
24 अप्रैल 2026 को देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन इसके बीच सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप वायरल्स पर एक भड़की हुई खबर चल रही है कि चुनाव के बाद पेट्रोल‑डीजल में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इस खबर ने आम उपभोक्ता, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और राजनीतिक वृत्तों में चिंता बढ़ा दी है, लेकिन केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि ऐसी किसी बढ़ोतरी का कोई आधिकारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
हालांकि, पीछे का तकनीकी और आर्थिक तथ्य यह है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपये‑डॉलर रेट और रिफाइनरों पर बढ़ता वित्तीय दबाव ईंधन नीति के लिए चुनौती बनता जा रहा है। इसी बीच, ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने एक सेक्टर नोट जारी कर कहा है कि अगर 29 अप्रैल तक चुनावों के बाद रिटेल ईंधन कीमतों पर लगी रोक बरकरार रही तो भविष्य में 25-28 रुपये प्रति लीटर के रेंज में “बैलेंसिंग” बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है, लेकिन यह पूरी तरह समझदारी से समझी जाने वाली अनुमान‑आधारित बात है, न कि आज कोई लागू नीति।
रिफाइनरों पर बढ़ता “वित्तीय बोझ”
कोटक की रिपोर्ट ने जोर देकर बताया है कि मौजूदा समय में रिफाइनरों को हर महीने करीब 270 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ रहा है, क्योंकि आयाती कच्चे तेल की लागत ऊंची चल रही है, जबकि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग जैसी-तैसी ही बनी हुई हैं। एक्साइज ड्यूटी में कई बार हुई कटौती और अन्य ईंधनों की कीमतों में सीमित बदलावों के बावजूद यह दबाव कंपनियों के वित्तीय बयानों पर नुकसान के रूप में दिख रहा है। ब्रोकरेज का दावा है कि अगर यह स्थिति और लंबे समय तक बनी रही तो राजस्व और मार्जिन दोनों पर सीधा असर पड़ेगा, इसलिए मौजूदा रिटेल रिटेंशन को और लंबे समय तक बनाए रखना व्यवहारिक नहीं रहेगा।
इसी तर्क से उसने चुनावों के बाद के दौर को एक पोटेंशियल “प्राइस बैलेंसिंग” पीरियड” के रूप में देखा है, जब सरकार को या तो घाटे को स्वीकार करना पड़ेगा या उपभोक्ता कीमतों में समायोजन करना पड़ेगा। पर यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह “हो सकता है” वाला अनुमानित स्केनरियो है, न कि आज की नीति या निर्णय।
तेजी से बढ़ता आयात बिल और वैश्विक भू‑राजनीति
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का कारण भू‑राजनीतिक उथल‑पुथल, खासकर पश्चिम एशिया में तनाव, है। इसके कारण ब्रेंट क्रूड जैसे इंडेक्स लगातार ऊंचे स्तर पर चल रहे हैं, जिससे भारत की आयात लागत में काफी तेजी आई है। हाल के हफ्तों में भारत क्रूड की कम मात्रा आयात करते हुए भी अपने पेट्रोलियम आयात बिल में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज कर चुका है, क्योंकि प्रति बैरल कीमत इतनी बढ़ गई है कि छोटी मात्रा भी अधिक राशि बना रही है।
इस बीच कई देशों ने पहले ही ऊंची लागत का बोझ उपभोक्ता कीमतों पर डाल दिया है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें लगभग एक ही स्तर पर बनी हुई हैं। इसका अर्थ है कि आंतरिक मार्जिन और सरकारी राजस्व के बीच एक बड़ा दबाव बना हुआ है, जिसका भुगतान या तो राजकोष से होगा या भविष्य में उपभोक्ता से।
सरकार ने क्या कहा: खबरों का पूरा खंडन
जबसे यह अफवाह‑जैसी खबर वायरल हुई कि चुनाव के बाद पेट्रोल‑डीजल ₹25–28 प्रति लीटर तक महंगा होगा, तब से केंद्र के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस पर सफाई देनी शुरू कर दी। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर स्पष्ट किया है कि “पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐसी किसी बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है”। सरकार ने ऐसी खबरों को “भ्रामक और गलतफहमी पैदा करने वाला” बताते हुए नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे सरकारी पोर्टलों, राज्य सरकारों की वेबसाइटों और तेल कंपनियों की आधिकारिक एप्स से ही अद्यतन दाम जांचें, न कि अनधिकृत ग्रुप या वायरल मैसेज पर।
इस बयान से स्पष्ट संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार चुनावी वातावरण के दौर में ईंधन कीमतों पर सीधे बड़ा झटका देने से बच रही है, क्योंकि यह उपभोक्ता मूल्य और महंगाई के मुद्दे पर राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है।
आज कीमतें: शहर‑शहर दाम
आज 24 अप्रैल 2026 को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल कीमतें निम्नानुसार बनी हुई हैं:
- दिल्ली: पेट्रोल – 94.77 रुपये, डीजल – 87.67 रुपये
- मुंबई: पेट्रोल – 103.54 रुपये, डीजल – 90.03 रुपये
- कोलकाता: पेट्रोल – 105.45 रुपये, डीजल – 92.02 रुपये
- चेन्नई: पेट्रोल – 100.80 रुपये, डीजल – 92.39 रुपये
- बेंगलुरु: पेट्रोल – 102.92 रुपये, डीजल – 90.99 रुपये
- रायपुर: पेट्रोल – 99.44 रुपये, डीजल – 93.39 रुपये
- पटना: पेट्रोल – 105.18 रुपये, डीजल – 92.04 रुपये
- रांची: पेट्रोल – 97.86 रुपये, डीजल – 92.62 रुपये
- पोर्ट ब्लेयर: पेट्रोल – 82.46 रुपये, डीजल – 78.05 रुपये
ये दाम राज्य सरकारों के वैट, टोल, लोकल टैक्स और डिस्ट्रिब्यूशन चार्ज के आधार पर अलग‑अलग होते हैं, इसलिए शहर के हिसाब से थोड़ा अंतर आम बात है, लेकिन कोई बड़ी झटको वाली बढ़ोतरी आज दर्ज नहीं हो रही।






