
मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत से इनकार कर दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ गया। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5.51 डॉलर प्रति बैरल की तेजी के साथ 95.89 डॉलर तक पहुंच गईं, जो हाल के दिनों की सबसे ऊंची स्तर है। इस बीच, भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी किए हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि देशभर में कीमतें अभी स्थिर बनी हुई हैं।
भारत में कीमतें स्थिर, उपभोक्ताओं को राहत
वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये पर टिका है। मुंबई में पेट्रोल 103.50 रुपये तथा डीजल 90.03 रुपये, कोलकाता में क्रमशः 105.45 रुपये और 92.02 रुपये, चेन्नई में 100.90 रुपये पेट्रोल व 92.48 रुपये डीजल बिक रहा है।
लखनऊ में पेट्रोल 94.85 रुपये और डीजल 87.99 रुपये, अहमदाबाद में 94.68 रुपये पेट्रोल व 90.35 रुपये डीजल, इंदौर में 106.81 रुपये पेट्रोल व 92.18 रुपये डीजल, पटना में 103.82 रुपये पेट्रोल व 91.84 रुपये डीजल, पुणे में 105.60 रुपये पेट्रोल व 90.35 रुपये डीजल तथा नाशिक में 104.76 रुपये पेट्रोल व 91.27 रुपये डीजल के भाव हैं। हैदराबाद में पेट्रोल 107.46 रुपये और डीजल 95.70 रुपये प्रति लीटर है। ये दाम गुट रिटर्न के अनुसार हैं और पिछले 24 घंटों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
चुनावी वर्ष में सरकार की सतर्क रणनीति
यह स्थिरता संयोग नहीं है। आने वाले दिनों में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में केंद्र सरकार महंगाई के मोर्चे पर जनता को झटका देने से बच रही है। पिछले साल एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी कंपनियां नुकसान की भरपाई के लिए सतर्क हैं। हालांकि, प्राइवेट कंपनियां जैसे शेल इंडिया ने अप्रैल की शुरुआत में ही पेट्रोल पर 7.4 रुपये और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जो आम पंपों पर सरकारी दामों से अलग है।
इंडियन ऑयल जैसी सार्वजनिक कंपनियां अभी प्रीमियम ईंधन (जैसे XP100) पर ही मामूली संशोधन कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार लंबे समय तक रहा, तो ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा।
मिडिल ईस्ट तनाव का भारत पर गहरा असर
मिडिल ईस्ट का तनाव भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले 20 प्रतिशत वैश्विक तेल पर निर्भरता के कारण किसी भी व्यवधान से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत विफल होने से OPEC+ देश उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी इन्वेंट्री में गिरावट और मांग की मजबूती ने कीमतों को ऊंचा रखा है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर जोखिम कम किया है, लेकिन वैश्विक उतार-चढ़ाव असर डाल ही रहा है। मार्च में ब्रेंट 111 डॉलर तक पहुंचा था, जो 2008 के बाद का उच्चतम था।
पड़ोसी देशों से सस्ता भारत का ईंधन
पड़ोसी देशों की तुलना में भारत अभी सस्ता है। बांग्लादेश में पेट्रोल 90.95 रुपये, लेकिन म्यांमार में 146.82 रुपये, पाकिस्तान में 122.42 रुपये, चीन में 130.11 रुपये, श्रीलंका में 134.38 रुपये और नेपाल में 136.86 रुपये प्रति लीटर है। पाकिस्तान में हाल की 20 प्रतिशत बढ़ोतरी से पंपों पर लंबी कतारें लगीं, जबकि नेपाल में सप्लाई स्थिर है। यह अंतर टैक्स स्ट्रक्चर और सब्सिडी से आता है। भारत में 50 प्रतिशत से अधिक टैक्स होने के बावजूद स्थिरता सराहनीय है।
भविष्य की चुनौतियां और सावधानियां
निष्कर्षतः, मिडिल ईस्ट की आग बुझने तक सतर्क रहना होगा। सरकार की नीतियां राहत दे रही हैं, लेकिन उपभोक्ता ईंधन बचत पर ध्यान दें। यदि तनाव बढ़ा, तो आने वाले हफ्तों में दामों में इजाफा अपरिहार्य हो सकता है। अर्थव्यवस्था पर स्टैगफ्लेशन का खतरा मंडरा रहा है, जहां महंगाई के साथ विकास धीमा पड़ सकता है। जनता आशा कर रही है कि कूटनीति जल्द समाधान निकाले।









