
अक्षय तृतीया से ठीक पहले सोने-चांदी के बाजार में आई हलचल ने खरीदारों और निवेशकों दोनों का ध्यान खींच लिया है। शुक्रवार को घरेलू बाजार में सोने के दाम में नरमी दर्ज की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा। सरकार की ओर से सोने-चांदी के आयात को लेकर मिली नई अनुमति ने सप्लाई संकट की आशंका को फिलहाल कम किया है, लेकिन वैश्विक संकेत अभी भी तेजी की तरफ इशारा कर रहे हैं।
बाजार में अचानक नरमी
अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को है और आमतौर पर इस मौके से पहले सोने में मजबूती देखी जाती है। लेकिन इस बार शुक्रवार को सोने के भाव में गिरावट आई, जिससे खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों को कुछ राहत मिली। रिपोर्टों के मुताबिक 24 कैरेट सोना शाम को घटकर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब बंद हुआ, जबकि चांदी में भी गिरावट देखी गई और रेट 2.50 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास रहा। MCX पर भी सोना मामूली बढ़त या नरमी के साथ कारोबार करता दिखा, जो बताता है कि बाजार दिशा को लेकर स्पष्ट नहीं है।
आयात पर रोक से मचा था दबाव
पिछले कुछ समय से भारतीय बैंकों ने विदेश से सोने-चांदी के आयात पर रोक लगाई हुई थी, क्योंकि सरकार की तरफ से कस्टम ड्यूटी और अनुमति को लेकर स्पष्ट आदेश समय पर नहीं आया था। इसके चलते लगभग 5 टन सोना और 8 टन चांदी बंदरगाहों पर फंसे रहने की खबरें सामने आईं। भारत सोने-चांदी के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए इस देरी से बाजार में सप्लाई कम होने की आशंका बढ़ गई थी। यही वजह थी कि अक्षय तृतीया से पहले कीमतों में उछाल का डर बना हुआ था।
सरकार के फैसले का असर
अब सरकार ने बैंकों को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक सोने-चांदी के आयात की अनुमति दे दी है। दो बैंकों को केवल सोना आयात करने की मंजूरी भी मिली है। इस फैसले के बाद सर्राफा बाजार में तुरंत असर दिखा और सोने की कीमतों में नरमी आई। बाजार के जानकार मानते हैं कि यह कदम कम से कम निकट अवधि में सप्लाई का तनाव घटा सकता है, लेकिन पूरी तस्वीर अभी भी वैश्विक बाजार, डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय संकेत
विदेशी बाजार में सोने ने शुक्रवार को मजबूती दिखाई और स्पॉट गोल्ड में 45 डॉलर प्रति औंस तक की तेजी देखी गई। कारोबारी सत्र के दौरान सोना ऊपरी स्तर तक भी गया, हालांकि बाद में कुछ नरमी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान तनाव कम होता है, या ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी फेड से नरम संकेत मिलते हैं, तो सोने-चांदी में और तेजी संभव है। यानी घरेलू राहत के बावजूद वैश्विक बाज़ार अभी भी कीमतों को ऊपर धकेल सकता है।
खरीदारी का गणित
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना भारतीय परंपरा में शुभ माना जाता है, इसलिए ज्वेलरी की मांग हर साल मजबूत रहती है। पिछले साल इस मौके पर लगभग 20 टन सोने की बिक्री हुई थी, जिसका अनुमानित मूल्य करीब 12,000 करोड़ रुपये था। इस साल ज्वेलर्स एसोसिएशन को 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बिक्री की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में जो लोग केवल शुभ मुहूर्त के लिए खरीदारी करना चाहते हैं, उनके लिए रेट में आई मौजूदा नरमी फायदा दे सकती है, लेकिन निवेश के लिहाज से जल्दबाजी से बचना समझदारी होगी।
निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञ आमतौर पर सोने में लंबे समय की रणनीति, खासकर SIP जैसे तरीके, को बेहतर मानते हैं। बड़े निवेश से पहले बाजार का रुख, अंतरराष्ट्रीय तनाव, डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरों पर नजर रखना जरूरी है। अगर आप गहनों के लिए खरीद रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट खरीदारी का मौका दे सकती है। लेकिन अगर लक्ष्य सिर्फ रिटर्न है, तो धैर्य और चरणबद्ध खरीद ज्यादा सुरक्षित मानी जाएगी।









