगा रियल्टी के जेएमडी विकास गर्ग ने जोर देकर कहा कि ब्याज दरों की स्थिरता से खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा। त्रेहान ग्रुप के एमडी सारांश त्रेहान ने इसे लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देने वाला बताया। रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि बढ़ती निर्माण लागत (सीमेंट, स्टील) के बावजूद उधार की लागत नियंत्रित रहेगी। पायनियर अर्बन के रिशभ पेरिवाल ने कहा कि इससे प्रोजेक्ट लॉन्च और एग्जिक्यूशन की प्लानिंग आसान हो जाएगी।
ग्लोबल चुनौतियों के बीच स्थिरता का महत्व
वेस्ट एशिया क्राइसिस से मकान बनाने की सामग्री महंगी हो रही है, लेकिन रेपो रेट स्थिर रहने से डिमांड पर असर कम पड़ेगा। गौर ग्रुप के मनोज गौर के अनुसार, न्यूट्रल स्टांस से लिक्विडिटी मैनेजमेंट मजबूत होगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसे सावधानीपूर्ण बताया, क्योंकि रुपया कमजोर हो रहा है और महंगाई का खतरा बरकरार है। रियल एस्टेट सेक्टर को उम्मीद है कि अगर सीजफायर लंबा चला, तो जून तक दर कटौती संभव है, जो ईएमआई को 500-1000 रुपये मासिक कम कर सकती है।
इस फैसले से रियल एस्टेट में जश्न है, क्योंकि स्थिर ईएमआई खरीदारी को प्रोत्साहित करेगी। पिछले साल 2025 में 0.25 प्रतिशत की कटौती से कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब बाजार को predictability मिली है। डेवलपर्स और खरीदार दोनों फायदे में हैं। हालांकि, महंगाई अगर 4.6 प्रतिशत से ऊपर गई, तो अगली बैठक में बदलाव हो सकता है। कुल मिलाकर, यह फैसला इकोनॉमी को मजबूती देगा और घर सपने को साकार करने में मदद करेगा।









