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जानें क्यों हर निवेशक के पोर्टफोलियो में जरूर होने चाहिए ‘बॉन्ड्स’, समझें बड़े फायदे

बदलते दौर में बॉन्ड्स हर निवेशक के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन रहे हैं। ये शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देते हुए नियमित ब्याज और मूलधन की गारंटी सुनिश्चित करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, विविधीकरण के लिए 40-60% हिस्सा बॉन्ड्स में रखें- G-Sec से लेकर टैक्स-फ्री बॉन्ड्स तक। कम जोखिम, भरोसेमंद रिटर्न के साथ 2026 की अनिश्चितताओं में ये सुरक्षा कवच साबित हो रहे हैं।

By Pinki Negi

जानें क्यों हर निवेशक के पोर्टफोलियो में जरूर होने चाहिए 'बॉन्ड्स', समझें बड़े फायदे

बदलते समय में निवेश के तरीके तेजी से विकसित हो रहे हैं, जहां शेयर बाजार की चमक-दमक के बीच बॉन्ड्स एक स्थिर और भरोसेमंद साथी के रूप में उभर रहे हैं। बॉन्ड मूल रूप से एक कर्ज पत्र है, जिसमें निवेशक सरकार या कंपनी को पैसा उधार देता है और बदले में तय ब्याज के साथ मूलधन की वापसी पाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हर निवेशक के पोर्टफोलियो में बॉन्ड्स का होना अनिवार्य है, क्योंकि ये न केवल जोखिम को कम करते हैं बल्कि लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में संतुलन

शेयर बाजार के उफान भरे उतार-चढ़ाव के दौर में बॉन्ड्स संतुलन का काम करते हैं। जहां इक्विटी में भारी मुनाफे की संभावना के साथ भारी नुकसान का खतरा रहता है, वहीं बॉन्ड्स स्थिर रिटर्न देते हैं। ये पोर्टफोलियो में विविधीकरण लाते हैं, जिससे कुल जोखिम कम हो जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उम्रदराज निवेशक या रिटायरमेंट प्लानिंग करने वालों को कम से कम 40-60% हिस्सा बॉन्ड्स में रखना चाहिए। बाजार के नकारात्मक दौर में, जब शेयर गिरते हैं, बॉन्ड्स अक्सर मूल्य बढ़ाते हैं या स्थिर रहते हैं, जिससे नुकसान की भरपाई होती है।

नियमित आय का मजबूत स्रोत

बॉन्ड्स का सबसे बड़ा आकर्षण है नियमित आय का स्रोत। निवेश के बाद हर छमाही या सालाना ब्याज (कूपन) मिलता रहता है, जो पेंशन या मासिक खर्च चलाने वालों के लिए आदर्श है। उच्च रेटिंग वाले बॉन्ड्स, जैसे सरकारी सिक्योरिटीज (G-Sec), में मूलधन की सुरक्षा लगभग गारंटीड होती है। भारत में RBI द्वारा जारी बॉन्ड्स पर 6-8% तक ब्याज मिल सकता है, जो मुद्रास्फीति से ऊपर रहता है। इसके अलावा, बाजार के खराब समय में ये सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

लिक्विडिटी और टैक्स लाभ

लिक्विडिटी और टैक्स लाभ बॉन्ड्स को और आकर्षक बनाते हैं। सेकेंडरी मार्केट में इन्हें आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है, खासकर NSE या BSE पर लिस्टेड सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स। टैक्स-फ्री बॉन्ड्स पर ब्याज पूरी तरह करमुक्त होता है, जबकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स में कैपिटल गेन टैक्स छूट मिलती है। युवा निवेशक बैरबेल स्ट्रैटेजी अपना सकते हैं- आधा हिस्सा सुरक्षित G-Sec में और बाकी उच्च यील्ड वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में। इससे रिटर्न बढ़ता है बिना जोखिम ज्यादा लिए।

कम जोखिम, भरोसेमंद रिटर्न

हालांकि बॉन्ड्स से शेयरों जितना ऊंचा रिटर्न नहीं मिलता, लेकिन यही उनकी ताकत है- कम जोखिम, भरोसेमंद आय। ब्याज दरों में कटौती के मौजूदा दौर में बॉन्ड की वैल्यू बढ़ रही है। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि 2026 में आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बॉन्ड्स पोर्टफोलियो को मजबूत बनाएंगे। इसलिए, चाहे आप नौकरीपेशा हों या रिटायर्ड, अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप बॉन्ड्स को अपनाएं। विविधीकरण ही धन वृद्धि की कुंजी है। 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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