
भारत अपनी रसोई गैस की लगभग 90 फीसदी आपूर्ति खाड़ी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात करता है। ईरान-अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में अवरोधक स्थिति के चलते यह आयात मार्ग अस्थायी रूप से बाधित हो गया, जिसके कारण देश में LPG गैस संकट खड़ा हो गया। इस आपात स्थिति के बीच सरकार ने रसोई गैस से जुड़े नीतिगत, कीमत और वितरण पर कई नियम बदल दिए हैं। इसी श्रृंखला में एक नया नियम और लागू किया गया है: बिना DAC (Delivery Authentication Code) कोड के अब घर-घर गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं होगी।
क्यों बदले गए LPG नियम?
भारत पहले से ही एलपीजी की लगभग 60 फीसदी जरूरत वैश्विक बाजार से आयात पर निर्भर है, जिसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। जब यह मोड़ बंद या असुरक्षित हो जाता है, तो जहाजों की शिपिंग देरी का शिकार होती है, जिससे भारत में सप्लाई चेन टूट जाती है। इसी कारण फरवरी- अप्रैल 2026 के बीच कई शहरों में सिलेंडर के लिए कतारें लग गईं, कुछ जगह तो घरों तक गैस की किल्लत महसूस हुई।
इस संकट को नियंत्रित करने, ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने मार्च 2026 से LPG से जुड़े कई नियम तेजी से बदलने शुरू किए। इनमें सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी, बुकिंग के अंतराल में वृद्धि, और अब DAC कोड व्यवस्था को अनिवार्य बनाना शामिल है।
DAC कोड क्या है और डिलीवरी व्यवस्था को कैसे बदल रहा है?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने हाल में बताया कि देश के लगभग 92 फीसदी घरेलू एलपीजी कनेक्शन DAC सिस्टम से जोड़ दिए गए हैं। उनका कहना है कि डिलीवरी में फर्जीवाड़ा, गैस चोरी और गलत बिलिंग रोकने के लिए यह सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे वितरण प्रक्रिया “पारदर्शी और परेशानी मुक्त” हो गई है।
DAC का पूरा नाम Delivery Authentication Code है, जो गैस सिलेंडर की डिलीवरी की पुष्टि के लिए एक यूनिक सुरक्षित कोड की तरह काम करता है। जैसा कि नियम में स्पष्ट तौर पर कहा गया है- बिना इस कोड के डिलीवरी बॉय गैस सिलेंडर देने से मना कर सकता है।
कैसे काम करता है डिलीवरी के समय कोड?
जब आप गैस सिलेंडर की बुकिंग करते हैं- चाहे गैस एजेंसी की लैंडलाइन, IVRS, ऑनलाइन ऐप या व्हाट्सऐप के जरिए – तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या उसी प्लेटफॉर्म पर एक यूनिक DAC कोड जनरेट होकर भेज दिया जाता है। यह कोड आपके बुकिंग के तुरंत बाद आता है और OTP की तरह ही एकबार का, टाइम‑बाउंड कोड होता है।
डिलीवरी के समय जैसे ही डिलीवरी बॉय आपके घर पहुंचता है, उसके मोबाइल या गैस कंपनी के पोर्टेबल डिवाइस पर आपकी बुकिंग का रिकॉर्ड दिखता है, जिसमें यही DAC कोड दर्ज होता है। आपको उसे अपने फोन पर आए SMS, व्हाट्सऐप या ऐप के जरिए दिखाना होता है। अगर कोड सही मिलता है तो डिलीवरी बॉय सिलेंडर सौंप देता है; अगर कोड नहीं या गलत है तो सिस्टम डिलीवरी की अनुमति नहीं देता, जिससे फर्जी बुकिंग और ब्लैक‑मार्केट डिलीवरी रोकी जा सके।
कोड न मिलने पर आपके साथ क्या होगा?
कई बार तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन या नेटवर्क की वजह से बुकिंग के बाद भी DAC कोड फोन पर नहीं पहुंच पाता, या गलती से डिलीट हो जाता है। इस स्थिति में ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है, व्हाइट पेपर और गैस कंपनियों के आधिकारिक दिशा‑निर्देश में साफ बताया गया है कि डिलीवरी बॉय के आने पर उससे कोड दोबारा भेजने के लिए अनुरोध किया जा सकता है।
गैस एजेंसी के सिस्टम में आपका रजिस्टर्ड नंबर होता है, इसलिए बॉय अपने डिवाइस पर ही “Regenerate DAC” या ऐसी ही एक ऑप्शन के जरिए नया कोड भेज सकता है, जो आपके फोन पर फौरन आ जाता है और उसे दिखाकर आपको सिलेंडर डिलीवर कर दिया जाता है। हालांकि इसके लिए यह अनिवार्य है कि आपका मोबाइल नंबर सही रजिस्टर्ड हो और ऐप/व्हाट्सऐप पर भी आपने बाइंडिंग कर दी हो।
मार्च 2026 से अब तक LPG नियमों में क्या‑क्या बदला?
ईरान-अमेरिका युद्ध और होर्मुज संकट के बीच भारत सरकार ने LPG संकट को नियंत्रण में रखने के लिए मार्च 2026 के बाद कई स्तरों पर नियम बदले। इनमें दो सबसे नोटिस‑वर्थ पहलू मूल्य और खपत को लेकर हैं।
कीमतों में बढ़ोतरी:
वाणिज्यिक (Non‑Domestic) LPG सिलेंडर के दाम लगातार दो बार बढ़ाए गए हैं, ताकि रेस्टोरेंट, ढाबे और दुकानें अनावश्यक तौर पर गैस न जमा करें। घरेलू सिलेंडर की कीमत में भी लगभग 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है, जिससे सब्सिडी पर दबाव थोड़ा कम होने का उद्देश्य है।
बुकिंग अंतराल बढ़ाया गया:
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने सिलेंडर बुकिंग के अंतराल (Waiting Period) में वृद्धि कर दी है। अब शहरी क्षेत्रों में अगले सिलेंडर की बुकिंग पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही हो सकती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिन कर दिया गया है, जो पहले 21 दिन का था। इससे यह उम्मीद है कि लोग गैस जमा‑जमा कर ब्लैक मार्केट में न बेचेंगे।









