
आज राष्ट्रीय राजधानी समेत देश के बड़े‑बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा जा रहा है, लेकिन ऊर्जा मार्केट के अंदर तबादली जारी है। इसी बीच, घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं के लिए राहत जैसी स्थिति है, क्योंकि मार्च में हुई एक बार की बढ़ोतरी के बाद से अब तक घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में कोई नई वृद्धि नहीं हुई है। दूसरी ओर, कमर्शियल LPG पर दो बार हुई भारी बढ़ोतरी ने रेस्टोरेंट, कैटरिंग और छोटे‑मझोले व्यापारियों पर दबाव बनाए रखा है।
घरेलू LPG: बढ़ोतरी के बाद स्थिरता
राष्ट्रव्यापी स्तर पर देखें तो 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में सिर्फ एक बंद के तौर पर बदलाव किया गया है। मार्च 2026 में इस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद से उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली है क्योंकि उसके बाद अब तक नई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके चलते देश के ज्यादातर शहरों में घरेलू LPG का रेट लगभग स्थिर बना हुआ है, हालांकि यह स्तर पिछले सालों की तुलना में अभी भी काफी ऊंचा है।
कमर्शियल LPG पर दो बार बढ़ोतरी
दूसरी ओर, 19 किलोग्राम भारी कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों से व्यापारिक उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिली है। इस वर्ष अब तक कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में दो बार इजाफा किया गया है। पहली बार मार्च में 144 रुपये प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया, फिर 1 अप्रैल 2026 को इन दामों में लगभग 200 रुपये की और बढ़ोतरी कर दी गई। इससे रेस्टोरेंट, होटल, कॉर्पोरेट कैटरिंग, मैरिज हॉल और अन्य भोजन संबंधी व्यवसायों पर बोझ बढ़ा है, क्योंकि ये उद्योग अभी भी खाना पकाने के लिए पारंपरिक रसोई गैस सिलेंडर पर ही ज़्यादातर निर्भर हैं।
भौगोलिक और राजनीतिक दबाव
इन बढ़ोतरियों की पृष्ठभूमि में वैश्विक ऊर्जा संकट की धडकन झलकती है। 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी‑इजरायल हमले के बाद मध्य पूर्व के क्षेत्र में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के चलते भारत सरकार ने घरेलू और कमर्शियल LPG दोनों तरह के सिलेंडर की कीमतें बढ़ा दीं। इसका प्रमुख कारण अरब सागर के रास्ते होने वाली ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उत्पन्न हुआ खतरा था, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास आने‑जाने वाले तेल और गैस के टैंकरों पर लगातार खतरे बढ़ना।
इस स्ट्रेट के ज़रिए दुनिया का तकरीबन एक‑तिहाई से अधिक क्रूड और एलपीजी आपूर्ति होती है, इसलिए यहां रुकावटें भारत जैसे आयात‑निर्भर देश के लिए वित्तीय दबाव का कारण बन सकती हैं।
सरकार की रणनीति और नीतिगत कदम
सरकार की तरफ से यह बढ़ोतरी सिर्फ आपूर्ति‑डिमांड के तकनीकी तर्कों से जुड़ी है, बल्कि इसके पीछे घरेलू उत्पादन और आयात पर नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति भी दिखती है। केंद्र ने हाल में उन उपभोक्ताओं को नए LPG सिलेंडर लेने या खाली सिलेंडर को फिर से भरवाने से रोक दिया है, जिनके घरों में PNG (पाइपड नेचुरल गैस) की सुविधा पहले से उपलब्ध है।
इसका मकसद LPG की कमी या ओवर‑यूज़ को रोकना और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके साथ‑ साथ देश की रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि घरेलू सप्लाई को बचाया जा सके और आयात पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सके।
वैकल्पिक ऊर्जा की ओर झुकाव
इसी संदर्भ में सरकार ने घरों और उद्योगों को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर झुकाव बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहन बढ़ाया है। इलेक्ट्रिक कुकर्स, इंडक्शन स्टोव, बायो‑मास और अन्य वैकल्पिक ईंधन पर आधारित तकनीकों को अपनाने के लिए राज्य और स्थानीय स्तर पर छूट, सब्सिडी और जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि घरेलू ईंधन आपूर्ति पर पड़ने वाला दबाव कम हो और विदेशी बाजार में उतार‑चढ़ाव का असर सीधे‑सीधे आम जनता पर कम‑से‑कम पड़े।
प्रमुख शहरों में घरेलू LPG की स्थिति
आज 24 अप्रैल की स्थिति में देश के प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत निम्न स्तर पर बनी हुई है: नई दिल्ली और मुंबई में 14.2 किलो घरेलू सिलेंडर लगभग 912–915 रुपये के आसपास मिल रहा है, जबकि कोलकाता और चेन्नई में यह 930 रुपये के ऊपर दिखाई देता है। उत्तर‑पूर्व और मध्य भारत के शहरों में यह दाम और ऊपर है; पटना में घरेलू सिलेंडर की कीमत लगभग 1002.5 रुपये दर्ज हो रही है, जो देश के अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में सबसे अधिक है। तटीय क्षेत्रों जैसे पॉन्डिचेरी में यह दाम लगभग 925 रुपये प्रति सिलेंडर के आसपास बनी हुई है।
व्यापारिक खंड पर दबाव
कमर्शियल LPG की बात की जाए तो बाजार की तस्वीर और भी दबाव भरी है। दिल्ली में 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर 2078 रुपये के आसपास मिल रहा है, जबकि मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु समेत अन्य बड़े शहरों में यह दाम 2000 से 2250 रुपये के बीच बना हुआ है। पटना जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में यह दाम 2350 रुपये के आसपार दिखाई दे रहा है, जो भोजनालयों और छोटे व्यवसायों के लिए खर्च को और बढ़ा रहा है।






