
आधार कार्ड बनवाने के लिए घंटों लाइनों में खड़े होने की मजबूरी अब इतिहास बन चुकी है। तकनीक के इस दौर में यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों की परेशानी को काफी हद तक कम कर दिया है। खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ‘बाल आधार कार्ड’ की प्रक्रिया को घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से शुरू करने की सुविधा ने माता-पिता को बड़ी राहत दी है।
स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं के लाभ या अन्य जरूरी कामों के लिए बच्चों का आधार अनिवार्य हो चुका है, लेकिन अब नामांकन केंद्रों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं। UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर आप तय समय पर केंद्र जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह बदलाव 2025-26 में लागू हुए नए नियमों का हिस्सा है, जो डुप्लिकेट आधार रोकने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर केंद्रित हैं।
बाल आधार कार्ड की शुरुआत और विशेषताएं
बाल आधार कार्ड, जिसे नीले रंग का विशेष आधार भी कहा जाता है, फरवरी 2018 में शुरू हुआ था। यह सामान्य आधार से अलग है क्योंकि इसमें छोटे बच्चों के लिए बायोमेट्रिक डेटा जैसे फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन की जरूरत नहीं पड़ती। केवल बच्चे की लाइव फोटो, नाम, जन्मतिथि और माता-पिता के आधार से लिंकिंग पर्याप्त होती है। UIDAI के अनुसार, 0 से 5 साल के बच्चों के लिए यह कार्ड मुफ्त है और इसे किसी भी भारतीय बच्चे के लिए बनवाया जा सकता है। प्रक्रिया सरल रखी गई है ताकि नवजात शिशुओं के माता-पिता बिना ज्यादा कागजातों के इसे प्राप्त कर सकें।
हालांकि, 5 साल की उम्र पूरी होने पर बायोमेट्रिक अपडेट अनिवार्य हो जाता है, जो 30 सितंबर 2026 तक मुफ्त उपलब्ध रहेगा। 7 साल बाद भी अपडेट जरूरी है, वरना आधार निष्क्रिय हो सकता है। यह सुविधा लाखों परिवारों को सरकारी सब्सिडी, राशन कार्ड और अन्य लाभों से जोड़ने में मदद कर रही है।
आवश्यक दस्तावेज और नए नियम
बाल आधार बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेज बहुत कम हैं, जो इसकी सबसे बड़ी खूबी है। बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र या अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप अनिवार्य है, क्योंकि UIDAI ने 2025 से सख्त नियम लागू किए हैं ताकि उम्र और पहचान की सत्यता सुनिश्चित हो। माता या पिता में से किसी एक का आधार कार्ड भी भरपूर महत्व रखता है, क्योंकि बच्चे का आधार उसी से लिंक होता है।
अगर दोनों के पास आधार नहीं है, तो पहले उन्हें बनवाना पड़ता है। पते का प्रमाण जैसे वोटर आईडी, पासपोर्ट या बिजली बिल भी जमा करना होता है। बच्चे की एक डिजिटल फोटो साथ ले जाना उचित रहता है। नए नियमों के तहत बिना जन्म प्रमाण पत्र के अब आधार नहीं बनता, जो डुप्लिकेट एंट्री को रोकने का प्रयास है। ये दस्तावेज केंद्र पर जमा करने होते हैं, लेकिन अपॉइंटमेंट ऑनलाइन बुकिंग से समय की बचत होती है।
घर बैठे आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
घर बैठे आवेदन की प्रक्रिया बेहद आसान है। सबसे पहले UIDAI की वेबसाइट myaadhaar.uidai.gov.in पर जाएं। ‘My Aadhaar‘ सेक्शन में ‘Book an Appointment‘ विकल्प चुनें। अपनी शहर का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। मोबाइल पर आए OTP से वेरिफिकेशन पूरा करें। इसके बाद नजदीकी आधार नामांकन केंद्र चुनें और अपनी सुविधा अनुसार तारीख व समय स्लॉट बुक करें। अपॉइंटमेंट कन्फर्म होने पर एक यूनिक ID मिलेगी, जिसे प्रिंट या सेव करके रखें।
तय तारीख पर केंद्र पहुंचें, वहां एनरोलमेंट फॉर्म भरें। फॉर्म में बच्चे की डिटेल्स, माता-पिता का आधार नंबर सही-सही डालें। स्टाफ बच्चे की फोटो खींचेगा और माता-पिता के बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या आईरिस) लेगा। प्रक्रिया पूरी होने पर 14-अंकीय नामांकन नंबर (EID) मिलेगा। आधार कार्ड 15-30 दिनों में डाक से घर पहुंच जाता है। अगर केंद्र नजदीक न हो, तो mAadhaar ऐप से भी अपॉइंटमेंट चेक कर सकते हैं।
स्टेटस चेक और चुनौतियां
आवेदन का स्टेटस चेक करना भी सरल है। UIDAI वेबसाइट पर ‘Check Aadhaar Status‘ में EID डालें या 1947 पर SMS भेजें: “UIDSTATUS [EID]।” 2026 के अपडेटेड नियमों में ऑनलाइन प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है, लेकिन अपॉइंटमेंट बिना केंद्र विजिट संभव नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डिजिटलीकरण लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए वरदान है। हालांकि, इंटरनेट कनेक्टिविटी और जागरूकता की कमी अभी चुनौती बनी हुई है।
UIDAI ने हेल्पलाइन 1947 पर सहायता के लिए विशेष डेस्क भी शुरू किए हैं। माता-पिता अब बिना इंतजार के बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए uidai.gov.in जरूर देखें।









