
केंद्र सरकार के करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। इस बीच भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने आयोग को एक विस्तृत मेमोरेंडम सौंपकर सैलरी संरचना में क्रांतिकारी बदलाव की मांग की है। संघ की सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम बेसिक सैलरी को वर्तमान ₹18,000 से चार गुना बढ़ाकर ₹72,000 मासिक करने की है। फिटमेंट फैक्टर 4 करने, सालाना इंक्रीमेंट 6% करने और परिवार इकाई को 3 से बढ़ाकर 5 सदस्य मानने जैसे सुझावों ने कर्मचारी वर्ग में उत्साह भर दिया है।
न्यूनतम सैलरी ₹72,000 क्यों?
BPMS का तर्क बिल्कुल स्पष्ट है। संघ के अनुसार, 2016-17 में देश की प्रति व्यक्ति आय ₹1.03 लाख से बढ़कर 2024-25 में ₹1.92 लाख हो गई, जो 87% की वृद्धि दर्शाता है। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए न्यूनतम वेतन में यह उछाल जरूरी है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 है, जो महंगाई भत्ता (DA) जोड़कर कुल ₹41,000 के आसपास पहुंचता है। लेकिन BPMS का कहना है कि यह राशि आज के दौर में अपर्याप्त है, खासकर जब पेट्रोल-डीजल, किराया और शिक्षा जैसे खर्च आसमान छू रहे हैं।
फिटमेंट फैक्टर 4 की मांग
फिटमेंट फैक्टर पर BPMS ने मौजूदा 2.57 से इसे 4 करने का प्रस्ताव दिया है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है जो पुरानी सैलरी को नई सैलरी में बदलने के लिए इस्तेमाल होता है। अगर यह मांग मान ली जाती है, तो लेवल-1 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी सीधे ₹72,000 हो जाएगी, जबकि उच्च लेवल वालों को लाखों तक का लाभ मिलेगा। यूनियन ने Aykroyd फॉर्मूला का हवाला देते हुए तर्क दिया कि न्यूनतम वेतन तय करने में न्यूनतम भोजन, आवास, कपड़े और अन्य जरूरी खर्चों को आधार बनाना चाहिए। इससे न केवल कर्मचारियों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था में उपभोग भी बढ़ेगा।
सालाना इंक्रीमेंट 6% का प्रस्ताव
सालाना इंक्रीमेंट को 3% से दोगुना कर 6% करने की मांग भी महत्वपूर्ण है। BPMS का मानना है कि DA में समय-समय पर बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं; स्थायी आय वृद्धि के लिए बेसिक पे में बड़ा इंक्रीमेंट जरूरी है। वर्तमान सिस्टम में 3% इंक्रीमेंट महंगाई की रफ्तार से पीछे रह जाता है, जिससे कर्मचारियों की वास्तविक क्रय शक्ति घटती जाती है। 6% इंक्रीमेंट से हर साल सैलरी में ठोस वृद्धि होगी, जो रिटायरमेंट के समय पेंशन को भी मजबूत बनाएगा।
परिवार इकाई 5 सदस्यों वाली
परिवार इकाई के आकार को 3 से 5 करने का सुझाव आधुनिक परिवारिक संरचना को ध्यान में रखता है। यूनियन ने कहा कि आजकल कर्मचारी माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हैं। पुरानी 3 सदस्यों वाली गणना अप्रासंगिक हो चुकी है, इसलिए न्यूनतम वेतन फॉर्मूले में इसे अपडेट किया जाए। इसके अलावा, BPMS ने HRA, TA और अन्य भत्तों में संशोधन, DA मर्जर और पेंशन में समान वृद्धि की भी मांग की है।
8वें वेतन आयोग का बैकग्राउंड
8वां वेतन आयोग की पृष्ठभूमि में देखें तो केंद्र सरकार ने 17 जनवरी 2025 को इसका गठन घोषित किया था। हर दशक में गठित होने वाला यह आयोग कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करता है। 7वें आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है, इसलिए नया आयोग 1 जनवरी 2026 से रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव से लागू हो सकता है।
लगभग 49 लाख कर्मचारी और 65 लाख पेंशनभोगी इसका इंतजार कर रहे हैं। आयोग ने 30 अप्रैल 2026 तक सभी हितधारकों से सुझाव मांगे हैं, जबकि मीटिंग के लिए 10 अप्रैल तक अपॉइंटमेंट लेना होगा। रिपोर्ट 18 महीनों में आने की उम्मीद है, जिसके बाद कैबिनेट फैसला लेगी।
संभावित प्रभाव और भविष्य
हालांकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि फिटमेंट फैक्टर 2.28 से 2.86 तक सीमित रह सकता है, जिससे न्यूनतम सैलरी ₹41,000-₹51,000 तक पहुंचेगी। फिर भी BPMS जैसे संगठनों की आक्रामक मांगें प्रक्रिया को प्रभावित करेंगी। NC-JCM, FNPO समेत अन्य यूनियनें भी अपने सुझाव दे चुकी हैं। सरकार पर ₹1.8 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन इससे उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा। कर्मचारी संगठनों का आंदोलन तेज हो रहा है- क्या सरकार इन मांगों को मानेगी? आने वाले महीने निर्णायक होंगे।





