
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए स्मार्टफोन्स में आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने की योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इसका मतलब है कि ऐपल, सैमसंग, गूगल और अन्य स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को अब अपने फोन में आधार ऐप को डिफॉल्ट रूप से लोड करने की बाध्यता से मुक्त कर दिया गया है। यह निर्णय करोड़ों आधार कार्ड धारकों के लिए निराशाजनक है, क्योंकि इससे पहचान सत्यापन, बैंकिंग, टेलीकॉम सेवाओं और यहां तक कि एयरपोर्ट एंट्री जैसी दैनिक सुविधाओं में आसानी की उम्मीद टूट गई।
UIDAI की मूल योजना
पिछले कुछ महीनों से UIDAI इस योजना को लेकर सक्रिय था। जनवरी 2026 में UIDAI ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय से अनुरोध किया था कि वह ऐपल, गूगल, सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों से बातचीत कर आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल्ड करने पर विचार करे। आधार कार्ड भारत का सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला पहचान दस्तावेज है, जिसके पास करीब 1.34 अरब लोगों के 12 अंकीय यूनिक आईडी नंबर जुड़े हैं।
सरकार का मकसद था कि यूजर्स को बिना ऐप डाउनलोड किए तुरंत सेवाओं का लाभ मिले। उदाहरण के लिए, बैंक खाता खोलना, सिम कार्ड लेना या हवाई अड्डे पर चेक-इन करना आसान हो जाता। लेकिन अब यह सुविधा रुक गई है।
नए आधार ऐप की खासियतें
हाल ही में लॉन्च हुए नए आधार ऐप ने पहले ही यूजर्स को घर बैठे मोबाइल नंबर, पता और नाम अपडेट करने की सुविधा दी है। नवंबर 2025 में शुरू हुए इस ऐप के फुल वर्जन में ई-आधार डाउनलोड, फेस ऑथेंटिकेशन और ऑफलाइन वेरिफिकेशन जैसे फीचर्स हैं। फिर भी, प्री-इंस्टॉलेशन से यह ऐप हर स्मार्टफोन यूजर तक सीधे पहुंचता, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां ऐप स्टोर से डाउनलोड करना चुनौतीपूर्ण होता है। UIDAI ने फरवरी 2026 में निजी ऐप्स में फेस ऑथेंटिकेशन की मंजूरी भी दी थी, जो डिजिटल गोपनीयता बढ़ाता। लेकिन प्री-लोडिंग योजना अब रद्द होने से ये फायदे सीमित रहेंगे।
कंपनियों का विरोध क्यों?
स्मार्टफोन कंपनियों ने इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया था। ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियों का कहना था कि प्री-इंस्टॉलेशन से डिवाइस की सुरक्षा और सॉफ्टवेयर कम्पैटिबिलिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। हर फोन मॉडल के लिए अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम होने से एक ही ऐप सभी पर फिट नहीं बैठता। साथ ही, भारत के लिए विशेष मैन्युफैक्चरिंग लाइनें सेटअप करने से उत्पादन लागत 10-15 प्रतिशत तक बढ़ जाती।
कंपनियों ने प्राइवेसी चिंताओं को भी उठाया – आधार जैसा संवेदनशील डेटा डिफॉल्ट ऐप में होने से डेटा लीक का खतरा बढ़ सकता है। एक वरिष्ठ उद्योग अधिकारी ने बताया कि iOS और एंड्रॉयड के सख्त सिक्योरिटी प्रोटोकॉल ऐप प्री-लोडिंग को जटिल बनाते हैं।
सरकार का पीछे हटना
सरकार ने इन चिंताओं को स्वीकार करते हुए पीछे हटने का फैसला लिया। IT मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हर सरकारी ऐप को प्री-लोड करना जरूरी नहीं। हम केवल वे ऐप्स सपोर्ट करेंगे जो राष्ट्रीय सुरक्षा या आपात सेवाओं से जुड़े हों।” पिछले दो वर्षों में यह छठी बार है जब ऐसी कोई कोशिश विफल हुई। पहले UPI ऐप्स, डिजिटल लॉकर और अन्य सरकारी ऐप्स के लिए भी यही हुआ। इंडस्ट्री की एकजुट राय और तकनीकी बाधाओं ने सरकार को मजबूर किया।
यूजर्स के लिए क्या?
यह फैसला स्मार्टफोन कंपनियों के लिए राहत है, लेकिन आम यूजर को अब Google Play Store या App Store से खुद ऐप डाउनलोड करना पड़ेगा। आधार धारकों को सलाह है कि वे तुरंत नया ऐप इंस्टॉल करें, क्योंकि पुराना mAadhaar ऐप अब अपडेटेड फीचर्स से वंचित है। अपडेट फीस ₹75 से ₹125 तक है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में क्लाउड-बेस्ड वेरिफिकेशन से यह कमी पूरी हो सकती है। फिलहाल, यह निर्णय डिजिटल इंडिया की गति को धीमा करता दिख रहा है, जहां आधार जैसी तकनीकें केंद्रीय हैं।









