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IIT Admission Process: जेईई मेन के बाद क्या? जानें आईआईटी में एडमिशन पाने का पूरा प्रोसेस और जरूरी कट-ऑफ

जेईई मेन के बाद आईआईटी में एडमिशन के लिए छात्रों को सबसे पहले जेईई एडवांस पास करना होता है, फिर ऑल इंडिया रैंक के आधार पर JoSAA काउंसलिंग में चॉइस फिल करनी पड़ती है। रैंक, सीट उपलब्धता और कैटेगरी के हिसाब से सीट आवंटन होता है, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा करने के बाद ही एडमिशन कन्फर्म माना जाता है।

By Pinki Negi

IIT Admission Process: जेईई मेन के बाद क्या? जानें आईआईटी में एडमिशन पाने का पूरा प्रोसेस और जरूरी कट-ऑफ

मई 2026 के पहले हफ्ते में जेईई मेन सेशन‑2 के रिजल्ट जल्द घोषित होने की उम्मीद है। लाखों छात्र, खासकर कक्षा 12वीं के युवा, अब यह जानना चाहते हैं कि अगले कुछ हफ्तों में उनका IIT में दाखिले का रास्ता कैसे खुलेगा। कई छात्र और अभिभावक यह मान लेते हैं कि जेईई मेन में अच्छा स्कोर आते ही आईआईटी की सीट यारों के बीच चर्चा‑स्तर पर तय हो जाती है, लेकिन असली प्रक्रिया उससे काफी जटिल, लेकिन स्पष्ट चरण‑बद्ध है।

जेईई मेन: बस एक शुरुआत

जेईई मेन सिर्फ इंजीनियरिंग प्रवेश का पहला चरण है, IIT का टिकट नहीं। इस परीक्षा के ज़रिए छात्र NIT, IIIT, GFTI और कई अन्य सरकारी/अर्ध‑सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए पात्र बनते हैं, लेकिन आईआईटी के लिए इसका सीधा इस्तेमाल “क्वालिफाइंग टेस्ट” के रूप में होता है। इसलिए जेईई मेन के रिजल्ट आने के बाद भी छात्रों को यह जानना ज़रूरी है कि अगला बड़ा कदम क्या है।

जेईई एडवांस: IIT की असली परीक्षा

आईआईटी में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण दूसरा चरण है जेईई एडवांस। यह परीक्षा सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों के लिए होती है, जो जेईई मेन में निर्धारित कट‑ऑफ और रैंक‑लिमिट पार करते हैं। आमतौर पर देश के लगभग 2.5 लाख से कम उम्मीदवारों को जेईई एडवांस के लिए अप्लाई करने की अनुमति मिलती है, जो देश के लगभग 23 आईआईटी में बीटेक और कुछ अन्य इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए एडमिशन की दौड़ में शामिल होने का अवसर पाते हैं।

शैक्षणिक योग्यता: 12वीं भी ज़रूरी

जेईई मेन और जेईई एडवांस के अलावा छात्रों को शैक्षणिक योग्यता का भी ध्यान रखना होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को 12वीं बोर्ड परीक्षा में निर्धारित प्रतिशत अंक हासिल करने होते हैं, जो आमतौर पर 75% के आसपास होते हैं। आरक्षित वर्ग (SC/ST/PwD) के लिए यह छूट लगभग 65% तक जाती है। इसका मतलब यह है कि बोर्ड के अंक अब भी तय करते हैं कि छात्र JEE Advanced क्वालिफाई करने के लिए योग्य है या नहीं। इसलिए छात्रों को बोर्ड परीक्षा के नियमों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।

ऑल इंडिया रैंक (AIR): रैंक ही तय करती है

जेईई एडवांस के परिणाम के आधार पर छात्रों को ऑल इंडिया रैंक (AIR) दी जाती है। यही रैंक निर्धारित करती है कि छात्र को कौन‑सा IIT और कौन‑सी ब्रांच मिल सकती है। बेहतर रैंक होने पर पसंदीदा संस्थान और कोर्स मिलने की संभावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, टॉप 100 रैंक वाले छात्रों को आमतौर पर IIT Bombay या IIT Delhi जैसी टॉप‑लेवल इंस्टीट्यूशन में CSE या अन्य प्रतिष्ठित ब्रांच मिलने की संभावना अधिक होती है।

JoSAA काउंसलिंग: सीट आवंटन की प्रक्रिया

जेईई एडवांस के परिणाम के आधार पर JoSAA (Joint Seat Allocation Authority) की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें छात्र अपनी पसंद के IIT, NIT, IIIT और ब्रांच विकल्प भरते हैं। काउंसलिंग कई राउंड में होती है, जहां रैंक, सीट उपलब्धता और कैटेगरी के आधार पर सीट आवंटन किया जाता है। अगर कोई सीट खाली रह जाती है, तो बाद में अतिरिक्त काउंसलिंग राउंड भी आयोजित किए जा सकते हैं।

अंतिम कदम: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस

अंतिम सीट मिलने के बाद छात्रों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, फीस जमा करना और संस्थान की रिपोर्टिंग जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। सभी चरण पूरे होने के बाद ही एडमिशन कन्फर्म माना जाता है। इसलिए छात्रों को अलग‑अलग चरणों पर ध्यान देना और समय पर कार्यवाही करना ज़रूरी है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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