
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला दिया है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, मुद्राओं में उथल-पुथल मची है और शेयर बाजारों में 5-10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में छोटे निवेशकों के मन में सवाल उठना लाजमी है- क्या निवेश रोक दें या जारी रखें? खासकर ₹50 हजार से ₹2 लाख जैसी सीमित राशि के साथ सुरक्षित रास्ता क्या है? वित्तीय विशेषज्ञों का एकमत मत है कि घबराहट में फैसला न लें, बल्कि अनुशासन और लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं।
वैश्विक संकट का बाजार पर असर
मौजूदा संकट में इक्विटी से दूरी बनाना समझदारी है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा रही हैं। हाल ही में SIP बंद करने के मामले बढ़े हैं, लेकिन कई सतर्क निवेशक गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं। एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि एकमुश्त निवेश से बचें। इसके बजाय 4-6 महीनों में धीरे-धीरे पैसा लगाएं, ताकि बाजार की अस्थिरता का जोखिम कम हो।
उदाहरणस्वरूप, अगर आप ₹50 हजार निवेश करना चाहते हैं, तो बैंक FD या NSC में आधा-आधा बांट दें। FD 6-8 फीसदी ब्याज देती है, जबकि NSC 7.7 फीसदी के साथ टैक्स लाभ भी प्रदान करती है। न्यूनतम ₹1,000 से शुरू होने वाली यह डाकघर योजना 5 साल के लॉक-इन के साथ पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
छोटी राशि के लिए सुरक्षित विकल्प
₹1 लाख या ₹2 लाख जैसी राशि के लिए पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (MIS) आदर्श है, जो 7.4 फीसदी ब्याज पर मासिक पेआउट देती है। अधिकतम ₹9 लाख तक निवेश संभव है, जो रिटायर्ड या मासिक आय चाहने वालों के लिए बेस्ट है। वरिष्ठ नागरिक सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) चुन सकते हैं, जहां 8.2 फीसदी ब्याज मिलता है। RBI फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स भी सुरक्षित हैं, जो 8.05 फीसदी फ्लोटिंग रिटर्न के साथ कोई लॉक-इन नहीं रखते। ये सभी विकल्प सरकारी गारंटी वाले हैं, जो युद्ध जैसे संकट में पूंजी की रक्षा करते हैं।
पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन जरूरी
हालांकि, सिर्फ फिक्स्ड इनकम ही काफी नहीं। पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करें- सोना, मल्टी-एसेट फंड या कैश में कुछ हिस्सा रखें। लंबी अवधि में SIP का जादू देखने को मिलता है। मान लीजिए, कोई 15 साल तक ₹20 हजार SIP में लगाता है और 13 फीसदी रिटर्न पाता है, तो कोष ₹1 करोड़ से अधिक हो जाता है। लेकिन अभी इक्विटी म्यूचुअल फंड या ETF तभी चुनें, जब आप बाजार समझते हों और समय दे सकें। कम जोखिम वालों के लिए ये बेहतर हैं, पर निगरानी जरूरी।
एक्सपर्ट्स की अंतिम सलाह
विशेषज्ञ जोर देते हैं कि बाजार की अस्थिरता स्थायी नहीं। भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों के बावजूद मजबूत है। SIP जारी रखें, धीरे-धीरे निवेश करें और SEBI-पंजीकृत सलाहकार से परामर्श लें। घबराहट में पैसा निकालना नुकसानदेह है। समझदारी से निवेश लंबे समय में धन सृजन का सबसे सुरक्षित रास्ता है।









