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IPO Investment Risk: 2026 में डूबी निवेशकों की कमाई! 56 में से 39 स्टॉक घाटे में, 80% तक टूटे शेयर; देखें लिस्ट

2026 का IPO बाजार ज्यादातर निवेशकों के लिए भारी नुकसान लेकर आया। लिस्ट हुए 56 नए शेयरों में से 39 इश्यू प्राइस से नीचे चल रहे हैं, जबकि कई स्टॉक 50–80% तक टूट चुके हैं। मेनबोर्ड और SME दोनों सेगमेंट में ओवरवैल्यूएशन और कमजोर पोस्ट‑लिस्टिंग परफॉर्मेंस ने रिटेल निवेशकों की पूंजी गंभीर रूप से डैमेज की है।

By Pinki Negi

ipos turns wealth destroyer39 of the 56 stocks listed in 2026 in lose crashed up to 80 percent

2026 का IPO बाजार भारतीय निवेशकों के लिए “कमाई का जादू” नहीं, बल्कि भारी नुकसान का सौदा साबित हुआ है। इस साल लिस्ट हुए 56 IPO में से 39 स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जिससे करीब 70% नए लिस्टेड शेयरों ने वेल्थ डिस्ट्रॉयर का रूप ले लिया है। यह डेटा साफ‑साफ दिखाता है कि प्राइमरी मार्केट में रिस्क उम्मीद से कहीं ज्यादा रहा और लिस्टिंग‑डे गेन की खुशियां ज्यादातर मामलों में महीनों में ही उलट गईं।

मेनबोर्ड और SME: दोनों में गिरावट

मेनबोर्ड सेगमेंट में 16 में से 11 IPO घाटे में हैं, जबकि SME इश्यू में 40 में से 28 शेयर नुकसान में लिस्टेड हैं। यह ट्रेंड बताता है कि गिरावट सिर्फ छोटे या बड़े धड़े तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे IPO बाजार में व्यापक कमजोरी दिखी। मेनबोर्ड पर Shree Ram Twistex, Innovision और Clean Max Enviro जैसे शेयरों में 25 से 60% तक की गिरावट रही, जबकि सिर्फ चुनिंदा नाम जैसे SEDEMAC Mechatronics और Bharat Coking Coal ही ग्रोथ टिकाए रख पाए।

SME सेगमेंट तो और ज्यादा तबाही लेकर आया। यहां कई शेयर 65–80% तक टूट गए, जैसे Yajur FibresNarmadesh Brass और Aritas Vinyl। इनमें से ज़्यादातर ने लिस्टिंग के दिन थोड़ा‑बहुत उछाल दिखाया, लेकिन उसके बाद लगातार बिकवाली ने शेयर इश्यू प्राइस के दोहरे या तिहाई दाम तक धकेल दिए।

लिस्टिंग गेन: ट्रैप बना गेम

2026 में कई IPO ने लिस्टिंग डे पर मोटा गेन दिया; E to E Transportation Infrastructure जैसे शेयरों ने 80% से ऊपर उछाल दिखाया। लेकिन यह उफान टिकाऊ नहीं रहा। ज्यादातर मामलों में महीनों‑छह महीने के भीतर शेयर फिर से इश्यू प्राइस से नीचे चले गए, जिससे लॉन्ग‑टर्म लिए रहे निवेशक फंस गए। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह “लिस्टिंग गेन ट्रैप” इस साल बड़ा फैक्टर रहा, जिसने IPO को आसान कमाई का गेम समझने वाले रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान दिलाया।

ओवरवैल्यूएशन और बाजार की कमजोरी

विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के IPO क्रैश की मुख्य वजह ओवरवैल्यूएशन रही। कई कंपनियां बहुत ऊंचे पी/ई और अतिरिक्त वैल्यूएशन पर लिस्ट हुईं, जिनका फंडामेंटल रियल‑टाइम में सपोर्ट नहीं कर पाया। इसके ऊपर 2026 में बाजार में आई गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीद‑बिकवाली और ग्लोबल अनिश्चितता ने नए शेयरों पर अतिरिक्त दबाव डाला। नतीजा रहा कि मेनबोर्ड और SME दोनों में 80% तक गिरावट वाले स्टॉक देखने को मिले, जिससे निवेशकों की पूंजी लगभग हवा हो गई।

निवेशकों के लिए सबक

2026 का डेटा साफ‑साफ कहता है कि IPO अब ऑटोमेटिक गेन का टास्क नहीं रहा। निवेशकों को अब सिर्फ लिस्टिंग गेन या “ग्रेय मार्केट प्रीमियम (GMP)” पर भरोसा नहीं, बल्कि कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, ग्रोथ और लिक्विडिटी पर गहरी नजर रखनी होगी। खासकर SME IPO में यह जोखिम और भी ज्यादा है, जहां जल्द‑जल्द 50–80% लॉस भी एक सामान्य दृश्य बन गया है। आगे आने वाले Reliance Jio, NSE और PhonePe जैसे बड़े IPO ही यह तय करेंगे कि निवेशकों का भरोसा वापस आ पाएगा या 2026 बस एक घातक वॉर्निंग के तौर पर याद रहेगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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