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Gratuity Rules 2026: क्या सिर्फ 11 महीने की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी? FTE कर्मचारियों के लिए नियम में हुआ बड़ा बदलाव, यहाँ समझें

नए लेबर कोड 2026 में फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (FTE) को 5 साल के बजाय सिर्फ 1 साल की सेवा पर ग्रेच्युटी का हक मिला। लेकिन 11 महीने काम करने पर? साफ नियम- नहीं। 12 महीने पूरे न हों तो प्रो-राटा लाभ शून्य। नोटिस पीरियड कुछ केस में मदद कर सकता है, पर ज्वाइनिंग-लास्ट डे ही गिनता है। बीच में जॉब छोड़ना नुकसानदेह। कॉन्ट्रैक्ट चेक करें, 1 साल रुकें।

By Pinki Negi

Gratuity Rules 2026: क्या सिर्फ 11 महीने की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी? FTE कर्मचारियों के लिए नियम में हुआ बड़ा बदलाव, यहाँ समझें

आजकल नौकरी का बाजार तेजी से बदल रहा है। ज्यादातर कंपनियां फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट (FTE) पर भर्ती कर रही हैं, जहां 6 महीने, 11 महीने या मुश्किल से 1 साल का काम मिलता है। लेकिन जब ग्रेच्युटी की बात आती है, तो कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही घूमता है- क्या सिर्फ 11 महीने काम करने पर वह पुरस्कार राशि मिलेगी? नए लेबर कोड 2026 के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन 1 साल की शर्त अभी भी कायम है। अगर बीच में नौकरी छोड़ दी, तो क्या होगा? आइए, इसकी गहराई से पड़ताल करते हैं।

पुराने vs नए नियम: क्या बदला?

पहले पुराने नियम को समझें। पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत हर कर्मचारी को कम से कम 5 साल की लगातार सेवा पूरी करनी पड़ती थी। मृत्यु या विकलांगता छोड़कर कोई छूट नहीं थी। लेकिन 21 नवंबर 2025 से लागू नए लेबर कोड (सोशल सिक्योरिटी कोड) ने फिक्स्ड-टर्म, कॉन्ट्रैक्ट और गिग वर्कर्स के लिए खेल बदल दिया। अब इनकी न्यूनतम पात्रता घटाकर सिर्फ 1 साल (12 महीने) कर दी गई है।

इसका मतलब, अगर आपका कॉन्ट्रैक्ट 1 साल या उससे ज्यादा का है और आपने उसे पूरा किया, तो प्रो-राटा आधार पर ग्रेच्युटी आपका हक बन जाती है। उदाहरण के तलिए, 1 साल 6 महीने की सेवा पर आपको पूरे 18 महीनों का लाभ मिलेगा।

11 महीने की नौकरी: ग्रेच्युटी का सपना टूटेगा?

लेकिन 11 महीने की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलेगी या नहीं? सीधा जवाब है- नहीं। नए नियम साफ कहते हैं कि कम से कम 12 महीने की निरंतर सेवा जरूरी है। भले ही आपने 11 महीने 29 दिन काम किया हो, वह पूरा 1 साल नहीं माना जाएगा। कुछ रिपोर्ट्स में नोटिस पीरियड का जिक्र है। अगर 11 महीने के बाद 30 दिन का नोटिस सर्व किया और कंपनी ने उसे सर्विस टेन्योर में दर्ज किया, तो प्रैक्टिस में कई जगह इसे 1 साल गिना जा सकता है।

लेकिन कानूनी रूप से ज्वाइनिंग से लास्ट वर्किंग डे तक का समय ही गिनता है। नोटिस पीरियड तभी काउंट होता है, जब वह आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल हो। तो 11 महीने वाले ज्यादातर केस में हाथ खाली रहने की संभावना ज्यादा है।

FTE के लिए नया फायदा

फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए यह बदलाव वरदान है। पहले 5 साल का इंतजार इन छोटे कॉन्ट्रैक्ट वालों के लिए नामुमकिन था। अब 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह लागू इस व्यवस्था से कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स करने वाले लाखों युवाओं को राहत मिलेगी। सरकार का मकसद साफ था- कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी स्थायी कर्मचारियों जैसी सुरक्षा दें, लेकिन बिना जिम्मेदारी के नहीं। इसलिए 1 साल की मिनिमम शर्त रखी गई, ताकि कंपनियां छोटे-मोटे काम के लिए ग्रेच्युटी का बोझ न झेलें।

परमानेंट कर्मचारियों के लिए पुराना 5 साल वाला नियम बरकरार है, हालांकि आखिरी साल में 6 महीने से ज्यादा काम करने पर उसे पूरा साल गिना जा सकता है।

नौकरी बीच में छोड़ी तो क्या होगा?

अब अगर कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से पहले नौकरी छोड़ दी? दो केस बनते हैं। पहला, अगर 1 साल पूरा हो चुका है और फिर इस्तीफा दिया, तो ग्रेच्युटी मिलेगी। दूसरा, 1 साल से पहले छोड़ा, तो कुछ नहीं। मसलन, 11 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर भी ग्रेच्युटी शून्य। लेकिन अगर कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू हो गया और कुल सेवा 1 साल पार कर गई, तो लाभ मिलेगा। विशेष मामलों में जैसे मृत्यु या विकलांगता, कोई समय सीमा नहीं- पूरी ग्रेच्युटी तुरंत। गणना का फॉर्मूला भी बदला है। अब बेसिक + डीए पर औसत अंतिम 10 महीने की सैलरी को 15 से भाग देकर हर साल के लिए राशि निकालें, जो टैक्स-फ्री है।

FTE कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक सलाह

FTE कर्मचारियों के लिए मायने साफ हैं। कॉन्ट्रैक्ट ड्यूरेशन चेक करें, ज्वाइनिंग डेट नोट करें और 1 साल पूरा होने तक रुकें। जल्दबाजी में जॉब छोड़ना नुकसानदेह होगा। कंपनियों में जागरूकता बढ़ेगी, लोग अब 1 साल टिकने पर जोर देंगे। विशेषज्ञ कहते हैं, यह बदलाव लेबर मार्केट को और लचीला बनाएगा, लेकिन कर्मचारियों को सतर्क रहना होगा। अगर आप FTE हैं, तो HR से पॉलिसी कन्फर्म करें। नए दौर में ग्रेच्युटी अब सिर्फ पुरानी नौकरियों का इनाम नहीं, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स का हक बन गई है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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