
केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। प्रमुख कर्मचारी संगठन नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) ने सरकार को 51 पेज का विस्तृत मेमोरेंडम सौंपा है, जिसमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को 18,000 रुपये से सीधे 69,000 रुपये करने, फिटमेंट फैक्टर को 3.833 करने और सालाना इंक्रीमेंट को 3% से दोगुना 6% करने जैसी क्रांतिकारी मांगें शामिल हैं।
ये प्रस्ताव अगर मंजूर होते हैं, तो हर महीने हजारों रुपये की बढ़ोतरी के साथ कर्मचारियों की जेब मजबूत हो जाएगी। बढ़ती महंगाई के दौर में ये मांगें न केवल वेतन संरचना को सरल बनाएंगी, बल्कि जीवन स्तर को भी ऊंचा उठाएंगी।
वर्तमान सैलरी और प्रस्तावित बढ़ोतरी
7वें वेतन आयोग के तहत फिलहाल न्यूनतम लेवल-1 (MTS/ग्रुप D) कर्मचारी को 18,000 रुपये बेसिक सैलरी मिलती है, जिसमें हर साल 3% का इंक्रीमेंट जोड़ा जाता है। लेकिन NC-JCM का तर्क है कि आज की महंगाई- जो खाने-पीने से लेकर आवास तक सब कुछ प्रभावित कर रही है- में 3% अपर्याप्त है। इसलिए 6% इंक्रीमेंट की मांग उठी है, जो वेतन वृद्धि को दोगुना कर देगा। उदाहरणस्वरूप, 3.833 फिटमेंट फैक्टर लगने पर लेवल-1 की सैलरी 68,994 रुपये हो जाएगी, और पहला 6% इंक्रीमेंट मिलते ही यह 73,134 रुपये तक पहुंच जाएगी।
इसी तरह लेवल-4 (LDC/क्लर्क) के मौजूदा 25,500 रुपये 97,742 रुपये हो जाएंगे, जो 6% बढ़ोतरी के बाद 1,03,606 रुपये बनेंगे। लेवल-7 (इंस्पेक्टर/SO) पर 44,900 से 1,72,102 रुपये, फिर 1,82,428 रुपये; जबकि लेवल-10 (ग्रुप-A गजेटेड) के 56,100 रुपये 2,15,031 रुपये से बढ़कर 2,27,933 रुपये हो सकते हैं। ये आंकड़े कर्मचारी संगठनों के ड्राफ्ट कैलकुलेशन पर आधारित हैं, जो 7वें आयोग के 2.57 फिटमेंट से कहीं अधिक हैं।
भत्तों पर प्रभाव
बेसिक सैलरी में उछाल का असर भत्तों पर भी पड़ेगा। महंगाई भत्ता (DA), जो अभी 50% के करीब है, बेसिक पर ही निर्भर करता है, इसलिए नई सैलरी से DA में भारी इजाफा होगा। मकान किराया भत्ता (HRA) को 30% से 40% करने की मांग शहरों की बढ़ती लागत को ध्यान में रखकर की गई है, खासकर दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में जहां किराया आसमान छू रहा है। ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और अन्य भत्ते भी रिवाइज होंगे, जिससे कुल इन-हैंड सैलरी में 40-50% की वृद्धि संभव है। पेंशनभोगियों के लिए भी समानुपातिक लाभ होगा, जिसमें पेंशन नियमों को उदार बनाने की सिफारिश है।
अन्य प्रमुख सुझाव और समयसीमा
NC-JCM ने और भी साहसिक सुझाव दिए हैं। मौजूदा 18 पे-लेवल्स को घटाकर सिर्फ 7 बड़े पे-स्केल बनाने का प्रस्ताव है, ताकि प्रमोशन और सैलरी प्रगति आसान हो। AITUC जैसे संगठन 1 जनवरी 2026 से प्रभावी तिथि की मांग कर रहे हैं, क्योंकि 7वां आयोग 2016 में लागू हुआ था। नवंबर 2025 में टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी होने के बाद आयोग 18 महीनों में रिपोर्ट सौंप सकता है, लेकिन एरियर के साथ रेट्रोस्पेक्टिव लागू करने की अपील है। FNPO जैसे संगठनों ने वैकल्पिक 3.25 फिटमेंट और 5% इंक्रीमेंट सुझाए हैं, लेकिन NC-JCM की 3.83 मांग सबसे मुखर है।
भविष्य की संभावनाएं
फिलहाल ये मांगें प्रस्तावित हैं, सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया बाकी है। शिव गोपाल मिश्रा जैसे नेता ‘3.83 से कम स्वीकार्य नहीं’ Anechoic का रुख अपना चुके हैं। कर्मचारी यूनियंस की एकजुटता से लगता है कि बजट सत्र या अगली बैठक में बड़ा ऐलान हो सकता है। कुल मिलाकर, 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘मौज’ का दौर ला सकता है, बशर्ते मांगें मान ली जाएं।









