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सरकार ने तय की इतनी न्यूनतम सैलरी! अगर कंपनी कम पैसे दे तो कहाँ और कैसे करें शिकायत? जानें अपने अधिकार

1 अप्रैल 2026 से केंद्र सरकार ने VDA बढ़ाकर न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की- अकुशल को ₹783/दिन, कुशल को ₹958 तक। लाखों श्रमिक लाभान्वित होंगे। कंपनियां कम दें तो SAMADHAN पोर्टल पर शिकायत करें, लीगल नोटिस भेजें या लेबर कमिश्नर से संपर्क लें। समय पर वेतन, ओवरटाइम दोगुना- ये आपके अधिकार।

By Pinki Negi

सरकार ने तय की इतनी न्यूनतम सैलरी! अगर कंपनी कम पैसे दे तो कहाँ और कैसे करें शिकायत? जानें अपने अधिकार

बढ़ती महंगाई के दौर में केंद्र सरकार ने श्रमिकों को बड़ी राहत दी है। 1 अप्रैल 2026 से औद्योगिक, कृषि, निर्माण, सफाई और सुरक्षा जैसे केंद्रीय क्षेत्रों (Central Sphere) में Variable Dearness Allowance (VDA) में संशोधन कर नई न्यूनतम मजदूरी दरें लागू कर दी गई हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के इस फैसले से करोड़ों असंगठित और संगठित क्षेत्र के मजदूरों को फायदा होगा, खासकर उन लोगों को जो दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं।

नई न्यूनतम मजदूरी दरें

नई दरें तय करते हुए सरकार ने न्यूनतम मजदूरी को कौशल के आधार पर वर्गीकृत किया है। अकुशल श्रमिकों (Unskilled) के लिए अब प्रतिदिन 783 रुपये (मासिक लगभग 20,358 रुपये, 26 कामकाजी दिनों के आधार पर) न्यूनतम वेतन अनिवार्य है। अर्ध-कुशल (Semi-Skilled) श्रमिकों को 868 रुपये प्रतिदिन (मासिक करीब 22,568 रुपये) मिलेगा।

कुशल या लिपिकीय (Skilled/Clerical) श्रमिकों के लिए यह राशि 954 से 958 रुपये प्रतिदिन (मासिक लगभग 24,804 रुपये) तय की गई है, जबकि उच्च कुशल (Highly Skilled) श्रमिकों को 1,035 रुपये प्रतिदिन (मासिक करीब 26,910 रुपये) का भुगतान होना चाहिए। ये दरें Code on Wages, 2019 के तहत अधिसूचित हैं और 30 मार्च 2026 को जारी आदेश से प्रभावी हुई हैं।

VDA संशोधन से आई बढ़ोतरी

यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से VDA में संशोधन से आई है, जो महंगाई के अनुसार हर छह माह में संशोधित होती है। मंत्रालय ने Minimum Wages Advisory Board की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए इन्हें अगले पूरे रुपये तक गोलाई दी है। निर्माण स्थलों, खदानों, लोडिंग-अनलोडिंग, घरेलू कामकाज और रेलवे जैसे केंद्रीय क्षेत्रों में कार्यरत लाखों श्रमिक अब इन दरों का हकदार हैं। हालांकि, राज्य सरकारें अपनी अलग दरें निर्धारित कर सकती हैं, जो केंद्रीय दरों से अधिक हो सकती हैं- जैसे दिल्ली या महाराष्ट्र में। लेकिन जहां केंद्रीय क्षेत्र लागू होता है, वहां नियोक्ता इनसे नीचे नहीं जा सकते।

कंपनियां अभी भी कम भुगतान कर रही

फिर भी, जमीनी हकीकत अक्सर कागजी घोषणाओं से मेल नहीं खाती। कई कंपनियां, ठेकेदार या छोटे प्रतिष्ठान अभी भी न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान कर रहे हैं, जिससे श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देना Minimum Wages Act, 1948 और Code on Wages का सीधा उल्लंघन है। ऐसे में श्रमिकों के पास मजबूत कानूनी हथियार हैं। सबसे पहले, कंपनी को लीगल नोटिस भेजें। किसी श्रम वकील के माध्यम से 15 दिनों के अंदर बकाया चुकाने की मांग करें। अक्सर नोटिस मिलते ही नियोक्ता मामला सुलझा लेते हैं।

शिकायत के आसान तरीके

अगर नोटिस का असर न हो, तो भारत सरकार के SAMADHAN पोर्टल (samadhan.labour.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। यह पोर्टल वेतन विवाद, बकाया भुगतान और अन्य श्रम मुद्दों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। शिकायत के साथ नियुक्ति पत्र, सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और अटेंडेंस रिकॉर्ड संलग्न करें।

पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित क्षेत्रीय श्रम कार्यालय (RLC) जांच शुरू कर देता है। वैकल्पिक रूप से, नजदीकी लेबर कमिश्नर कार्यालय में लिखित शिकायत दें या लेबर हेल्पलाइन 155214 पर कॉल करें। जांच में सबूत साफ मिलने पर अधिकारी कंपनी को नोटिस जारी करते हैं और बकाया वेतन के साथ हर्जाना दिलवा सकते हैं।

श्रमिकों के अन्य प्रमुख अधिकार

श्रमिकों के अन्य प्रमुख अधिकारों में समय पर वेतन भुगतान शामिल है- वेतन अवधि समाप्त होने के 7 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य। ओवरटाइम पर दोगुनी दर से पारिश्रमिक और कार्यस्थल पर न्यूनतम मजदूरी दरों का सूचना बोर्ड लगाना भी नियोक्ता का कर्तव्य है। उल्लंघन पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामूहिक शिकायतें ज्यादा प्रभावी साबित होती हैं, क्योंकि यूनियन या समूह बनाकर आवाज बुलंद करने से नियोक्ता दबाव में आते हैं।

निष्कर्ष: क्रियान्वयन की चुनौती बनी रहेगी

यह बदलाव श्रम सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहेगा। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों तक जानकारी पहुंचाना और शिकायत प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है। अगर आप दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य राज्य की दरें जानना चाहें, तो संबंधित श्रम विभाग की वेबसाइट चेक करें। सरकार का आह्वान है- अपने अधिकार जानें और हक लें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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