
सोना‑चांदी की कीमतें 17 अप्रैल 2026 को भारत में एक बार फिर सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं और पुराने सभी रिकॉर्ड लगभग तोड़ चुकी हैं। अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) से ठीक पहले बाजार में तीव्र तेजी आई है, जिससे 24 कैरेट सोने का भाव अब देश भर के कई शहरों में ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के पार चला गया है। इसी क्रम में चांदी की कीमतें भी कई शहरों में ₹2.70 लाख प्रति किलोग्राम के आस‑पास पहुंच गई हैं, जो आम घरेलू खरीदार के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।
सोने की कीमतें: नया “लाख‑पार” दौर
इंटरनेट और बाजार डेटा के अनुसार आज भारत में 24 कैरेट सोने का औसत भाव लगभग ₹1,53,190 से ₹1,55,570 प्रति 10 ग्राम के रेंज में ट्रेड कर रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में यह रेट करीब‑करीब इसी लेवल पर है, जबकि बेंगलुरु में थोड़ा कम ‑ लगभग ₹1,53,270 प्रति 10 ग्राम दर्ज है। इन रेफरेंस भावों में आमतौर पर GST (3%) और ज्वैलर्स का मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होता, इसलिए असली बाजार में ग्राहकों को ये दाम और ऊपर दिखाई देते हैं।
22 कैरेट सोना, जो ज्यादातर गहनों के लिए इस्तेमाल होता है, आज लगभग ₹1,40,424 से ₹1,42,750 प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। वहीं 18 कैरेट जेवर, जो कम शुद्धता वाले और अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, आज ₹1,14,893 से ₹1,16,680 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर दर्ज हैं। इस तरह भारत में दो‑चार साल पहले जो भाव “ऐतिहासिक” थे, वे अब रोज़मर्रा की बाजार‑स्थिति बनते जा रहे हैं।
चांदी पर भी भारी तेजी
चांदी की बात करें तो आज कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत बड़े शहरों में लगभग ₹2,50,550 से ₹2,70,000 प्रति किलोग्राम के बीच चल रही है। अगर इसे खुदरा स्तर पर देखा जाए, तो चांदी का खुदरा भाव औसतन ₹2,506 से ₹2,700 प्रति 10 ग्राम के आस‑पास रह रहा है। यह स्तर पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का ही नतीजा है, जिसे वैश्विक सप्लाई और निवेशकों की भीड़ ने और तेज किया है।
कीमतें बढ़ने के तीन बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों की मानें तो इस बार सोना‑चांदी की तेजी में तीन मुख्य फैक्टर सामने हैं। पहला और सबसे सीधा कारण है अक्षय तृतीया की खरीदारी। 19 अप्रैल को आने वाले इस शुभ त्योहार के लिए लाखों घरेलू खरीदार पहले से ही तैयार बैठे हैं, जिससे ज्वैलर्स और स्टॉकिस्ट दिनभर मोटा स्टॉक खरीद रहे हैं। इस तरह घरेलू डिमांड ने बाजार में तीव्र तेजी पैदा कर दी है।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू‑राजनीतिक तनाव। मध्य‑पूर्व (West Asia) और कुछ अन्य क्षेत्रों में जारी अस्थिरता के बाद निवेशक सुरक्षित आश्रय के लिए सोने की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिका, यूरोप और एशियाई मार्केट में भी गोल्ड‑होल्डिंग बढ़ने से ग्लोबल सोने की कीमत ऊपर चढ़ी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर सीधा पड़ रहा है।
तीसरा कारक है डॉलर‑रुपये में उतार‑चढ़ाव और आयात‑शुल्क। अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपये की कमजोर स्थिति और आयात पर लगने वाले शुल्क में बदलाव ने घरेलू बाजार में सोना‑चांदी और महंगा बना दिया है। ऐसे वक्त में जब ब्याज‑दरों को लेकर अनिश्चितता है, निवेशक बैंक FD या बॉन्ड्स के बजाय सोने में रखी अपनी जमा राशि को ज्यादा “सुरक्षित” मानते हैं, जिससे डिमांड और ऊपर धकेली जा रही है।
खरीदार और निवेशक के लिए क्या रणनीति?
ऐसे स्तर पर खरीदारों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे गोल्ड‑रेट के लिए स्थानीय ज्वैलर, Tanishq, CaratLane या अन्य आधिकारिक वेबसाइट/ऐप की वेबसाइट पर लाइव भाव जरूर चेक करें, क्योंकि ये रेफरेंस रेट पर हमेशा GST और मेकिंग चार्ज जोड़े जाते हैं। अगर आप सिर्फ निवेश करना चाहते हैं, तो शारीरिक गहने के बजाय गोल्ड ETF या सोवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प भी गंभीरता से देखे जा सकते हैं, क्योंकि इनमें स्टोरेज और मेकिंग चार्ज नहीं होता और लंबी अवधि में रिटर्न कड़ी मेहनत वाले गहनों से कम नहीं होता।
कुल मिलाकर आज सोना‑चांदी ने न सिर्फ अपने अतीत के रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी भी दो कारक बहुत आधारभूत रहते हैं: त्योहार‑आधारित डिमांड और बैठे खर्च करने की परंपरागत आदत। ऐसे में अगर खरीद तय है, तो भाव की चढ़‑उतर देखते हुए लेवल‑वाइज खरीदारी और भंडारण‑सुरक्षा की पूरी योजनाबद्धता जरूरी है।









