
17 अप्रैल, 2026 की सुबह से ही देशभर के सराफा बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट का रुख देखा गया। पिछले तीन दिनों से लगातार बढ़ रही सोने‑चांदी की कीमतों पर चौथे दिन अचानक ब्रेक लग गया, जिससे निवेशकों की जोरदार मुनाफा‑वसूली की लहर भी सामने आई। शादियों के मौसम और अक्षय तृतीया के आस‑पास बढ़े दबाव के बावजूद, आज गोल्ड और सिल्वर के भाव में साफ तौर पर नीचे की ओर मोड़ दिखाई दे रहा है।
आज की कीमतों का रुझान
सोने की कीमत पर नजर डालें तो 24 कैरेट सोने के भाव लगभग ₹1,54,600 के आसपास रहने का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि 22 कैरेट सोना ₹1,41,500 के लगभग प्रति 10 ग्राम की सीमा पर बिक रहा है। इसका मतलब यह है कि 24 कैरेट में हर 10 ग्राम सोने पर लगभग ₹1,300–1,400 की गहरी गिरावट आई है, जबकि 22 कैरेट कंसोलिडेटेड ग्राहकों के लिए प्रति 10 ग्राम लगभग ₹1,250 के उतार का असर दिख रहा है।
गिरावट के पीछे कौन‑से कारण काम कर रहे हैं?
विशेषज्ञों की मानें तो इस गहरी गिरावट के पीछे कई ऊपरी और नीचे के स्तर के कारक मिलकर काम कर रहे हैं। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स में उतार‑चढ़ाव और अमेरिका जैसे बड़े देशों की मैक्रोइकॉनॉमिक रिपोर्ट्स से निवेशकों का रवैया तेजी से बदल रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत में शेयर बाजार और अन्य एसेट क्लास के रिटर्न के मुकाबले सोने की अपेक्षाकृत कम खिंचाव वाली वैल्यू ने नए खरीददारों की ओर रुख कमजोर कर दिया है।
उतार‑चढ़ाव की लहर और ट्रेडर रणनीति
इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों में सोने‑चांदी की कीमतों में लगातार उतार‑चढ़ाव चल रहा है, जिससे ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों के बीच प्रॉफिट‑बुकिंग की मानसिकता मजबूत हुई है। जब एक हफ्ते में ही सोना कई हजार रुपये प्रति 10 ग्राम ऊपर चढ़कर रिकॉर्ड या नजदीकी लेवल पर पहुंच जाता है, तो निवेशक एमसीएक्स और स्पॉट बाजार से एक‑साथ बिक्री दबाव डालने लगते हैं, जिससे रेट तेजी से नीचे की ओर आ जाते हैं।
अक्षय तृतीया और शादियों के सीजन का असर
अक्षय तृतीया करीब आने से पहले ही ज्वेलरी मार्केट में डिमांड धीरे‑धीरे बढ़ने लगी है, लेकिन कई बड़े शहरों के ज्वेलर्स बता रहे हैं कि लोग अभी खरीदारी में थोड़ी संयमित रणनीति अपना रहे हैं। एक तरफ जहां ग्राहक अच्छी डिजाइन वाली सोने‑चांदी की ज्वेलरी तो जरूर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे भाव को नीचे आने का इंतजार भी कर रहे हैं।
वैश्विक और घरेलू दबाव का भाव पर असर
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार, भू‑राजनीतिक तनाव और महंगाई के डेटा का असर भी सोना‑चांदी के फ्यूचर्स पर साफ दिख रहा है। कभी कमजोर डॉलर और बढ़ती अनिश्चितता सोने को ऊपर धकेलती है, तो कभी बेहतर मैक्रो नंबर और रिस्क‑ऑन रुख से भाव तेजी से लुढ़क आते हैं। इस उतार‑चढ़ाव के बीच वर्तमान गिरावट को कई एक्सपर्ट “कॉरेक्शन” की कैटेगरी में रख रहे हैं, न कि किसी दीर्घकालिक बुल‑मार्केट के अंत के रूप में।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति बेहतर है?
आम निवेशक के लिए विशेषज्ञों की सलाह यही है कि लंबी अवधि के लिए सोना लेनेवालों को भावनाओं पर आधारित तेजी‑से‑तेजी खरीद‑बिक्री से बचना चाहिए। उधार लेकर या लीवरेज ट्रेडिंग पर आधारित बड़े स्केल पर ट्रेडिंग करने वाले छोटे निवेशकों को इस उतार‑चढ़ाव की परिस्थिति में और ज्यादा सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि एक‑दो दिन के अंदर ही हजारों रुपये के फ्लैक्चुएशन आसानी से उनके लाभ‑हानि को उल्टा कर सकते हैं।
रिटेल खरीदारों के लिए अक्षय तृतीया की रणनीति
दूसरी ओर, रिटेल खरीददार अगर शादी, उपनयन या अन्य पारिवारिक समारोह के लिए सोना‑चांदी की ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आज की कीमतों को एक निर्णय‑लेने का संदर्भ मान सकते हैं, खासकर अगर उनका शेड्यूल अक्षय तृतीया या शादी‑सीजन के साथ जुड़ा है। इस दौरान बड़ी मात्रा में एक‑बार खरीदने की बजाय हल्की‑मात्रा में बार‑बार खरीद की रणनीति या एसआईपी‑जैसी तर्कसंगत योजना अधिक मजबूत मानी जा रही है।
सोने‑चांदी बाजार में अगले दौर की तैयारी
कुल मिलाकर, 17 अप्रैल 2 endorsements को सोने‑चांदी की कीमतों में आई गिरावट देखकर सर्राफा बाजार फिर से संयम और विश्लेषण की राह पर लौट रहा है, और निवेशकों को एक बार फिर से यह समझाना होगा कि “सातवें आसमान” की तेजी या तेज गिरावट किसी भी एसेट के लंबे सफर का सिर्फ एक पड़ाव है।









