
केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर एक नई उम्मीद जगी है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS), जो नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) के स्टाफ साइड का प्रमुख सदस्य है, ने हाल ही में बुधवार को आयोग को अपना विस्तृत 51-पेज का ज्ञापन सौंप दिया।
इस ज्ञापन में न्यूनतम बेसिक सैलरी को वर्तमान ₹18,000 से सीधे ₹72,000 करने, अधिकतम सैलरी को ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख प्रति माह करने और फिटमेंट फैक्टर को 4.0 करने की क्रांतिकारी मांग की गई है। BPMS के कार्यकारी अध्यक्ष मुकेश सिंह ने बताया कि ये मांगें कर्मचारियों के घटते जीवन स्तर को सुधारने और बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए जरूरी हैं।
₹72,000 न्यूनतम सैलरी की गणना
वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत एंट्री लेवल (लेवल-1) कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹18,000 है, जबकि अधिकतम लेवल-18 में यह ₹2.5 लाख तक जाती है। BPMS की ₹72,000 की मांग चार गुना बढ़ोतरी के बराबर है, जो प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों पर आधारित है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति आय 2016-17 के ₹1,03,219 से बढ़कर 2024-25 में ₹1,92,774 हो गई, यानी 86.76% की वृद्धि।
इस आधार पर BPMS ने गणना की: न्यूनतम सैलरी ₹18,000 + 58% महंगाई भत्ता (DA) ₹10,440 = कुल ₹28,440। 86.76% बढ़ोतरी जोड़ने पर ₹53,114, और 3 फैमिली यूनिट के बजाय 5 यूनिट पर गिनती तो यह ₹88,524 तक पहुंच जाती। लेकिन सरकारी बजट, राजस्व घाटा, पेंशन भार, राज्य सरकारों के ढांचे और रक्षा व इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को ध्यान में रखते हुए संगठन ने व्यावहारिक आंकड़ा ₹72,000 प्रस्तावित किया।
फिटमेंट फैक्टर और अन्य मांगें
फिटमेंट फैक्टर 4.0 की मांग भी महत्वपूर्ण है, जिसमें 1.58 हिस्सा DA समायोजन का है और बाकी वास्तविक वेतन वृद्धि का। BPMS ने सालाना इंक्रीमेंट को 3% से दोगुना कर 6% करने तथा फैमिली यूनिट को 3 से 5 करने की सिफारिश की, ताकि कर्मचारियों का वास्तविक जीवन स्तर ऊंचा हो सके। संगठन ने नया पे स्ट्रक्चर भी सुझाया है।
उदाहरणस्वरूप, लेवल-1 में ₹72,000, लेवल 2-3 को मर्ज कर ₹86,800, लेवल 4-5 को ₹1,16,800, लेवल-6 ₹1,41,600, लेवल-7 ₹1,79,600, लेवल-8 ₹1,90,400, लेवल 9-10 ₹2,24,400, लेवल-11 ₹2,70,800, लेवल-12 ₹3,15,200, लेवल-13 ₹4,74,000, लेवल-13A ₹5,24,400, लेवल-14 ₹5,76,800, लेवल-15 ₹7,28,800, लेवल-16 ₹8,21,600, लेवल-17 ₹9,00,000 और लेवल-18 ₹10,00,000। इससे निचले स्तर के कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जबकि उच्च अधिकारियों की सैलरी भी संतुलित रहेगी।
आयोग की स्थिति और भविष्य
यह मांगें नवंबर 2025 में गठित 8वें वेतन आयोग के परामर्श चरण का हिस्सा हैं, जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है। पहले NC-JCM ने ₹69,000 और 3.833 फिटमेंट फैक्टर की बात कही थी, लेकिन BPMS ने इसे और आक्रामक बनाया। सरकार ने अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, पर कर्मचारी यूनियनें उम्मीद कर रही हैं कि जुलाई 2026 तक सिफारिशें आ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये मांगें महत्वाकांक्षी हैं, क्योंकि वित्तीय घाटा और आर्थिक चुनौतियां सरकार के लिए बाधा बन सकती हैं। फिर भी, DA हाइक, पेंशनर्स को arrears और भत्तों में संशोधन संभव है।
कर्मचारियों पर संभावित प्रभाव
BPMS का यह कदम करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों के हितों को मजबूत करता है। मुकेश सिंह ने कहा, “हमारी मांगें आर्थिक वास्तविकताओं पर आधारित हैं, जो कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन देंगी।” यदि लागू हुईं, तो यह ऐतिहासिक वेतन सुधार होगा, जो न केवल वेतन बढ़ाएगा बल्कि उपभोग, अर्थव्यवस्था और सामाजिक कल्याण को गति देगा। लेकिन अंतिम फैसला आयोग और वित्त मंत्रालय पर निर्भर करेगा। कर्मचारी संगठन आशावादी हैं, जबकि बजट 2026-27 इसकी दिशा तय करेगा।





