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सिर्फ लाल ही नहीं, नीले और काले रंग के भी होते हैं गैस सिलेंडर! क्या आपको पता है इनका मतलब? जान लें बड़ा अंतर

ईरान-अमेरिका युद्ध से भारत में गैस सिलेंडरों की किल्लत ने घर-घर चिंता बढ़ाई है। लाल LPG घरेलू रसोई के लिए खतरे का प्रतीक, सफेद मेडिकल ऑक्सीजन जीवनदायिनी, काला नाइट्रोजन औद्योगिक उपयोग, नीला नाइट्रस ऑक्साइड दर्द निवारक, भूरा हीलियम गुब्बारों के लिए, ग्रे CO2 आग बुझाने में। रंग सुरक्षा कोड हैं, गलत उपयोग रोकते हैं।

By Pinki Negi

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इन दिनों ईरान-अमेरिका युद्ध की आग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झुलसा दिया है। भारत में भी गैस सिलेंडरों की किल्लत ने हर घर को चिंता में डाल दिया है। उत्तर भारत के शहरों जैसे दिल्ली, लखनऊ और हरियाणा में एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। व्यावसायिक सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने से रेस्तरां और होटल परेशान हैं, जबकि घरेलू उपभोक्ता रसोई की रौनक लौटाने को बेताब।

हालांकि सरकार ने कमी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन आयात पर निर्भरता और युद्धजनित व्यवधान ने स्थिति गंभीर बना दी है। ऐसे में सिलेंडरों के अलग-अलग रंगों का महत्व और बढ़ गया है, जो सुरक्षा कोड के तहत गैस की पहचान सुनिश्चित करते हैं।

लाल रंग: घरेलू LPG का प्रतीक

हर भारतीय घर में लाल सिलेंडर की चमक आम है। इसमें 14.2 किलो लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) भरी होती है, जो चूल्हे पर रोटियां सेंकने का आधार है। लाल रंग खतरे का संकेत है क्योंकि LPG ज्वलनशील है और तेजी से आग पकड़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय IS 3196 मानक के तहत यह रंग दूर से सावधानी बरतने का अलर्ट देता है। कमी के दौर में लाखों परिवार इंडक्शन या चूल्हे पर लौट रहे हैं।

सफेद रंग: जीवनदायिनी ऑक्सीजन

सफेद सिलेंडर शांति और जीवन का प्रतीक है। इसमें मेडिकल ऑक्सीजन भरी होती है, जो अस्पतालों और एंबुलेंस में सांस की आपूर्ति करती है। मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत पहचान के लिए सफेद रंग चुना गया। कोविड के बाद इसकी मांग बढ़ी, लेकिन युद्ध ने सप्लाई चेन प्रभावित की है।

काला रंग: नाइट्रोजन की शक्ति

काले सिलेंडर में नाइट्रोजन गैस होती है, जो निष्क्रिय होने से रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करती। कारखानों, टायरों में हवा भरने और चिप्स पैकेट फ्रेश रखने में इसका इस्तेमाल होता है। औद्योगिक क्षेत्रों में ये सिलेंडर आम हैं।

नीला और अन्य रंग: विशेष उपयोग

नीले सिलेंडर में नाइट्रस ऑक्साइड (हंस गैस) भरी होती है, जो डेंटिस्ट्री और एनेस्थीसिया में दर्द निवारक के रूप में काम आती है। भूरे रंग के सिलेंडर में हीलियम होता है, जो मेलों के गुब्बारों को उड़ान देता है- यह हवा से हल्की गैस है। ग्रे या स्लेटी सिलेंडर कार्बन डाइऑक्साइड से भरे होते हैं, जो फायर एक्सटिंग्विशर और कोल्ड ड्रिंक फैक्ट्रियों में जरूरी हैं।

ये रंग कोड गलत उपयोग से बचाते हैं और वैश्विक मानकों पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से आपूर्ति बहाल होते ही कमी दूर हो सकती है। फिलहाल, उपभोक्ता सतर्क रहें- सिलेंडर बदलते समय रंग और लेबल जांचें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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