
मध्य प्रदेश में 10वीं और 12वीं कक्षाओं के परिणाम जारी होते ही ग्रामीण इलाकों की होनहार बेटियों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है। प्रदेश सरकार की चर्चित ‘गांव की बेटी योजना’ के तहत इस बार 60 प्रतिशत या इससे अधिक अंक लाने वाली छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए 5,000 से 7,500 रुपये तक की वार्षिक सहायता राशि का ऐलान किया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर यह योजना 2026 में और प्रभावी रूप से लागू हो रही है, जिसका उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण कॉलेज की पढ़ाई से वंचित होने वाली गांव की बेटियों को मजबूत पंख देना है। 2005 से चली आ रही यह योजना अब तक 60,000 से अधिक छात्राओं को लाभ पहुंचा चुकी है, और इस साल 12वीं के रिजल्ट के बाद आवेदनों की होड़ लग गई है।
योजना का उद्देश्य और लाभ राशि
यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रही है। दरअसल, मध्य प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान राज्य में कई परिवारों के लिए बेटी की ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल कोर्स की फीस वहन करना चुनौती होता है। योजना के तहत 12वीं में प्रथम श्रेणी (60% अंक) प्राप्त करने वाली छात्रा, जो ग्रामीण इलाके के स्कूल से पढ़ी हो और सरकारी या मान्यता प्राप्त निजी कॉलेज में दाखिला ले, उसे 10 महीनों तक मासिक सहायता मिलती है।
सामान्य ग्रेजुएशन कोर्स करने वाली बेटी को प्रति माह 500 रुपये (कुल 5,000 रुपये सालाना) जबकि इंजीनियरिंग, मेडिकल या अन्य तकनीकी/चिकित्सा पाठ्यक्रम चुनने वाली को 750 रुपये मासिक (कुल 7,500 रुपये) प्रदान किए जाते हैं। यह राशि सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित होती है, जिससे छात्रा बिना किसी बाधा के पढ़ाई जारी रख सकती है। एक परिवार से अधिकतम दो बेटियां ही लाभ ले सकती हैं, जो योजना की सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए उचित है।
पात्रता मानदंड विस्तार से
पात्रता के मानदंड सरल लेकिन सख्त हैं। आवेदिका मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र की स्थायी निवासी होनी चाहिए, अर्थात शहरी क्षेत्रों (नगर निगम, नगर पालिका) की छात्राएं अयोग्य हैं। 12वीं की परीक्षा ग्रामीण स्कूल से उत्तीर्ण हो और न्यूनतम 60% अंक हों। इसके अलावा, कॉलेज में प्रथम वर्ष का एडमिशन अनिवार्य है। योजना का लाभ केवल स्नातक स्तर तक सीमित है, और आवेदन के समय समग्र आईडी में eKYC पूर्ण होना चाहिए।
यदि परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत है या छात्रा ने पहले ही लाभ ले लिया हो, तो अयोग्यता का प्रावधान है। सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को प्राथमिकता मिलती है, जबकि निजी संस्थानों में भी मान्यता आवश्यक है। यह सुनिश्चित करता है कि वास्तविक जरूरतमंद बेटियां ही लाभान्वित हों।
आवेदन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जो छात्राओं को घर बैठे सुविधा प्रदान करती है। सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल hescholarship.mp.gov.in या scholarshipportal.mp.nic.in पर जाएं। ‘न्यू रजिस्ट्रेशन’ पर क्लिक कर नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, समग्र आईडी, मोबाइल नंबर और ईमेल दर्ज करें। OTP सत्यापन के बाद लॉगिन आईडी बनेगी। ‘गांव की बेटी योजना 2026’ विकल्प चुनकर व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक विवरण भरें।
फॉर्म भरने से पहले सभी जानकारी चेक करें, क्योंकि संशोधन सीमित है। अंत में कॉलेज में आवेदन रसीद जमा करें। आवेदन की अंतिम तिथि आमतौर पर दिसंबर या फरवरी तक होती है, इसलिए 12वीं रिजल्ट के बाद तुरंत आवेदन करें। स्थिति ट्रैकिंग के लिए पोर्टल पर लॉगिन करें।
आवश्यक दस्तावेजों की पूरी सूची
आवश्यक दस्तावेजों की सूची लंबी लेकिन स्पष्ट है: आधार कार्ड, सक्रिय मोबाइल नंबर, 10वीं-12वीं मार्कशीट, ग्रामीण निवास प्रमाण पत्र, ‘गांव की बेटी’ प्रमाण पत्र (सरपंच या सचिव द्वारा सत्यापित), जाति/आय प्रमाण पत्र (यदि लागू), बैंक पासबुक फोटो, कॉलेज एडमिशन रसीद या आईडी कार्ड, और पासपोर्ट साइज फोटो। सभी दस्तावेज स्कैन होकर अपलोड करने होंगे, इसलिए पहले तैयार रखें। जाली दस्तावेज पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई होती है।
योजना का सामाजिक प्रभाव
यह योजना न केवल आर्थिक मदद बल्कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को मजबूत करती है। ग्रामीण मध्य प्रदेश में लड़कियों की साक्षरता दर बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं प्रदेश की विकास दर को दोगुना कर सकती हैं। इच्छुक छात्राएं देरी न करें, क्योंकि चयन लॉटरी या मेरिट आधारित हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन या पोर्टल देखें।









