
दिल्ली इन दिनों आग उगलती धूप से जूझ रही है। सुबह से ही सूरज की तपिश ऐसी होती है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सड़कों पर लू के थपेड़े महसूस हो रहे हैं और दोपहर तक हालात और भी खराब हो जाते हैं। तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। इस भीषण गर्मी का असर सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है, जो रोजाना घंटों क्लासरूम में बैठकर पढ़ाई करते हैं। पसीने से तरबतर बच्चे डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं, चक्कर आने, सिरदर्द और हीट स्ट्रोक जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं।
सरकार का क्रांतिकारी कदम
इसलिए दिल्ली सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने 20 अप्रैल 2026 को सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसमें ‘वॉटर बेल’ सिस्टम को अनिवार्य बनाया गया है।
वॉटर बेल क्या है?
यह ‘वॉटर बेल’ कोई साधारण घंटी नहीं है। यह क्लास खत्म होने या ब्रेक के लिए नहीं, बल्कि बच्चों को पानी पीने की याद दिलाने के लिए बजेगी। गर्मी में बच्चे खेल-कूद या पढ़ाई में इतने मग्न हो जाते हैं कि प्यास भूल जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन होता है, जो उल्टी, कमजोरी और कभी-कभी जानलेवा लू लगने का कारण बनता है। सरकार ने इसी वैज्ञानिक सलाह को आधार बनाकर हर 45 से 60 मिनट के अंतराल पर वॉटर बेल बजाने का आदेश दिया है।
घंटी बजते ही शिक्षकों को 2-3 मिनट का ब्रेक देना होगा, जिसमें हर बच्चा कम से कम एक गिलास साफ, ठंडा पानी पिएगा। स्कूलों को निर्देश हैं कि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें- आरओ सिस्टम, वॉटर कूलर और फिल्टर हमेशा सुचारू रखें। जहां कमी हो, वहां अतिरिक्त व्यवस्था फौरन करें। यह सिस्टम पूरे स्कूल घंटों के दौरान सक्रिय रहेगा, ताकि कोई बच्चा भूल न जाए।
बडी सिस्टम और आउटडोर प्रतिबंध
गाइडलाइंस इससे कहीं आगे जाती हैं। ‘बडी सिस्टम’ नामक अनोखी पहल के तहत बच्चों को जोड़ियों में बांटा जाएगा। हर बच्चा अपने पार्टनर की नजर रखेगा- अगर किसी को चक्कर आए, सुस्ती लगे या पसीना अधिक आए, तो तुरंत शिक्षक को सूचना देगा। यह सिस्टम हीट स्ट्रेस के शुरुआती लक्षणों को पकड़ने में कारगर साबित होगा। आउटडोर गतिविधियों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। सुबह की प्रार्थना सभाओं को छोटा करें, छायादार या इनडोर जगहों पर शिफ्ट करें। खुले मैदान में कोई कक्षा, खेल या असेंबली नहीं होगी। क्लासरूम में पर्याप्त वेंटिलेशन, कार्यशील पंखे और छाया सुनिश्चित करें। स्कूल प्रांगण में शेड लगाएं, ताकि इंतजार कर रहे बच्चे धूप से बचें।
जागरूकता और प्राथमिक उपचार
जागरूकता पर भी जोर दिया गया है। शिक्षक रोजाना प्रार्थना, सभा, नोटिस बोर्ड और पैरेंट्स व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए मौसम विभाग के हीटवेव पूर्वानुमान साझा करेंगे। हर स्कूल में एक नोडल टीचर नियुक्त होगा, जो इन नियमों का पालन मॉनिटर करेगा। प्राथमिक उपचार किट में ORS पैकेट्स रखना अनिवार्य है। अगर किसी बच्चे को गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत मेडिकल मदद लें और पैरेंट्स को सूचित करें। स्कूल आने-जाने के दौरान बच्चे सिर ढकें- टोपी, छाता या तौलिया इस्तेमाल करें। यह सलाह पैरेंट्स और टीचर्स दोनों के लिए है।
अनुपालन पर सख्ती
शिक्षा निदेशालय ने अनुपालन पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। जोनल डिप्टी डायरेक्टर को 2 मई 2026 तक एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) जमा करनी होगी। यह पहली बार नहीं- 2025 में भी समान गाइडलाइंस जारी हो चुकी थीं, लेकिन इस बार येलो अलर्ट के बीच इन्हें और सशक्त बनाया गया है। अभिभावक वर्ग इसे स्वागतयोग्य बता रहे हैं। एक पैरेंट ने कहा, “बच्चे घर पर भी पानी पीना भूल जाते हैं, स्कूल में यह सिस्टम वरदान है।” स्कूल प्रिंसिपल्स का मानना है कि इससे पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, बल्कि बच्चे स्वस्थ रहकर बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
देश के लिए मिसाल
यह पहल न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल है। जलवायु परिवर्तन के दौर में गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, ऐसे में बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। सरकार का यह कदम साबित करता है कि नीति और संवेदनशीलता का मेल कितना प्रभावी हो सकता है। उम्मीद है, स्कूल शत-प्रतिशत अनुपालन करेंगे, ताकि कोई बच्चा गर्मी की चपेट में न आए।









