
बिहार में गर्मी की चपेट में चल रहे लोगों को अब अचानक बदले मौसम ने परेशान कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक के साथ तेज आंधी-तूफान का खतरा मंडरा रहा है। विशेष रूप से 23 अप्रैल तक हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि ठनका गिरने की आशंका से ग्रामीण इलाकों में दहशत फैल गई है। रविवार को ही कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिससे सड़कें गीली हो गईं और यातायात प्रभावित रहा।
मौसम विभाग की चेतावनी और कारण
IMD के पटना केंद्र ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण मौसम अस्थिर हो गया है। रविवार 19 अप्रैल को जारी बुलेटिन में 30 से 50 किमी/घंटा की हवाओं के साथ गरज-चमक का येलो अलर्ट था, जो सोमवार को भी जारी रहा। पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख शहरों में बादल छाए रहे, जबकि पूर्वी जिलों जैसे किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में हल्की फुहारें गिरीं।
पूर्वी और उत्तरी बिहार के 19 जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, जहां 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इतिहास गवाह है कि ऐसी स्थितियां अक्सर बिजली गिरने और पेड़ उखड़ने का कारण बनती हैं, जैसा कि मार्च 2026 में 34 जिलों में देखा गया था।
तापमान में उतार-चढ़ाव की भविष्यवाणी
सोमवार को तापमान में मामूली गिरावट के बाद मंगलवार 21 अप्रैल से 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी की संभावना है। अधिकतम तापमान 38-42 डिग्री के बीच रह सकता है, लेकिन 22 से 23 अप्रैल को थंडरस्क्वॉल यानी तेज आंधी-तूफान की स्थिति बनेगी। हवा की गति 50-60 किमी/घंटा रहेगी, जो झोंकों में 70 किमी/घंटा तक पहुंच जाएगी।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह चक्रवाती परिसंचरण का असर है, जो उत्तर-पश्चिम भारत से प्रभावित हो रहा है। ठनका गिरने का खतरा खासतौर पर खेतों और खुले मैदानों में बढ़ गया है, जहां किसान धान, गेहूं और सब्जियों की फसल पर नजर रखे हुए हैं। पिछले हफ्ते ही पटना में आंधी से बिजली के खंбе गिरे थे और फसलें चौपट हो गई थीं।
जनजीवन पर गहरा प्रभाव
इस बदलाव से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। राजधानी पटना में सुबह से ही हल्की बूंदाबांदी ने बाजारों में सन्नाटा छा दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रशासन अलर्ट पर है। स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टियां नहीं हुईं, लेकिन अभिभावक बच्चों को घर से निकालने में हिचक रहे हैं। यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि NH-31 और अन्य राजमार्गों पर धुंध और हवा से दुर्घटनाएं हो सकती हैं। किसानों को फसलों को ढकने और पशुओं को सुरक्षित रखने के निर्देश जारी हो चुके हैं। भागलपुर और रोहतास जैसे जिलों में ओलावृष्टि की भी आशंका जताई जा रही है, जो आमतौर पर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती है।
IMD की सावधानियां और अपील
IMD ने सख्त सावधानियां बरतने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखें, पेड़ों, बिजली के खंभों और धातु की वस्तुओं से दूर रहें। आंधी आने पर कमरों के अंदर शरण लें और खिड़कियां बंद रखें। यात्रा टालें, खासकर रात के समय। ग्रामीणों को ठनका अलर्ट ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी गई है, जो वज्रपात की पूर्वचेतावनी देता है। जिलाधिकारियों को राहत कार्यों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल का यह मौसम चक्र सामान्य है, लेकिन जलवायु परिवर्तन से इसकी तीव्रता बढ़ रही है।
भविष्य का पूर्वानुमान और सतर्कता
बिहार में मौसम का यह मिजाज 23 अप्रैल तक जारी रह सकता है, उसके बाद तापमान स्थिर होने के संकेत हैं। हालांकि, 25 अप्रैल तक हीटवेव की छिटपुट आशंका भी बनी हुई है। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय कर दिया है। लोगों से अपील है कि IMD की वेबसाइट और ऐप पर नजर रखें। यह मौसम न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों पर भी असर डाल रहा है। किसान और व्यापारी सबसे ज्यादा चिंतित हैं। कुल मिलाकर, बिहार में सतर्कता ही एकमात्र रक्षा है।









