
कोरोना महामारी के बाद भारतीय रियल एस्टेट बाजार में लग्जरी हाउसिंग का दौर चरम पर पहुंचा था। बड़े फ्लैट्स, आलीशान एमेनिटीज और करोड़ों के दाम वाले प्रोजेक्ट्स ने बिल्डर्स को मोटा मुनाफा कमाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरीदार छोटे-छोटे घरों को छोड़कर स्पेशियस और लग्जरी फील वाले आवासों की ओर रुख कर रहे थे।
लेकिन अब यही लग्जरी सेगमेंट बिल्डर्स के लिए सिरदर्द बन गया है। देशभर में बिना बिके फ्लैट्स का अंबार लग रहा है, जबकि मिडिल क्लास की पहुंच से ये घर दूर हो चुके हैं। ब्रोकरेज हाउस नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर डेवलपर्स मिडिल क्लास पर फोकस नहीं करेंगे, तो बिक्री में और गिरावट आएगी।
कोविड के बाद लग्जरी का उछाल
कोविड के बाद 2021-2024 के बीच लग्जरी हाउसिंग में जबरदस्त उछाल आया। JLL और Anarock जैसी एजेंसियों की रिपोर्ट्स बताती हैं कि HNIs (हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स) और UHNIs ने प्रीमियम प्रॉपर्टीज पर जोरदार खरीदारी की। मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु जैसे शहरों में ₹1 करोड़ से ऊपर के घरों की बिक्री 52% से बढ़कर 62% हो गई।
बिल्डर्स ने अच्छे मार्जिन के चक्कर में अफोर्डेबल हाउसिंग को नजरअंदाज कर दिया। नए प्रोजेक्ट्स में 42% सप्लाई लग्जरी और अल्ट्रा-लक्जरी कैटेगरी में डाली गई। नतीजा? फ्लैट्स के दाम आसमान छूने लगे- ₹50 करोड़ वाले पेंटहाउस तक बिके। लेकिन मिडिल क्लास के लिए EMI बोझ, महंगाई और जॉब अनिश्चितताओं ने घर खरीदना मुश्किल कर दिया।
अनसोल्ड इन्वेंटरी का बढ़ता संकट
अब अनसोल्ड इन्वेंटरी का संकट गहरा गया है। नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक टॉप 7 शहरों में अनसोल्ड स्टॉक 20 महीने के स्तर पर पहुंच गया, जो फरवरी में 19 महीने था। Anarock डेटा दिखाता है कि 2025 में यह 4% बढ़कर 5.77 लाख यूनिट्स हो गया। बेंगलुरु में सबसे बुरी स्थिति- 93,044 फ्लैट्स बिना बिके पड़े हैं, जिनमें ज्यादातर 3BHK हैं। आईटी हब होने के बावजूद खरीदार 1-2BHK को प्रेफर कर रहे हैं, क्योंकि जॉब मोबिलिटी ज्यादा है।
हैदराबाद में 28 महीने, पुणे-चेन्नई में 19-24 महीने का स्टॉक। बिक्री वॉल्यूम सालाना 11% गिरा, खासकर ₹50 लाख से कम के सस्ते घरों में 23-30% की टूट। इसके उलट वैल्यू सेल्स स्थिर हैं, क्योंकि लग्जरी में 11% ग्रोथ बनी हुई है।
बिल्डर्स पर बढ़ता दबाव
बिल्डर्स की चिंता बढ़ रही है। नुवामा का कहना है कि नए लॉन्च तेज हैं, लेकिन बिक्री रफ्तार धीमी। प्रॉफिट मार्जिन गिरने से कंपनियां दबाव में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डेवलपर्स को अब अफोर्डेबिलिटी पर फोकस करना होगा- टिकट साइज छोटा करें, दाम सीमित रखें। 2026 की पहली तिमाही में 8 शहरों में कुल सेल्स 4% घटीं। हालांकि, नीति आयोग ने बजट 2026 से पहले सुझाव दिया है कि किफायती हाउसिंग बिल्डर्स को 100% टैक्स छूट मिले, ताकि सप्लाई बढ़े। बेंगलुरु जैसे शहरों में छोटे फ्लैट्स या प्राइस कट की जरूरत। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो बिक्री धीमी रहेगी।
भविष्य की राहत और चेतावनी
राहत की बात यह है कि लग्जरी का एक हिस्सा अभी भी मजबूत है- प्रीमियम खरीदार लोन पर कम निर्भर। लेकिन मिडिल क्लास के बिना बाजार अधूरा। बिल्डर्स को पुरानी रणनीति छोड़कर मिड-इनकम ग्रुप के लिए 45 लाख से कम के घर लॉन्च करने होंगे। मीडिया की रिपोर्ट्स भी अनसोल्ड स्टॉक की बढ़ती समस्या को रेखांकित करती हैं। कुल मिलाकर, रियल एस्टेट में संतुलन की जरूरत- लग्जरी का क्रेज कम नहीं हुआ, लेकिन सस्ते घरों की अनदेखी घातक साबित हो रही। भविष्य में हाइब्रिड मॉडल ही कामयाब होगा।





