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Animal Care: पशुपालकों की मौज! अब गांवों में पशुओं का इलाज होगा आसान; सरकार 20,000 नए पशु चिकित्सकों और पैरा-वेट्स की करेगी भर्ती।

पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी! गांवों में अब डॉक्टरों की कमी होगी दूर। बजट 2026 में सरकार ने 20,000 नए पशु चिकित्सकों की भर्ती का एलान कर दिया है। जानें कैसे इस फैसले से बदलेगी आपके पशुओं की सेहत और पशुपालन बनेगा मुनाफे का सौदा।

By Pinki Negi

Animal Care: पशुपालकों की मौज! अब गांवों में पशुओं का इलाज होगा आसान; सरकार 20,000 नए पशु चिकित्सकों और पैरा-वेट्स की करेगी भर्ती।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 20,000 से ज्यादा नए पशु-चिकित्सा पेशेवरों की भर्ती का एलान किया है। सरकार के इस बड़े कदम से ग्रामीण इलाकों में पशुओं के इलाज की समस्या खत्म होगी और पशुपालकों को समय पर डॉक्टरी सहायता मिल सकेगी। विशेषज्ञों की संख्या बढ़ने से न केवल पशुओं की बीमारियों पर लगाम लगेगी, बल्कि डेयरी और पशुपालन से जुड़े किसानों की आय में भी सुधार होगा। यह फैसला पशुपालन सेक्टर को आधुनिक और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

पशुपालन के लिए बजट में ‘महा-प्लान’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि खेती-किसानी की कमाई में पशुधन का हिस्सा करीब 16% है, जिससे करोड़ों गरीब परिवार जुड़े हैं। इसे और मजबूत करने के लिए सरकार ने न केवल 20,000 नए डॉक्टर जोड़ने का फैसला किया है, बल्कि प्राइवेट सेक्टर को भी इस मुहिम से जोड़ा है। अब प्राइवेट पशु अस्पताल, लैब और ब्रीडिंग सेंटर खोलने के लिए सरकार लोन-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी देगी। साथ ही, पशु चिकित्सा की तकनीक को बेहतर बनाने के लिए भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच हाथ मिलाया जाएगा, ताकि हमारे पशुपालकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं गांव में ही मिल सकें।

सहकारी संस्थाओं को टैक्स में बड़ी छूट

वित्त मंत्री ने सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए टैक्स कटौती (Deduction) का दायरा बढ़ा दिया है। अब तक यह छूट केवल दूध, फल और सब्जी की सप्लाई करने वाली संस्थाओं को मिलती थी, लेकिन अब पशुचारे और बिनौले की सप्लाई करने वाली सहकारी समितियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, राष्ट्रीय सहकारी संघों को एक और बड़ी राहत देते हुए प्रस्ताव दिया गया है कि 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में किए गए उनके निवेश पर मिलने वाले डिविडेंड (लाभांश) पर अगले 3 साल तक कोई टैक्स नहीं लगेगा। इस कदम से सहकारी क्षेत्र के पास ज्यादा पैसा बचेगा, जिसका सीधा फायदा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा।

काजू, कोको और ड्राई फ्रूट्स के लिए सरकार का मेगा प्लान

  • ग्लोबल ब्रांडिंग: भारतीय काजू और कोको को 2030 तक दुनिया का प्रीमियम ब्रांड बनाया जाएगा। इसके लिए एक खास ‘डेडिकेटेड प्रोग्राम’ शुरू होगा।
  • नारियल संवर्धन योजना: नारियल की पैदावार बढ़ाने और इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉम्पिटिटिव बनाने के लिए नई योजना का प्रस्ताव दिया गया है।
  • तटीय क्षेत्रों को मदद: समुद्र के किनारे वाले इलाकों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसे महंगे पेड़ों की खेती के लिए सरकार सीधी आर्थिक सहायता देगी।
  • पहाड़ों पर मेवों की खेती: पहाड़ी और बर्फीले क्षेत्रों में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों (Dry Fruits) के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • पूर्वोत्तर का विकास: नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में कीमती ‘अगर’ के पेड़ों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसकी लकड़ी और तेल की वैश्विक बाजार में भारी मांग है।

नारियल किसानों के लिए ‘प्रोत्साहन योजना’ का एलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में नारियल, काजू और कोको किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। भारत के नारियल उत्पादन में दुनिया में नंबर वन होने के नाते, सरकार ने ‘नारियल प्रोत्साहन योजना’ का प्रस्ताव दिया है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े 3 करोड़ लोगों और 1 करोड़ किसानों को सीधा फायदा होगा।

इस योजना के तहत प्रमुख राज्यों में पुराने और कम पैदावार देने वाले पेड़ों को हटाकर उनकी जगह नई और उन्नत किस्मों के पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा, तटीय क्षेत्रों में चंदन, कोको और काजू जैसी कीमती फसलों के साथ-साथ पहाड़ी इलाकों में बादाम, अखरोट और चीड़ के मेवों की खेती को भी विशेष सरकारी समर्थन दिया जाएगा, ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।

भारतीय काजू और कोको बनेंगे ‘ग्लोबल ब्रांड’

केंद्र सरकार ने किसानों की आय को दोगुना करने के संकल्प के साथ बजट 2026-27 में भारतीय काजू और कोको के लिए एक विशेष ‘समर्पित कार्यक्रम’ (Dedicated Program) शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को कच्चे काजू और कोको के उत्पादन व प्रोसेसिंग में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि विदेशों से आयात पर निर्भरता खत्म हो सके।

सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक भारतीय काजू और कोको को दुनिया के प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए न केवल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाई जाएगी, बल्कि निर्यात की क्षमता (Export Competitiveness) को भी मजबूत किया जाएगा, जिससे भारतीय किसानों को उनकी फसल का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन दाम मिल सके।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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