
इंडिया मेट्रॉलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा समेत कई राज्यों के लिए 23 अप्रैल तक रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। मध्य प्रदेश में पारा 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, जिससे आम जनजीवन बेहाल है। इसी संकट से निपटने के लिए एमपी पुलिस ने ट्रैफिक सिग्नल बंद करने का अभूतपूर्व फैसला लिया है, जो चालकों को दोपहर की चिलचिलाती धूप से बचाने का प्रयास है।
IMD की ताजा चेतावनी
राज्य के 16 से अधिक जिलों में लू का खतरा मंडरा रहा है, जहां तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री अधिक दर्ज हो रहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों में पारा 42-44 डिग्री के बीच घूम रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी 45 डिग्री तक पहुंचने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुष्क मौसम और कम आर्द्रता के कारण लू की तीव्रता बढ़ गई है।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली-NCR में भी 40 डिग्री से ऊपर का तापमान दर्ज किया गया, जबकि विदर्भ और राजस्थान में रेत भरी आंधियां गर्मी को और भयावह बना रही हैं। IMD ने सलाह दी है कि 20 से 23 अप्रैल तक दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलना जानलेवा हो सकता है।
ट्रैफिक सिग्नल पर बड़ा बदलाव
इस भीषण गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं वाहन चालक, जो ट्रैफिक सिग्नल पर लंबी प्रतीक्षा के दौरान हीटस्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। इन्हीं आशंकाओं के मद्देनजर मध्य प्रदेश पुलिस ने ट्रैफिक प्रबंधन में बड़ा बदलाव किया है। इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में दोपहर 2 से 4 बजे तक सिग्नल को ब्लिंकर मोड पर शिफ्ट कर दिया गया है। इससे सिग्नल पूरी तरह बंद हो जाते हैं और चालकों को ‘रुको, देखो और जाओ’ (Stop, Look and Go) का नियम अपनाना पड़ता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नागपुर और बिलासपुर जैसे पड़ोसी शहरों में यह समय 12 से 4 बजे तक बढ़ा दिया गया है। इसका उद्देश्य सिग्नल पर रुकने वाले वाहन चालकों, खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को लू से बचाना है। पुलिस का तर्क है कि फिक्स्ड टाइमिंग के कारण चालक धूप में 1-2 मिनट तक रुकने को मजबूर होते हैं, जो डिहाइड्रेशन और गर्मी से संबंधित बीमारियों को न्योता देता है।
नई व्यवस्था के प्रभाव
पिछले हफ्ते से लागू इस व्यवस्था ने ट्रैफिक प्रवाह को सुगम बनाया है। इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन सिग्नल की अवधि बढ़ा दी है, जबकि रेड सिग्नल को 30-45 सेकंड छोटा कर दिया गया। ड्रोन निगरानी से 13 दिनों में 1600 से अधिक चालान काटे गए, जिससे जाम की स्थिति में कमी आई। हालांकि, कुछ चालकों ने शिकायत की कि ब्लिंकर मोड में दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन पुलिस ने साइनबोर्ड और वॉलंटियर्स तैनात कर इसे कम करने का दावा किया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट में उल्लेख है कि इसी तरह महाराष्ट्र के गोंदिया में भी सिग्नल बंद करने का फैसला लिया गया।
अन्य सुरक्षा उपाय
गर्मी से निपटने के अन्य उपाय भी तेजी से लागू हो रहे हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के स्कूलों का समय सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक सीमित कर दिया गया है, ताकि बच्चे दोपहर की लू से बच सकें। महाराष्ट्र में बाहरी काम पर 12 से 4 बजे तक रोक लगा दी गई है। डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार, एमपी के 8 शहरों में तापमान 42 डिग्री से ऊपर होने से अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई। सरकार ने पानी स्टेशन और छाया स्थल स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
लू से बचाव की सलाह
लू से बचाव के लिए IMD की सलाह सरल लेकिन कारगर है: ढीले हल्के कपड़े पहनें, ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, छाया में रहें और नमक-ग्लूकोज का सेवन करें। विशेषज्ञ चेताते हैं कि लू के लक्षण जैसे सिरदर्द, उल्टी और चक्कर आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। यह गर्मी की लहर जलवायु परिवर्तन का संकेत भी मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में और तीव्र हो सकती है। प्रशासन के इन कदमों से जनता को कुछ राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञ पूर्ण राहत के लिए मानसून की बाट जोह रहे हैं। फिलहाल, सतर्कता ही एकमात्र हथियार है।









