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LPG Gas Update: गैस सिलेंडर के लिए अब नहीं करना होगा घंटों इंतजार! एजेंसियों ने बदली डिलीवरी की रफ्तार, ग्राहकों की हो गई मौज

भारत में ईरान‑यूएस तनाव के बीच एलपीजी गैस की किल्लत के बाद अब सप्लाई और डिलीवरी सिस्टम सुधरने लगा है। बुकिंग के बाद 2.5 दिन के टार्गेट पर डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग का बढ़ना और धीमे डीलर्स को बायपास करने से ग्राहकों को अब कम इंतजार करना पड़ रहा है।

By Pinki Negi

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दिल्ली, उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल ‑ असम तक लगभग हर शहर में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बाद घंटों-घंटों इंतजार, एजेंसी की गाड़ी का इंतजार और फिर भी आखिर में सिलेंडर न मिलना, ये दृश्य बीते कुछ हफ्तों में इतना आम हो गया था कि उपभोक्ता ने लगभग हार मान ली थी। लेकिन अब एलपीजी (LPG) डिलीवरी सिस्टम में आए बदलावों के बाद स्थिति तेजी से सुधरती दिख रही है। न तो तेल और गैस की “कच्ची कमी” अब गंभीर रही है, न ही ग्राहकों को सिलेंडर के लिए ऊंची ‘कालीबाजारी’ या अनिश्चित प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

गर्दन पर चल रहे ईरान‑यूएस तनाव के बीच भारत में दिसंबर 2025 से लेकर मार्च 2026 के बीच कच्चे तेल और एलपीजी गैस की मांग में भारी उछाल आया था। एक ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अस्थिर थीं, तो दूसरी ओर देश के अंदर भी गैस की जमाखोरी और डबल‑ट्रिपल बुकिंग की आदत ने सप्लाई चैन को और तनावग्रस्त कर दिया। इसी दौरान शहर‑शहर में यह शिकायत सबसे ज्यादा आम थी कि “सिलेंडर बुक हो गया, पर आने में 4-5 दिन या उससे भी ज्यादा लग रहे हैं”。 इस वजह से कई घरेलू उपभोक्ताओं ने दोबारा तेल या गोबर गैस जैसे विकल्पों की ओर रुख किया, जो सरकार और तेल कंपनियों के लिए चेतावनी के समान था।

डिलीवरी सिस्टम में जड़ी‑जोड़ी

इसी “सिलेंडर‑घेराकाट” को तोड़ने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय और तीनों बड़ी तेल बाजारिक कंपनियां- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम – ने लॉजिस्टिक्स और बुकिंग सिस्टम को लगभग फिर से डिजाइन किया। पहले यह नियम हुआ कि बुकिंग के बाद डिलीवरी का टार्गेट सिर्फ 2.5 दिन रखा जाए, जिसे अब लगभग सभी शहरों में मॉनिटर किया जा रहा है। नतीजा: जहां पहले 3-5 दिन में भी सिलेंडर नहीं मिलता था, वहां अब ज्यादातर केस में 2-3 दिन में डिलीवरी होने की बात सामने आ रही है।

एक बड़ा बदलाव यह भी हुआ कि डिलीवरी रफ्तार की जिम्मेदारी सीधे डिस्ट्रीब्यूशन‑सेंटरों और रीजनल हेडऑफिस पर ट्रैक होने लगी। अब उन एजेंसियों को जिनकी रिकॉर्ड धीमी डिलीवरी की रही है, उनके संबंधित ग्राहकों की बुकिंग को तेज‑डिलीवरी वाले नजदीकी डिस्ट्रीब्यूशन‑हब पर ट्रांसफर किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को नया डीलर देना पड़ता है, बल्कि उसी कनेक्शन का ट्रांसफर बैक‑एंड पर होता है, जिससे उसे तेज डिलीवरी मिलती है और कंपनी के लिए भी लॉजिस्टिक कन्फ्यूजन कम होता है।

“डिलीवरी सामान्य है” – सरकार की घोषणा

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने हाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि “डिलीवरी सामान्य है” और रोजाना होने वाली घरेलू एलपीजी रिफिल की संख्या अब 46-50 लाख के बीच टिकी हुई है। उन्होंने 16 अप्रैल के आंकड़े भी साझा किए कि उस दिन लगभग 50 लाख सिलेंडर उपभोक्ताओं के घर‑घर पहुंचाए गए; ये आंकड़े पिछले हफ्तों की तुलना में निश्चित रूप से सुधरती स्थिति का संकेत देते हैं। उनका कहना था कि गर्मी के मौसम की शुरुआत भी इसमें मदद कर रही है, क्योंकि हीटिंग की जरूरत घटने से व्यापारिक और उद्योग‑स्तरीय गैस क्षमता का हिस्सा घरेलू उपयोग के लिए फ्री हो रहा है।

ऑफिशियल डेटा की बात की जाए तो घरेलू एलपीजी आपूर्ति वर्तमान में “सामान्य” श्रेणी में दर्ज है। यानी डिस्ट्रीब्यूटर डिपो पर किसी भी तरह की सिलेंडर‑किल्लत की औपचारिक रिपोर्ट नहीं आ रही है। इसके अलावा, कुल मांग का लगभग 98 प्रतिशत ऑनलाइन बुकिंग के जरिए हो रहा है, जिससे मैनुअल बुकिंग‑घपलों और दोहरी बुकिंग की संभावना कम हुई है। सरकार ने अवैध आपूर्ति को रोकने के लिए “प्रमाणित डिलीवरी” को बढ़ाकर 90 प्रतिशत से ऊपर ले जाने का दावा किया है, जिसका अर्थ है कि ज्यादातर गैस‑सिलेंडर अब रजिस्टर्ड ACS‑आधारित स्कीम या ऑनलाइन ट्रैक के जरिए ही डिलीवर हो रहे हैं, अनऑथराइज्ड धंधेबाजों के लिए जगह लगभग खत्म होती जा रही है।

छोटे सिलेंडरों से प्रवासी श्रमिकों तक पहुंच

एक और महत्वपूर्ण पहलु यह है कि कमर्शियल LPG मांग, जो रेस्तरां, छोटे‑मोटे रेस्टोरेंट और फूड‑स्टॉल्स पर निर्भर थी, उसे भी लगभग संकट‑पूर्व स्तर के 70 प्रतिशत तक लौटाने में सफलता मिली है। इसके लिए तेल कंपनियों ने टारगेटेड डिलीवरी अभियान चलाए, जिसमें खासतौर पर छोटे व्यापारियों को प्राथमिकता दी गई। वहीं, प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो के छोटे सिलेंडरों का आवंटन भी बढ़ाया गया, ताकि उनके पास भी अलग‑अलग घरों में चलते‑फिरते रहने के दौरान भी सुरक्षित और सस्ता खाना पकाने का विकल्प रहे।

सरकार के हालिया आंकड़ों के मुताबिक 23 मार्च से अब तक 16.41 लाख से अधिक बाजार मूल्य वाले 5 किलोग्राम के LPG सिलेंडर ऐसे लोगों को बेचे जा चुके हैं, जिनके पास कोई घरेलू LPG कनेक्शन नहीं है। इनमें प्रवासी मजदूर, कॉलेज‑स्टूडेंट, सिंगल‑वर्किंग प्रोफेशनल्स और छोटे व्यवसायी शामिल हैं। यह नीति एक तरह से उन लोगों के लिए पैसिंग‑ब्रिज की तरह है, जो आधिकारिक सब्सिडी‑सिस्टम से बाहर हैं, लेकिन गैस‑आधारित कुकिंग को प्राथमिकता देते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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