
आज के डिजिटल दौर में क्रेडिट कार्ड सिर्फ खरीदारी का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह आपकी फाइनेंशियल क्रेडिबिलिटी का आईना बन चुका है। लाखों भारतीयों के पास क्रेडिट कार्ड तो है, लेकिन वे इसे कर्ज के डर से इस्तेमाल ही नहीं करते। सोचते हैं कि इससे बचेंगे तो सुरक्षित रहेंगे। लेकिन सच्चाई चौंकाने वाली है – लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न करने से आपका सिबिल स्कोर खुद-ब-खुद गिरने लगता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है और लोन अप्रूवल से लेकर नए कार्ड जारी करने तक हर कदम पर फैसला करता है। अगर स्कोर 750 से नीचे चला गया, तो होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन लेना सपना बन जाता है।
क्यों बन जाता है खतरा?
दरअसल, सिबिल जैसी क्रेडिट ब्यूरो आपकी क्रेडिट एक्टिविटी को ट्रैक करती हैं। अगर आपका कार्ड 6-12 महीने तक निष्क्रिय पड़ा रहा, तो बैंक इसे ‘डोरमेंट’ मानकर बंद कर देते हैं। इससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई छोटी हो जाती है, जो सिबिल स्कोर के 15-20 फीसदी वेटेज को सीधे प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 5 साल पुराना कार्ड है और वह बंद हो गया, तो आपकी औसत क्रेडिट उम्र घट जाती है। नतीजा? स्कोर में 10-20 अंकों की तत्काल गिरावट। एक सर्वे के अनुसार, भारत में 40 फीसदी क्रेडिट कार्ड यूजर्स ही रेगुलर इस्तेमाल करते हैं, बाकी निष्क्रियता की भेंट चढ़ जाते हैं।
दूसरा बड़ा खतरा CUR
मान लीजिए आपके पास दो कार्ड हैं- एक लाख और दो लाख की लिमिट। कुल उपलब्ध क्रेडिट तीन लाख। अगर एक कार्ड बंद हो गया, तो लिमिट घटकर दो लाख रह जाती है। अब अगर आप उसी 80 हजार खर्च करते हैं, तो CUR 40 फीसदी हो जाता है, जो आदर्श 30 फीसदी से ज्यादा है। सिबिल इस CUR को स्कोर का 30 फीसदी हिस्सा मानता है। ज्यादा CUR का मतलब है बैंक के लिए ‘रिस्की’ कस्टमर। भविष्य में लोन रिजेक्ट होने या ऊंची ब्याज दरों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, निष्क्रिय कार्ड से CUR बढ़ना आम समस्या है, जो महीनों तक स्कोर को दबाए रखता है।
सिबिल स्कोर कैसे तय होता है
इसे समझना जरूरी है। सबसे बड़ा फैक्टर (35 फीसदी) है पेमेंट हिस्ट्री। हर बिल समय पर चुकाएं, वरना नेगेटिव एंट्री पड़ जाती है, जो 7 साल तक रहती है। CUR 30 फीसदी, क्रेडिट हिस्ट्री लंबाई 15 फीसदी, क्रेडिट मिक्स (कार्ड+लोन) 10 फीसदी और नए क्रेडिट इंक्वायरी 10 फीसदी। अगर कार्ड निष्क्रिय है, तो मिक्स भी कमजोर पड़ता है। NORTH INDIA के बैंकिंग एक्सपर्ट्स बताते हैं कि उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में छोटे व्यापारी और सैलरीड लोग अक्सर इस जाल में फंसते हैं, क्योंकि वे कार्ड को ‘इमरजेंसी’ के लिए रखते हैं लेकिन भूल जाते हैं।
बचाव का रास्ता क्या?
रोजाना इस्तेमाल जरूरी नहीं, लेकिन हर 2-3 महीने में छोटे ट्रांजेक्शन करें- जैसे ग्रॉसरी, ईंधन या मोबाइल रिचार्ज। बिल फुल पेमेंट से सेटल करें, MIMIMUM ड्यू अवॉइड करें। CUR 30 फीसदी से नीचे रखें। अगर कार्ड बंद होने का डर हो, तो बैंक से बात कर रीएक्टिवेट करवाएं। कई कार्ड न रखें, लेकिन पुराने को एक्टिव रखें। HDFC, SBI जैसे बैंक छोटे खर्च पर रिवॉर्ड्स भी देते हैं, जो स्कोर सुधारने में मददगार। याद रखें, अच्छा स्कोर (750+) न सिर्फ सस्ता लोन दिलाता है, बल्कि फाइनेंशियल फ्रीडम भी।
अगर आप भी कार्ड को धूल खाने दे रहे हैं, तो आज से बदलाव लाएं। फाइनेंशियल हेल्थ उतनी ही जरूरी है जितनी फिजिकल। अनजाने में स्कोर बर्बाद न करें!









