
आज के समय में किसी को भी पैसों की जरूरत अचानक पड़ सकती है। मेडिकल खर्च, शादी, घर का काम या कोई जरूरी पारिवारिक जरूरत—ऐसे मौके पर पर्सनल लोन एक आसान विकल्प बन जाता है। लेकिन लोन लेने से पहले सबसे जरूरी बात होती है कि हर महीने कितनी EMI देनी होगी और पूरे टेन्योर में कुल कितना पैसा चुकाना पड़ेगा। यही वजह है कि ब्याज दर, EMI और कुल भुगतान को समझे बिना लोन लेना सही फैसला नहीं माना जाता।
ब्याज दर तय करती है बोझ
पर्सनल लोन की EMI सीधे तौर पर ब्याज दर पर निर्भर करती है। अगर ब्याज दर कम है, तो EMI और कुल भुगतान दोनों कम रहेंगे। लेकिन जैसे-जैसे ब्याज दर बढ़ती है, आपकी मासिक किस्त भी बढ़ती जाती है और पूरे लोन की लागत भी ऊपर चली जाती है। आम तौर पर पर्सनल लोन की दरें बैंक और ग्राहक की प्रोफाइल के हिसाब से अलग-अलग होती हैं, इसलिए सिर्फ “लोन मिल रहा है” देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।
1 लाख रुपये पर EMI कितनी होगी
अगर कोई व्यक्ति 1 लाख रुपये का पर्सनल लोन 1 साल के लिए लेता है, तो ब्याज दर के अनुसार EMI बदलती रहती है। 9.99 प्रतिशत ब्याज दर पर मासिक EMI करीब 8,791 रुपये बनती है और 12 महीनों में कुल भुगतान लगभग 1 लाख 5 हजार 493 रुपये होता है। इस हिसाब से कुल ब्याज करीब 5 हजार 493 रुपये बैठता है।
इसी तरह 9.95 प्रतिशत ब्याज दर होने पर EMI करीब 8,789 रुपये होती है और कुल भुगतान लगभग 1 लाख 5 हजार 471 रुपये तक पहुंचता है। इसमें कुल ब्याज करीब 5 हजार 471 रुपये बनता है। यानी ब्याज दर में मामूली बदलाव भी आपकी जेब पर असर डालता है।
दर बढ़ी तो किस्त भी बढ़ी
अगर ब्याज दर 11 प्रतिशत हो जाए, तो EMI बढ़कर लगभग 8,838 रुपये हो जाती है। इस स्थिति में पूरे साल में कुल भुगतान करीब 1 लाख 6 हजार 58 रुपये होगा और कुल ब्याज लगभग 6 हजार 58 रुपये बन जाएगा। यह अंतर भले छोटा लगे, लेकिन एक साल की अवधि में भी असर साफ दिखता है।
जब ब्याज दर 12.05 प्रतिशत तक पहुंचती है, तो EMI लगभग 8,887 रुपये हो जाती है। इस पर कुल भुगतान करीब 1 लाख 6 हजार 647 रुपये और कुल ब्याज लगभग 6 हजार 647 रुपये बनता है। यही वजह है कि लोन लेते समय केवल लोन अमाउंट नहीं, बल्कि ब्याज दर को सबसे पहले देखना चाहिए।
लोन से पहले क्या जांचें
पर्सनल लोन लेने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर जरूर जांचना चाहिए। अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर लोन आसानी से मिल सकता है और कई बार बेहतर ब्याज दर भी मिल जाती है। इसके अलावा बैंक से सीधे बात करके कम ब्याज दर की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि कई बार बातचीत से शर्तें बेहतर हो सकती हैं।
एक और जरूरी बात यह है कि सिर्फ एक बैंक पर निर्भर न रहें। अलग-अलग बैंकों और एनबीएफसी की दरों की तुलना करें, क्योंकि शुरुआती ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज मिलाकर असली लागत बदल जाती है। लोन एग्रीमेंट पढ़ते समय प्रोसेसिंग फीस, प्री-पेमेंट चार्ज और लेट पेमेंट फीस जैसे छिपे हुए शुल्कों पर खास ध्यान देना चाहिए।
EMI भरने की क्षमता सबसे अहम
लोन लेने से पहले अपनी मासिक आय और जरूरी खर्चों का आकलन करना भी बहुत जरूरी है। आपकी EMI ऐसी होनी चाहिए जिसे आप बिना दूसरी जरूरतों पर असर डाले समय पर चुका सकें। बैंक भी आमतौर पर आपकी आय और देनदारी देखकर ही लोन मंजूर करते हैं। इसलिए केवल रकम देखकर नहीं, बल्कि अपनी चुकाने की क्षमता देखकर फैसला करना समझदारी होगी।
सही विकल्प चुनना क्यों जरूरी
अगर आपको जल्दी पैसा चाहिए, तो पर्सनल लोन मददगार हो सकता है। लेकिन कम ब्याज दर, कम शुल्क और अपनी आय के हिसाब से EMI चुनना सबसे अहम है। एक साल के लोन में किस्त थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन कुल ब्याज कम रहता है। इसलिए जो लोग समय पर भुगतान कर सकते हैं, उनके लिए छोटा टेन्योर अक्सर बेहतर माना जाता है।









