
उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे ज़्यादा मेडिकल कॉलेज वाले राज्यों में शामिल है। राज्य में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 81 है, जिसमें दो एम्स भी शामिल हैं। इनमें से एक ऐसा भी जिला है, जहां एक ही क्षेत्र में लगभग 7 मेडिकल कॉलेज चल रहे हैं और लोकल स्तर पर इसे “डॉक्टरों का गढ़” कहा जाता है। आम तौर पर लोग इस टाइटल के लिए लखनऊ, गोरखपुर या वाराणसी जैसे बड़े चिकित्सा हबों का नाम लेते हैं, लेकिन यहां बात उस जिले की है जो तादाद और घनत्व के मामले में यूपी में खासी मुकाम बना चुका है।
मेरठ क्यों ‘डॉक्टरों का गढ़’ कहलाता है?
मेरठ को “डॉक्टरों का गढ़” कहने का मुख्य कारण यही है कि यहां एक ही शहर और मंडल में राज्य‑संचालित, सरकारी‑संबद्ध और प्राइवेट मिलाकर लगभग 7 मेडिकल कॉलेजों का घनत्व देखने को मिलता है। इनमें MBBS, PG, MD/MS और रिसर्च‑ओरिएंटेड प्रोग्राम तक चलते हैं, जिनसे हर साल सैकड़ों नए डॉक्टर पैदा होते हैं। यही कारण है कि निजी न्यूज़ चैनल्स, सोशल मीडिया और लोकल मीडिया में मेरठ को “यूपी का वह इकलौता जिला” जहां 7 मेडिकल कॉलेज हैं, वाला टैग दिया जा रहा है।
मेरठ के प्रमुख मेडिकल संस्थानों का नेटवर्क
इन 7 कॉलेजों में से सबसे पुराना और जाना‑पहचाना नाम है लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (LLRM), मेरठ, जो उत्तर प्रदेश सरकार के तहत संचालित एक बड़ा टीचिंग अस्पताल वाला संस्थान है। LLRM के साथ जुड़ा विशाल राज्य‑स्वामित्व वाला अस्पताल आम जनता की चिकित्सा सेवाओं के साथ‑साथ छात्रों के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का मुख्य हब भी है। वहीं, प्राइवेट सेक्टर में सुभारती मेडिकल कॉलेज, मेरठ आगे रहता है, जो Swami Vivekanand Subharti University से संबद्ध है और MBBS, PG, नर्सिंग और अन्य हेल्थ‑साइंस कोर्स चलाता है।
मेरठ मंडल के नज़दीकी मेडिकल कॉलेजों की भूमिका
इसके अलावा, मेरठ के आसपास के इलाकों में स्थित NCR–मेरठ क्षेत्र के National Capital Region Institute of Medical Sciences (NCIMS) और Saraswati Institute of Medical Sciences, Hapur जैसे संस्थानों को भी “मेरठ मंडल के मेडिकल कॉलेज” की दर्शनी की सूची में शामिल किया जाता है। इन संस्थानों के मिलने से यहां की मेडिकल‑शिक्षा का नेटवर्क और विस्तारित हो जाता है, जिसकी वजह से लोकप्रिय विवरणों में यूपी का यह जिला “7 मेडिकल कॉलेज वाला डॉक्टरों का गढ़” कहलाने लगा है।
यह गिनती तकनीकी रूप से राज्य‑सरकारी रिकॉर्ड की औपचारिक सूची से थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन मीडिया और आम जनता के बीच यह नाम अब एक तरह का ब्रांड बन चुका है।
मेरठ की मेडिकल शिक्षा की संस्थागत रूपरेखा
मेरठ की मेडिकल कॉलेज घनत्व की इस विशेषता को देखते हुए राज्य के शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने भी यहां चिकित्सा शिक्षा और रिसर्च के विकास को प्राथमिकता दी है। ये सभी कॉलेज UP/अटल बिहारी वाजपेयी–मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ जैसे राज्य‑स्तरीय चिकित्सा विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं और NEET‑UG/NEET‑PG के ज़रिये स्टूडेंट्स का प्रवेश लेते हैं। हर साल यहां हज़ारों छात्र NEET स्कोर के आधार पर इन कॉलेजों में दाखिले के लिए आवेदन करते हैं, जिससे यह पूरा एकोसिस्टम और भी सक्रिय हो जाता है।
मेरठ और अन्य चिकित्सा हबों की तुलनात्मक पहचान
मेरठ के साथ‑साथ राज्य में अन्य शहरों जैसे लखनऊ, गोरखपुर और वाराणसी भी चिकित्सा शिक्षा के बड़े हब बन चुके हैं, लेकिन वहां की प्रसिद्धि ज्यादा तरह से बड़े संस्थानों (जैसे KGMU, SGPGI, AIIMS गोरखपुर) और उच्च रैंकिंग के आधार पर है। मेरठ की अलग पहचान इसलिए है कि यहां एक ही शहर/मंडल में विविध स्वामित्व (सरकारी, मिश्रित, प्राइवेट) के साथ मेडिकल कॉलेजों का ऊँचा घनत्व देखने को मिलता है, जिसने शहर को युवाओं के लिए एक आकर्षक “मेडिकल‑हब” बना दिया है।









