
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सोना-चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर युद्ध की आशंका ने शेयर बाजार से लेकर कमोडिटी मार्केट तक दबाव बना रखा है, वहीं बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्क रहने की बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि ऑल-टाइम हाई से नीचे आ चुकी इन कीमती धातुओं के भावों में ‘उलटा फेरबदल’ हो सकता है, यानी भारी गिरावट की गुंजाइश बनी हुई है।
15 अप्रैल को शाम चार बजे तक एमसीएक्स पर 5 जून डिलीवरी वाला सोना 1,54,112 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि 5 मई डिलीवरी वाली चांदी 2,50,055 रुपये प्रति किलो के स्तर पर लुढ़क गई। यह गिरावट निवेशकों के बीच भूचाल ला रही है, क्योंकि सवाल उठ रहा है- आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और आगे कितनी गिरावट आ सकती है?
गिरावट के पीछे वैश्विक कारक
सोने-चांदी के बाजार में पिछले कुछ दिनों से जो हलचल मची है, उसके पीछे वैश्विक कारक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिकी नौसैनिक हस्तक्षेप की आशंका ने तेल निर्यात में बाधा की स्थिति पैदा कर दी है, जिसका असर सीधे महंगाई पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर की बढ़ती मजबूती और ‘सेफ हेवन’ डिमांड में कमी कीमती धातुओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने को सहारा देते हैं, लेकिन यहां उलटा हो रहा है।
कच्चे तेल के दामों में उछाल महंगाई की आशंका बढ़ा रहा है, जो अमेरिकी फेड रिजर्व को ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर रखने के लिए मजबूर कर सकता है। इससे डॉलर को अतिरिक्त समर्थन मिलता है और सोना-चांदी पर दबाव बढ़ जाता है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि मिडिल ईस्ट संकट के कारण तेल के दाम अगर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार टिकते हैं, तो बुलियन मार्केट में भारी बिकवाली ट्रिगर हो सकती है।
हालिया गिरावट का आलम
इस गिरावट का आलम यह है कि अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद से सोना 8 प्रतिशत से ज्यादा और चांदी 16 प्रतिशत से अधिक लुढ़क चुकी है। मंगलवार को थोड़ी रिकवरी दिखी, जब कॉमेक्स पर सोना 4,800 डॉलर प्रति औंस और चांदी 77 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। लेकिन यह महज अस्थायी राहत है। एक्सपर्ट्स चेताते हैं कि अगर तेल के दाम 120 डॉलर पर स्थिर रहे, तो सोने में अतिरिक्त 10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इससे यह 4,400 डॉलर और चांदी 67 डॉलर के स्तर तक नीचे जा सकती है।
इसके उलट, अगर तेल सस्ता होकर 90 डॉलर के नीचे आ जाता है, तो सोने को बल मिलेगा और यह 5,000 डॉलर तथा चांदी 80 डॉलर के पार उछाल ले सकती है। मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितता के बीच रिटेल निवेशक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। दिल्ली, मुंबई जैसे बाजारों में 24 कैरेट सोना 15,490 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है, जबकि चांदी में 100 रुपये प्रति किलो की और गिरावट दर्ज हुई।
निवेशकों के लिए रणनीति
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति? बाजार जानकार सलाह दे रहे हैं कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स फिलहाल दूर रहें। ऊंचे दामों पर खरीदारी जोखिम भरी है, क्योंकि करेक्शन का दौर जारी है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों को सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी), डिजिटल गोल्ड या ईटीएफ पर भरोसा करना चाहिए। नए खरीदार इंतजार करें, क्योंकि 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अच्छा एंट्री पॉइंट हो सकता है। मिडिल ईस्ट की स्थिति, अमेरिकी नीतियां और तेल बाजार की चाल ही आगे का रुख तय करेगी। कुल मिलाकर, सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। कीमती धातुओं का बाजार अनिश्चितता से भरा पड़ा है, लेकिन जो धैर्य रखेंगे, वे ही मुनाफा कमा पाएंगे।









