
नोएडा में श्रमिकों के सैलरी इक्रीमेंट को लेकर चल रहे विरोध‑प्रदर्शन के बीच प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भर्ती से जुड़ी जानकारियां देने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जीनियस एचआरटेक ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि 2026‑27 के दौरान छोटी और मझोली कंपनियां जमकर भर्तियां करेंगी, साथ ही कर्मचारियों की सैलरी में भी औसतन 5 से 10 प्रतिशत तक की वेतन वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। यह आंकड़े नोएडा जैसे एनसीआर शहरों के प्राइवेट नौकरीघरों में काम करने वाले युवा और मध्यम‑स्तर के कर्मचारियों के लिए एक सकारात्मक इशारा हैं।
छोटी‑मझोली कंपनियां जमकर रोजगार देंगी
रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में भारत में लगभग 50 फीसदी से ज्यादा छोटी‑मझोली कंपनियां नई भर्तियां करने के लिए तैयार हैं। विशेष तौर पर मध्यम स्तर (मिड‑लेवल) के पेशेवरों की डिमांड सबसे ज्यादा बताई गई है, जहां लगभग 49 फीसदी संगठनों ने साफ‑साफ कहा है कि उनकी भर्ती की प्राथमिकता इन्हीं पदों पर केंद्रित रहेगी। देशभर में कंपनियों का यह रुख यह इंगित करता है कि नौकरी खोने के डर के बाद अब टैलेंट रिटेंशन और नए टैलेंट के आकर्षण को लेकर हर कंपनी ज्यादा गंभीर है।
वेतन बढ़ेगा, खासकर मध्यम‑वरिष्ठ लेवल को फायदा
वेतन बढ़ोतरी के मोर्चे पर भी रुझान सकारात्मक बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 46 फीसदी कंपनियां 5 से 10 फीसदी तक सैलरी इक्रीमेंट देने की तैयारी में हैं, जबकि 34 फीसदी ने 10 फीसदी से भी ज्यादा वृद्धि का विकल्प खुला छोड़ा है। यह खास तौर पर उन शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां नोएडा और गाजियाबाद जैसे औद्योगिक‑आईटी हब में पहले ही न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम बढ़ोतरी के बाद मजदूरों के इक्विटी और फेयर वेज की चर्चा तेज हो चुकी है। इसलिए कई नोएडा‑आधारित प्राइवेट इकाइयों को अपने वेतन ढांचे में समायोजन करना पड़ सकता है, ताकि वे बाजार की औसत दरों से पीछे न रहें।
मध्यम‑वरिष्ठ लेवल सबसे ज्यादा उद्देश्यित
रिपोर्ट के अनुसार, वेतन बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा लाभ मध्यम‑वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों (48 फीसदी) को मिलने की संभावना है, जबकि कनिष्ठ और वरिष्ठ स्तर के लिए यह अनुपात क्रमश: 26 और 22 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया गया है। यह दिशा इस बात को भी दर्शाती है कि नौकरी छोड़ने की दर में तेजी के चलते कंपनियों की नजर उन उस्ताद हाथों पर लगी है, जो बिना ज्यादा प्रशिक्षण के तुरंत टीम लीड या प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि लगभग 67 फीसदी कंपनियों ने मध्यम‑वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिहाज से सबसे संवेदनशील वर्ग बताया है, जो इन लोगों की वेतन बढ़ोतरी और करियर ऑफर्स लेकर रिटेंशन बढ़ाने पर जोर देता है।
नौकरी छोड़ने की दर और युवाओं की नई अपेक्षाएं
दिलचस्प बात यह है कि नौकरी छोड़ने की दर में तेजी का असर सिर्फ वेतन तक ही सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 55 फीसदी संगठनों को 10‑20 फीसदी कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की आशंका है, जबकि 15 फीसदी कंपनियों ने 20 फीसदी से भी ज्यादा चाल लगने की आशंका जताई है।
इस चिंता के बीच यह जानकारी रोचक है कि 43 फीसदी संगठनों का भरोसा है कि नौकरी छोड़ने के पीछे नौकरी की सुरक्षा का रोल अपेक्षाकृत सीमित है, बल्कि बेहतर वेतन और तेज करियर लिफ्ट जैसे कारक ज्यादा ताकतवर हैं। खासकर युवा कर्मचारियों में काम का लचीलापन, काम का उद्देश्य और तेज करियर ग्रोथ वही मुख्य कारक हैं जो नौकरी बदलने के फैसले में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
नोएडा के विरोध और भर्ती‑वेतन ट्रेंड में जुड़ाव
इस दृष्टिकोण के बीच नोएडा जैसे शहरों में जारी श्रमिक और प्राइवेट कर्मचारी विरोध और भर्ती‑वेतन ट्रेंड एक दूसरे से जुड़े हुए नजर आते हैं। एक तरफ न्यूनतम मजदूरी और फैक्ट्री वर्कर्स के विरोध ने सरकार और नियोक्ताओं को वेतन स्तर पर सोचने पर मजबूर किया है, तो दूसरी ओर भारतीय कॉरपोरेट जगत में युवा और मध्यम‑वरिष्ठ पेशेवरों की उच्च अपेक्षाओं के कारण कंपनियों को नौकरी की तरफ नए‑नए इंसेंटिव और बेहतर भर्ती योजनाएं लानी पड़ रही हैं।
इस दौड़ में नोएडा के प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को यह उम्मीद रखने का अवसर मिलता है कि 2026 के बाद के दो‑तीन साल उनके लिए नौकरी और वेतन दोनों के मोर्चे पर बेहतर रह सकते हैं, बशर्ते वे स्किल अपग्रेड और नए टेक्नोलॉजी‑फोकस्ड रोल्स के लिए खुद को तैयार रखें।









