
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज उत्तर मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) में ऑटो–रिक्शा और कैब ड्राइवरों के लिए सरकारी संरक्षण वाली ‘भारत टैक्सी’ सेवा के तहत ड्राइवर ऑनबोर्डिंग प्रोग्राम और मोबाइल ऐप का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम न केवल राज्य की राजधानी में इस तंत्र की व्यापक शुरुआत का संकेत है, बल्कि देश के लाखों सड़क मजदूर‑सारथियों की आय संरचना और सामाजिक दर्जा बदलने की दिशा में बड़ा कदम भी माना जा रहा है।
ड्राइवरों को भी “मालिक” बनाने की पहल
उत्तरी मुंबई से लोकसभा सांसद पीयूष गोयल ने कहा कि देशभर में लाखों ऑटो और कैब ड्राइवर रोजाना दिन‑रात मेहनत करते हैं, लेकिन उनके लिए न तो नियमित आय की गारंटी है, न ही उचित सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं। इसी समस्या को ध्यान में रखकर ‘भारत टैक्सी’ को एक संगठित, सहकारी‑आधारित प्लेटफ़ॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ड्राइवरों को “सर्विस प्रोवाइडर” से “भागीदार और मालिक” की स्थिति पर लाना है। उन्होंने कहा कि जो चीज छोटे‑पैमाने पर शुरू हुई थी, वह अब एक बढ़ता हुआ आंदोलन बन गई है, “लेकिन यह तो अभी बस शुरुआत है।”
‘भारत टैक्सी’ क्या है और कैसे काम करेगी?
‘भारत टैक्सी’ देश का पहला कोऑपरेटिव‑आधारित राइड‑हेलिंग प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे मल्टी‑स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट, 2002 के तहत रजिस्टर किया गया है और सहकारिता मंत्रालय इसके देखरेख में है। इसकी स्थापना 2025 में की गई थी जबकि 2026 में इसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च किया गया। इस प्लेटफ़ॉर्म पर ड्राइवर न केवल अपनी सेवाएं देते हैं, बल्कि सहकारी संस्था के सदस्य और भविष्य में लाभांश तक हासिल करने वाले शेयरधारक भी बन सकते हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 5.17 लाख ड्राइवर इस प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ चुके हैं और लगभग 50 लाख ग्राहकों ने यह सेवा उपयोग की है। सेवा फिलहाल दिल्ली‑एनसीआर, गुजरात, चंडीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में चल रही है, जबकि मुंबई से अब इसे राज्य और देश के अन्य बड़े महानगरों तक फैलाने की रणनीति तैयार है।
मुंबई लॉन्च इवेंट
कांदिवली (पश्चिम) में आयोजित लॉन्च इवेंट में 500 से अधिक ऑटो‑रिक्शा और कैब ड्राइवर उपस्थित रहे, जो अपने भविष्य के लिए नए संगठन‑आधारित मॉडल को लेकर उत्साहित दिखे। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट यूनियनों और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल में भाग लिया, जो यह दिखाता है कि यह सिर्फ डिजिटल टैक्सी नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक‑आर्थिक रोजगार ढांचा बनाने की कोशिश है। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत टैक्सी यात्रियों के लिए सस्ते, नियंत्रित और ट्रांसपेरेंट किराए के साथ विश्वसनीय सेवा बनाएगी, जिसमें सर्ज प्राइसिंग और निजी प्लेटफ़ॉर्म्स की “मनमानी दाम” जैसी शिकायतें कम हों।
ओला, उबर, रैपिडो को चुनौती
गोयल ने साफ तौर पर यह दावा किया कि भारत टैक्सी आने वाले समय में ओला, उबर और रैपिडो जैसे बड़े निजी राइड‑हेलिंग प्लेटफ़ॉर्म्स को कड़ी टक्कर देगा। उनके अनुसार, जब ड्राइवरों को ज़ीरो या बहुत कम कमीशन पर सारी कमाई खुद ही मिलती है, तो उनका प्रतिदिन का नेट इनकम निजी ऐप्स की तुलना में काफ़ी ऊपर उठता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत टैक्सी के ज़रिए ड्राइवरों की कमाई का 80-100 फीसदी उनके खाते में जाता है, जबकि निजी ऐप्स पर ईंधन, ईएमआई और 20-30 फीसदी तक कमीशन कटने के बाद उनका नेट इनकम अक्सर बहुत कम बचता है। इसी वजह से लाखों ड्राइवर इस सहकारी मॉडल की तरफ तेज़ी से आकर्षित हो रहे हैं।
ईवी और सस्ती लागत पर जोर
मंत्री ने आगे बताया कि सरकार ने सीएनजी वाहनों से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर परिवहन क्षेत्र का रुख तेज करने की रणनीति बनाई है। उनका दावा है कि खासकर उन शहरों और जिलों में जहां ऑटो और कैब की संख्या अधिक है, ईवी अपनाने से ईंधन खर्च घट जाएगा और ड्राइवरों की आय निरंतर रूप से बेहतर होगी। इसके साथ‑साथ यात्रियों के लिए सस्ता, नियमित और पारदर्शी किराया भी संभव हो पाएगा, जिससे जनता को निजी ऐप्स की अस्थिर प्राइसिंग से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।





