
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने निवेशकों को एक बार फिर चौंका दिया है। सोमवार को बीएसई पर शेयर 4 फीसदी तक उछलकर 56.15 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जो लगातार दूसरे सेशन की बढ़त का संकेत देता है। पिछले महीने में ही स्टॉक ने करीब 40 फीसदी की रफ्तार पकड़ी, जबकि 9 मार्च 2026 के 52-वीक लो 38.17 रुपये से यह 37.49 फीसदी ऊपर चढ़ चुका है। यह V-शेप रिकवरी रिटेल और संस्थागत निवेशकों का ध्यान खींच रही है, खासकर जब गर्मियों की चरम डिमांड बिजली संकट को बढ़ावा दे रही है।
ब्रोकरेज फर्म्स की नजरें भी सुजलॉन पर टिकी हैं। जेएम फाइनेंशियल ने ‘बाय’ रेटिंग के साथ 64 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है, जो मौजूदा स्तर से 20-56 फीसदी की बढ़त का वादा करता है। इसी तरह आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने भी ‘बाय’ कॉल देते हुए 65 रुपये का लक्ष्य तय किया है। ये अनुमान रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग और कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स पर आधारित हैं।
जियो-पॉलिटिकल तनाव से अनजाने फायदे
सुजलॉन की रैली का सबसे अनोखा ट्रिगर ईरान-अमेरिका संघर्ष है, जिसे जेएम फाइनेंशियल ने ‘अनजाने लाभ’ करार दिया। इस तनाव ने वैश्विक गैस सप्लाई बाधित कर दी, जिसका असर भारत पर भी पड़ा। गैस-बेस्ड पावर जेनरेशन 8-12 जीडब्ल्यू से गिरकर महज 2 जीडब्ल्यू रह गया। ऐसे में विंड एनर्जी उभरकर सामने आई, जो शाम के पीक आवर्स में स्थिर सप्लाई देती है। सोलर पावर रात में शून्य हो जाती है, लेकिन विंड स्पीड शाम-रात बढ़ जाती है- वर्तमान में 10 जीडब्ल्यू दे रही, मॉनसून में 20-25 जीडब्ल्यू तक संभव।
यह स्ट्रक्चरल शिफ्ट भारत के पावर ग्रिड के लिए वरदान है। दिन में सोलर 100 जीडब्ल्यू के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन शाम की डिमांड गैप बढ़ रहा। सुजलॉन, 30 फीसदी से ज्यादा मार्केट शेयर वाली विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर, खुद को ‘विंड ब्रिज’ के रूप में स्थापित कर चुकी है। गर्मी की लहरें बिजली मांग को चरम पर ले जा रही हैं, जो विंड की उपयोगिता को रेखांकित करती हैं।
ऑर्डर बुक और फाइनेंशियल ताकत
कंपनी की स्थिति मजबूत हो रही। जनवरी 2026 तक ऑर्डर बुक 6.4 जीडब्ल्यू पर पहुंची, जो FY25 डिलीवरी वॉल्यूम का 4.1 गुना है- दो साल से ज्यादा विजिबिलिटी देती। GAIL से 100 एमडब्ल्यू प्रोजेक्ट समेत पीएसयू ऑर्डर मिले। कर्ज घटी, बैलेंस शीट साफ हुई, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स की बोली लगाना आसान हो गया।
फाइनेंशियल्स चमकदार। Q3 FY26 (दिसंबर 2025) में नेट प्रॉफिट 15.08 फीसदी उछलकर 445.28 करोड़ रुपये, सेल्स 42.42 फीसदी बढ़कर 4,228.18 करोड़। पूरे FY25-26 में रेवेन्यू 10,993.13 करोड़ और प्रॉफिट 2,071.63 करोड़ रहा। पांच साल में 1,156.70 फीसदी, तीन साल में 559.10 फीसदी रिटर्न- हालांकि पिछले साल 4.63 फीसदी गिरावट आई थी। अब नया ‘Blue Sky’ प्लेटफॉर्म लॉन्च से ग्रोथ को बूस्ट मिला।
चुनौतियां बरकरार, सावधानी जरूरी
रैली के बीच रिस्क नजरअंदाज नहीं। एग्जीक्यूशन गैप चिंता का विषय- पिछली सात तिमाहियों में 3,175 एमडब्ल्यू डिलीवर, लेकिन सिर्फ 778 एमडब्ल्यू चालू। जमीन अधिग्रहण, RoW, ग्रिड कनेक्टिविटी में देरी रेवेन्यू प्रभावित कर रही। डेटर डेज बढ़े, रिसीवेबल्स कैश फ्लो दबाव डाल रहे। टेक्निकल रूप से 54-55 रुपये रेजिस्टेंस (200-DMA) है; फेलियर पर 48-45 रुपये तक पुलबैक संभव। Q4 FY26 रिजल्ट्स अगले महीने आउंगी- एग्जीक्यूशन पर नजर।
जनवरी 2026 में 52-वीक हाई से 30 फीसदी गिरावट आई थी, लेकिन अब रिकवरी मोड। ब्रोकरेज बुलिश हैं- मोतीलाल ओसवाल ने भी 66 रुपये का टारगेट दिया। लॉन्ग-टर्म मल्टीबैगर पोटेंशियल, लेकिन वोलेटाइल मार्केट में रिस्क मैनेजमेंट जरूरी। सुजलॉन के बुरे दिन शायद पीछे छूट रहे। जियो-पॉलिटिक्स, स्ट्रक्चरल डिमांड और फंडामेंटल्स तेजी का आधार हैं। निवेशक सतर्क रहें- Q4 रिजल्ट्स फैसला करेंगे।









