
मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (JFSL) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ में 14 फीसदी की गिरावट का सामना करने के बावजूद अपने शेयरधारकों को सरप्राइज उपहार दिया है। कंपनी के बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए प्रति इक्विटी शेयर 0.60 रुपये का डिविडेंड घोषित करने की सिफारिश की है। यह ऐलान न सिर्फ निवेशकों के बीच उत्साह लाया है, बल्कि कंपनी की मजबूत वित्तीय नीति और भविष्य की आशावादी रणनीति को भी रेखांकित करता है।
पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में जहां शुद्ध लाभ 316 करोड़ रुपये था, वहीं इस बार यह घटकर 272 करोड़ रुपये रह गया। फिर भी, बोर्ड का यह फैसला बाजार को यह संदेश देता है कि JFSL दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर कायम है।
तिमाही वित्तीय नतीजे
वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछली तिमाही के मुकाबले कमजोर रहा। कुल आय तो लगभग दोगुनी होकर 1,020 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में 518 करोड़ रुपये थी। लेकिन कुल खर्चों में भारी उछाल आया, जो 169 करोड़ रुपये से बढ़कर 720 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जियोपॉलिटिकल अस्थिरता के कारण बड़े कैपिटल बेस पर ट्रेजरी आय प्रभावित हुई। पूरे वित्त वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो नेट प्रॉफिट 1,561 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 1,613 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी बेस इफेक्ट और ऑपरेशनल खर्चों जैसे लेंडिंग विस्तार, डिजिटल सेवाओं में निवेश तथा नए बाजारों में प्रवेश से जुड़ी है। इसके बावजूद, JFSL ने इसे एक ‘अहम मोड़’ करार दिया है, जो बुनियादी कारोबार से हटकर विविध व्यवसायों में निरंतर गति की ओर इशारा करता है।
संगठनात्मक बदलाव और बैंक प्रदर्शन
डिविडेंड घोषणा के साथ ही कंपनी ने संगठनात्मक बदलाव भी किए। अन्नपूर्णा वेंकटरमणन को ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के पद पर नियुक्ति को मंजूरी मिली, जो 11 मई 2026 से प्रभावी होगी। यह कदम कंपनी की वित्तीय प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। Jio Payments Bank के प्रदर्शन ने भी उत्साहवर्धक संकेत दिए। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में बैंक की कुल आय सालाना आधार पर 11 गुना बढ़कर 87 करोड़ रुपये हो गई।
CASA (करंट एंड सेविंग्स अकाउंट) कस्टमर बेस 61 फीसदी उछलकर 3.7 मिलियन तक पहुंचा। हर ग्राहक का औसत डिपॉजिट 20 फीसदी बढ़कर 1,439 रुपये हो गया। इसके अलावा, बैंक के टोल प्रोसेसिंग ऑपरेशन अब 8 राज्यों के 18 टोल प्लाजा पर सक्रिय हैं, जो डिजिटल पेमेंट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर एकीकरण की ताकत दिखाता है।
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही। BSE पर JFSL का शेयर पिछले बंद भाव से 1.10 फीसदी ऊपर 243.95 रुपये पर बंद हुआ, जबकि कारोबारी दिन में यह 245.45 रुपये के उच्चतम स्तर को छू गया। हालांकि, पिछले साल अगस्त में यह 338.45 रुपये के 52-सप्ताह उच्च पर था, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है। निवेशकों के लिए यह डिविडेंड न केवल तात्कालिक रिटर्न है, बल्कि कंपनी की कैश फ्लो स्थिरता का प्रमाण भी।
पहले वित्त वर्ष 2024-25 में भी JFSL ने प्रति शेयर 0.50 रुपये का डिविडेंड दिया था, जो कंपनी के पहले कैश रिवॉर्ड के रूप में मील का पत्थर साबित हुआ। उस समय Q4 में लाभ 316 करोड़ रुपये था और AUM में 5680 फीसदी की वृद्धि हुई थी।
भविष्य की संभावनाएं
JFSL का सफर रिलायंस इंडस्ट्रीज के डीमर्जर से शुरू हुआ था और अब यह लेंडिंग, इंश्योरेंस, पेमेंट्स तथा वेल्थ मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है। मुनाफे की गिरावट के बावजूद डिविडेंड का ऐलान निवेशकों का भरोसा कायम रखने का सशक्त संकेत है। भविष्य में जियोपॉलिटिकल स्थिरता और लागत नियंत्रण से कंपनी पटरी पर लौट सकती है। कुल मिलाकर, यह कदम बताता है कि अंबानी ग्रुप की रणनीति लाभांश के साथ विकास को संतुलित रखने पर केंद्रित है। निवेशक समुदाय इसे लंबी अवधि के लिए सकारात्मक मान रहा है।









