
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Ujjivan SFB) को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से करारा झटका लगा है। बैंक लंबे समय से यूनिवर्सल बैंक बनने की महत्वाकांक्षा पाल रहा था, लेकिन RBI ने फरवरी 2025 में दिए गए आवेदन को वापस लौटा दिया। कारण? बैंक का लोन पोर्टफोलियो अभी पर्याप्त रूप से विविध नहीं है। RBI ने साफ शब्दों में कहा कि माइक्रोफाइनेंस जैसे असुरक्षित कर्जों पर अत्यधिक निर्भरता को कम कर सिक्योर्ड लोन (हाउसिंग, वाहन, MSME) बढ़ाने की जरूरत है।
बैंक की वित्तीय स्थिति
यह खबर 13 अप्रैल को सामने आई, जब उज्जीवन ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी। बैंक ने स्वीकार किया कि वह RBI के निर्देशों का पालन करेगा और डायवर्सिफिकेशन पूरा करने के बाद दोबारा आवेदन करेगा। दिसंबर 2025 (Q3 FY26) तक बैंक का कुल लोन बुक 37,057 करोड़ रुपये का था, जिसमें ग्रुप लोन (माइक्रोफाइनेंस से जुड़े) का हिस्सा करीब 45-52 प्रतिशत रहा।
हालांकि, सिक्योर्ड लोन का शेयर 48 प्रतिशत तक पहुंचा है, जो पिछले साल 39 प्रतिशत था- फिर भी RBI को पर्याप्त नहीं लगा। डिपॉजिट भी 22.4 प्रतिशत बढ़कर 42,223 करोड़ पर पहुंचे, लेकिन पोर्टफोलियो की गुणवत्ता पर सवाल बने रहे।
RBI की गाइडलाइंस और अन्य मामलों की तुलना
RBI की सख्ती का कारण साफ है। स्मॉल फाइनेंस बैंक आर्थिक उतार-चढ़ाव में असुरक्षित लोन से NPA का खतरा झेलते हैं। RBI अप्रैल 2024 में जारी गाइडलाइंस में स्पष्ट कर चुका कि यूनिवर्सल बैंक बनने के लिए 5 साल का ट्रैक रिकॉर्ड, 1,000 करोड़ नेट वर्थ, लगातार मुनाफा, कम NPA और विविध लोन बुक जरूरी है। उज्जीवन ने Q3 में 71 प्रतिशत लाभ वृद्धि के साथ 186 करोड़ का प्रॉफिट दिखाया, लेकिन RBI ने रिस्क प्रोफाइल पर फोकस किया।
यह दूसरा ऐसा मामला है। जनवरी 2025 में जना SFB का आवेदन भी लौटा दिया गया था, जबकि AU SFB को अगस्त 2025 में सैद्धांतिक मंजूरी मिली। Fino Payments Bank को SFB बनने की मंजूरी तो मिली, लेकिन यूनिवर्सल का सफर अभी बाकी है।
यूनिवर्सल बैंक के फायदे और ग्राहक प्रभाव
यूनिवर्सल बैंक बनने से उज्जीवन को कॉर्पोरेट बैंकिंग, बड़े लोन और विस्तृत सेवाएं देने का मौका मिलता, जिससे कारोबार कई गुना बढ़ सकता। लेकिन फिलहाल बैंक छोटे ग्राहकों पर फोकस रखेगा। ग्राहकों पर कोई असर नहीं- सेवाएं सामान्य चलेंगी।
शेयर बाजार पर असर और भविष्य की संभावनाएं
शेयर बाजार ने झटका महसूस किया। RBI खबर के बाद शेयर NSE पर 0.33 प्रतिशत गिरकर 60.10 रुपये और BSE पर 60.34 रुपये पर बंद हुआ। निवेशक अब डायवर्सिफिकेशन की गति पर नजर रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बैंक 1-2 साल में लक्ष्य हासिल कर ले, तो शेयर में उछाल आ सकता है। उज्जीवन की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ मजबूत है, लेकिन RBI की सतर्कता ने सबक सिखाया है- वृद्धि के साथ स्थिरता जरूरी।









