
दिल्ली में सुबह–शाम चौराहों पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ी योजनाबद्ध कवायद शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की तरफ से शहर के 18 जाम वाले मुख्य स्थानों पर नए फ्लाईओवर या अंडरपास बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसमें से कुछ जगहों पर सर्वे और विशेषज्ञ अध्ययन चल रहा है, तो किसी‑किसी पर टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे निर्माण काम जल्द शुरू हो सके।
“फ्लाईओवर या अंडरपास, विशेषज्ञों की राय से तय होगा”
PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकार “18 जगहों पर योजनाबद्ध तरीके से फ्लाईओवर बनाने की” बात चला रही है, लेकिन हर जगह सिर्फ फ्लाईओवर ही बनेगा, यह दावा जल्दबाजी वाला होगा। उनके अनुसार, हर चौराहे या कॉरिडोर पर यह विशेष रूप से देखा जाएगा कि क्या एलिवेटेड फ्लाईओवर अधिक उपयुक्त रहेगा या जमीन से नीचे जाने वाला अंडरपास। इसके लिए ट्रैफिक इंजीनियर, शहरी नियोजन विशेषज्ञ और भूमि उपयोग के एक्सपर्ट समेत विशेषज्ञों की राय ली जाएगी।
इन अध्ययनों के आधार पर Detailed Project Report (DPR) तैयार की जाएगी, जिसके मंजूर होने के तुरंत बाद निर्माण शुरू कर दिया जाएगा, ताकि लोगों को ट्रैफिक जाम से जल्द राहत मिल सके।
अभी कहां-क्या काम चल रहा है?
प्रोजेक्ट की कुल आकृति “18 फ्लाईओवर” के रूप में बताई जा रही है, लेकिन अभी अधिकांश स्थानों पर अध्ययन और व्यवहार्यता जांच चल रही है। जानकारी के अनुसार, इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन से यूईआर–2 जैसे हाई‑ट्रैफिक कॉरिडोर, आईटीओ, नजफगढ़ से कापसहेड़ा और शादीपुर डिपो समेत कई इलाकों में ट्रैफिक सर्वे और डिजिटल डेटा कलेक्शन का काम जारी है। इन जगहों पर दिनभर के ट्रैफिक फ्लो, चौड़ाई, इंटरसेक्शन पैटर्न और भविष्य की वाहन बढ़ोतरी का आकलन किया जा रहा है, ताकि फ्लाईओवर या अंडरपास डिजाइन ऐसा हो कि एक ही बार में जाम घटाने का असर दिखे।
रिंग रोड और सागरपुर से मायापुरी जैसे व्यस्त कॉरिडोरों पर अभी प्राथमिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जिसमें बताया गया है कि किस स्थान पर एलिवेटेड गलियारे या फ्लाईओवर से जाम कम होने की संभावना सबसे ज्यादा है। वहीं, कंझावला से मंगोलपुरी और केशोपुर से हैदरपुर जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसका मतलब है कि यहां जल्द ही निर्माण शुरू हो सकता है और ये इलाके उन 18 में से वही हैं, जहां जाम से लोगों को ठोस राहत मिलने की उम्मीद है।
गाड़ियों की भीड़ और 100 फ्लाईओवर के बावजूद जाम
मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने यह भी बताया कि दिल्ली में अभी लगभग 100 फ्लाईओवर और अंडरपास हैं, लेकिन गाड़ियों की संख्या में लगातार ग्रोथ के चलते जाम नए‑नए इलाकों में फैल रहा है। उनके अनुसार, अभी शहर में सुबह और शाम के समय जाम एक “नॉर्मल” घटना बन गया है, जिससे रोजाना लाखों लोग लंबा समय खो रहे हैं, ईंधन बर्बाद हो रहा है और वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इसी वजह से PWD लगातार नए कदम उठा रहा है, चाहे वह फ्लाईओवर की योजना हो, एलिवेटेड कॉरिडोर हो या फिर चौराहों पर री‑सिग्नलाइजेशन जैसे छोटे‑स्तर के इंजीनियरिंग बदलाव।
विधायकों की मांग भी शामिल
इन 18 जगहों को चुनते हुए सरकार ने विधायकों के सुझावों को भी गंभीरता से लिया है। जानकारी के मुताबिक, PWD मंत्री ने शहर के सभी विधायकों से उनके विधानसभा क्षेत्रों में जाम वाले चौराहों पर फ्लाईओवर, अंडरपास या फुटओवर ब्रिज की आवश्यकता के बारे में जानकारी मांगी थी।
कई विधायकों ने अपने इलाकों में जाम की गंभीर समस्या बताते हुए फ्लाईओवर की सीधी मांग रखी, जिनमें से कुछ ऐसे स्थान उन 18 में शामिल किए जा रहे हैं, जहां अध्ययन और टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि योजना बस टेक्निकल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीन पर लोगों की वास्तविक परेशानी को भी प्राथमिकता मिलेगी।
आगे क्या होगा?
सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि जैसे ही सभी 18 जगहों के विशेषज्ञ अध्ययन पूरे होंगे और DPR तैयार हो जाएगी, इस योजना को अंतिम अनुमति देकर निर्माण कार्य उन इलाकों से शुरू किया जाएगा, जहां तैयारी सबसे आगे है। बवाना जैसे औद्योगिक कॉरिडोरों पर बनने वाला फ्लाईओवर इसी दिशा का हिस्सा है, जहां भारी वाहनों की चपेट में रोजाना सैकड़ों छोटे वाहन फंसे रहते हैं। अगर इन प्रोजेक्टों को निर्धारित टाइमलाइन पर पूरा किया जाता है तो दिल्लीवासियों को जाम से “परमानेंट आजादी” तो नहीं, लेकिन काफी हद तक राहत अवश्य मिल सकती है, खासकर शहर के बाहरी और औद्योगिक इलाकों में।









