
अगर आप सुरक्षित निवेश और टैक्स बचत के चक्कर में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) अकाउंट खोलने की सोच रहे हैं, तो रुकिए। अक्सर लोग मान लेते हैं कि खाता खोलते ही पैसा 15 साल के लिए पूरी तरह लॉक हो जाता है, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा जटिल है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लाखों निवेशक पीपीएफ की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि यह सरकारी गारंटी वाला स्कीम है जो 7.1 प्रतिशत ब्याज (वर्तमान दर) देता है।
लेकिन लॉकिंग पीरियड की बारीकियां न समझीं तो आपका पैसा कैलेंडर के हिसाब से 15 साल से भी ज्यादा समय तक अटक सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर निवेश और निकासी नियमों का पालन न करने से ब्याज का नुकसान हो सकता है।
पीपीएफ मैच्योरिटी की सही गिनती समझें
पीपीएफ की मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है, लेकिन यह गिनती अकाउंट खोलने की तारीख से नहीं, बल्कि उस वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन यानी 31 मार्च से शुरू होती है, जिसमें आपने पहली जमा की। मसलन, अगर आप अप्रैल 2026 में अकाउंट खोलते हैं और जमा करते हैं, तो मैच्योरिटी 31 मार्च 2042 को पूरी होगी। इसका मतलब आपका पैसा लगभग 16 कैलेंडर साल तक लॉक रहेगा।
अगर आप जनवरी 2027 में निवेश शुरू करते हैं, तो भी गिनती 31 मार्च 2027 से चलेगी, यानी मैच्योरिटी अप्रैल 2042 तक खिंच सकती है। यह ‘गुप्त नियम’ कई निवेशकों को भ्रमित करता है, क्योंकि लोग सोचते हैं कि खाता खोलने के ठीक 15 साल बाद पैसा मिल जाएगा।
ब्याज अधिकतम पाने के टिप्स
ब्याज अधिकतम पाने के लिए निवेश का समय भी महत्वपूर्ण है। पीपीएफ में ब्याज हर महीने की 5 तारीख से महीने के अंत तक न्यूनतम बैलेंस पर कैलकुलेट होता है। इसलिए हर माह की 5 तारीख से पहले जमा करें, ताकि पूरा महीना ब्याज कमा सके। उदाहरणस्वरूप, अप्रैल में 1 से 5 तारीख के बीच जमा करने पर सिर्फ 25 दिनों का ब्याज मिलेगा, जबकि महीने शुरू में जमा पर पूरा फायदा। वर्तमान में अधिकतम वार्षिक जमा सीमा 1.5 लाख रुपये है, न्यूनतम 500 रुपये। मैच्योरिटी के बाद खाते को 5-5 साल के ब्लॉक में बिना जमा या सीमित जमा के एक्सटेंड किया जा सकता है, जो अतिरिक्त ब्याज का मौका देता है।
पीपीएफ के टैक्स लाभ की खासियत
पीपीएफ की सबसे बड़ी ताकत इसका EEE (एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट) टैक्स स्टेटस है। धारा 80C के तहत निवेश पर 1.5 लाख तक छूट, ब्याज आय टैक्स-फ्री और मैच्योरिटी राशि भी पूरी तरह छूट प्राप्त। लेकिन लंबी लॉकिंग से बचने के लिए निकासी विकल्प जरूरी समझें। खाता खोलने के तीसरे साल से लोन सुविधा शुरू हो जाती है। पहले तीन साल मूलधन + ब्याज का 25 प्रतिशत तक लोन मिलता है, जो 1 प्रतिशत ब्याज पर चुकाना होता है। चौथे से छठे साल तक यह 50 प्रतिशत हो जाता है। एक समय में सिर्फ एक लोन चल सकता है, और चुकौती 36 महीने में होनी चाहिए।
निकासी और लोन के नियम
निकासी के मामले में 7वें वर्ष से पार्शियल विदड्रॉल की अनुमति मिलती है, जो पिछले तीन साल के औसत बैलेंस का 50 प्रतिशत तक। प्रति वर्ष सिर्फ एक बार, और फॉर्म-2 भरना पड़ता है। गंभीर जरूरतों जैसे मेडिकल इमरजेंसी, बच्चे की उच्च शिक्षा या घर खरीदने पर 5वें वर्ष के बाद प्रीमैच्योर क्लोजर संभव है, लेकिन 1-2 प्रतिशत ब्याज कटौती के साथ। उदाहरण के लिए, अगर कैंसर जैसी बीमारी हो, तो मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ पूरा बैलेंस निकाल सकते हैं। मैच्योरिटी पर कोई पाबंदी नहीं, पूरी राशि टैक्स-फ्री।
निवेशकों के लिए विशेषज्ञ सलाह
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इमरजेंसी फंड अलग रखें, क्योंकि पीपीएफ लिक्विड नहीं। पोस्ट ऑफिस या बैंक में ऑनलाइन खाता खोलें, PAN अनिवार्य। महिलाओं और नाबालिगों के लिए अलग कोटा है। अगर आप लॉन्ग-टर्म गोल्स जैसे रिटायरमेंट प्लानिंग कर रहे हैं, तो पीपीएफ बेस्ट है, लेकिन इन नियमों को नजरअंदाज न करें। गलतफहमी से बचें, वरना 15 साल का इंतजार और भी लंबा लगेगा।









