
उत्तर प्रदेश में पुरानी कारों और बाइकों की खरीद-बिक्री अब पहले जैसी आसान नहीं रहेगी। राज्य परिवहन विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से कार बाजारों, बाइक सेल और पुराने वाहनों के डीलरों के लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) से अधिकृत प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया है। यह कदम केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मोटर वाहन नियम 1989 में 26वें संशोधन के बाद उठाया गया है, जिसका उद्देश्य वाहन व्यापार में पारदर्शिता लाना और उपभोक्ताओं को कानूनी पेचीदगियों से बचाना है।
नई व्यवस्था का परिचय
पहले पुराने वाहनों की बिक्री एक अनियमित बाजार की तरह चलती थी। कार बाजारों में डीलर बिना किसी औपचारिक पंजीकरण के वाहन खरीद-बेच लेते थे, जिससे दुर्घटना या अपराध के मामलों में मूल मालिक पर ही मुकदमा दर्ज हो जाता। नई व्यवस्था के तहत अधिकृत डीलर आफ रजिस्टर्ड वीकल (एडीआरवी) की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) लखनऊ द्वारा विकसित ऑनलाइन पोर्टल पर पूरी प्रक्रिया चलेगी।
प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया
डीलरों को फॉर्म 16 भरकर आवेदन करना होगा, जिसमें व्यवसाय स्थापना का प्रमाण (जीएसटी रजिस्ट्रेशन, शॉप एक्ट लाइसेंस), पैन कार्ड, पता प्रमाण और पहचान पत्र संलग्न करने पड़ेंगे। प्रमाणपत्र फॉर्म 17 में जारी होगा और 5 वर्ष तक वैध रहेगा। डीलरों को प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, और यह प्रमाणपत्र नए वाहनों के डीलरों की नियमों और शर्तों के अनुसार ही मिलेगा।
वाहन सौंपने और बिक्री की प्रक्रिया
प्रक्रिया सरल लेकिन सख्त है। वाहन मालिक को अपना पुराना वाहन डीलर को सौंपते समय वाहन पोर्टल पर फॉर्म 29 सी के माध्यम से एआरटीओ को पूर्व सूचना देनी होगी। सूचना मिलते ही डीलर उस वाहन का ‘डीम्ड ऑनर’ (अस्थायी स्वामी) बन जाता है। बिक्री के बाद नए मालिक के नाम रजिस्ट्रेशन अपडेट करने और एआरटीओ को सूचना देना अनिवार्य है। यदि डीलर ऐसा नहीं करता, तो प्रमाणपत्र रद्द हो सकता है।
इसके अलावा, डीलरों को 20 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा करनी पड़ सकती है, जो 5 साल वैध रहेगी। वाहन केवल मेंटेनेंस या ट्रायल के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे, न कि व्यावसायिक परिवहन के लिए।
उपभोक्ताओं को होने वाले फायदे
यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित होगा। पहले कई बार बिना रिकॉर्ड के बिक्री से पुराने मालिक पर चालान या मुकदमे की मार पड़ती थी। अब पोर्टल पर अपलोड होते ही जिम्मेदारी डीलर पर आ जाएगी, जिससे उत्तरदायित्व स्पष्ट हो जाएगा। अपर परिवहन आयुक्त राजस्व डॉ. आरके विश्वकर्मा ने बताया कि 8 अप्रैल को एनआईसी ने नई तकनीक का प्रजेंटेशन दिया। जल्द ही全省 में यह सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। जीएसटी चोरी और काले बाजारी पर भी अंकुश लगेगा।
डीलर समुदाय की प्रतिक्रिया
डीलर समुदाय में हलचल है। लखनऊ के एक बड़े कार बाजार संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ऑनलाइन प्रक्रिया अच्छी है, लेकिन छोटे डीलरों के लिए बैंक गारंटी और शुल्क बोझिल साबित हो सकता है।” हालांकि, बड़े डीलर इसे पारदर्शिता का स्वागत मान रहे हैं। विंटेज वाहनों (50 साल से पुरानी कार-बाइक) के लिए अलग रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी बरकरार है।
विभाग की चेतावनी और भविष्य
परिवहन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना प्रमाणपत्र के व्यापार करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें लाइसेंस निलंबन और जुर्माना शामिल है। नए और पुराने वाहनों दोनों के डीलर प्रभावित होंगे। यह नियम न केवल यूपी बल्कि देशभर में धीरे-धीरे लागू हो रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि खरीदी से पहले डीलर का प्रमाणपत्र जांच लें। इस नई व्यवस्था से वाहन बाजार अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगा।









