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Hepatitis: बिना किसी लक्षण के लिवर को छलनी कर रही है ये बीमारी! करोड़ों भारतीय हैं शिकार, एक्सपर्ट्स से जानें बचाव

भारत में करोड़ों लोग हेपेटाइटिस‑B या C के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें इसका अंदाजा तक नहीं। यह “साइलेंट किलर” बिना लक्षण के लिवर को धीरे‑धीरे क्षतिग्रस्त करता है और बाद में सिरोसिस, लिवर फेल्योर या कैंसर तक पहुँचा सकता है। टीकाकरण, नियमित जांच और स्वच्छता ही इसे रोकने का सबसे बड़ा हथियार हैं।

By Pinki Negi

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भारत में लाखों और कहीं‑कहीं तो करोड़ों लोग हेपेटाइटिस‑B या C के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें इसका अंदाजा तक नहीं है। वे रोज काम पर जाते हैं, घर चलाते हैं, खेल‑खुशी के साथ जिंदगी जीते हैं, फिर भी एक छोटा‑सा वायरस चुपचाप उनके लिवर को नुकसान पहुँचाता रहता है। जब तक लक्षण साफ दिखाई देते हैं, तब तक अक्सर स्थिति गंभीर हो चुकी होती है- लिवर में फाइब्रोसिस, सिरोसिस, लिवर फेल्योर और यहाँ तक कि लिवर कैंसर जैसे खतरे खड़े हो जाते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत वायरल हेपेटाइटिस, खासकर हेपेटाइटिस B और C, के सबसे बड़े बोझ वाले देशों में से एक है। 2022 में देश में हेपेटाइटिस B और C के कुल लगभग 3.5 करोड़ मामले दर्ज किए गए, जिससे भारत इन संक्रमणों के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर आ गया। इनमें अकेले हेपेटाइटिस‑B के लगभग 2.9 करोड़ और हेपेटाइटिस‑C के लगभग 55-60 लाख से ज्यादा लोग शामिल हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 3-4% हिस्सा बनाते हैं।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. सौरदीप चौधरी ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) से बातचीत में कहा कि भारत में हेपेटाइटिस वायरस का बोझ काफी ज्यादा है। उनके अनुसार, देश की लगभग 3-4% आबादी हेपेटाइटिस B से संक्रमित है, जबकि 0.5-1% लोगों में हेपेटाइटिस C पाया जाता है; यानी यहाँ करीब एक करोड़ से अधिक लोग tell‑सालों तक चोरी‑छुपे क्रॉनिक इंफेक्शन के साथ जी रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि दोनों वायरस अक्सर सालों तक बिना लक्षण के रहते हैं, इसलिए 90% से ज्यादा मरीज तब तक जांच नहीं कराते जब तक लिवर को गंभीर नुकसान न हो जाए।

बिना लक्षण क्यों खतरनाक?

हेपेटाइटिस‑B और C इतने “साइलेंट” होते हैं कि लिवर का 70% हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो जाए तब तक इंसान को बस थकान, थोड़ा पेट खराब होना या भूख कम लगना जैसे हल्के लक्षण दिखते हैं। इस बीच वायरस लिवर कोशिकाओं पर हमला करते रहते हैं, जिससे धीरे‑धीरे फाइब्रोसिस और फिर सिरोसिस तक की स्थिति बन जाती है। जब यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो लिवर फेल्योर और हेपेटोसेल्युलर कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

फैलने के “अदृश्य” रास्ते

हेपेटाइटिस A और E ज़्यादातर दूषित पानी, खराब स्वच्छता और अनहाइज़ीनिक भोजन से फैलते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस B और C का फैलाव रक्त और यौन संपर्क से जुड़ा है। असुरक्षित टेटानस इंजेक्शन, बिना ठीक से स्क्रीन किया गया रक्त चढ़ाना, असुरक्षित डेंटल प्रक्रिया, इंफेक्टेड सुई वाली टैटू या पियर्सिंग और प्रसव के दौरान माँ से बच्चे में ट्रांसमिशन- ये सब मुख्य रास्ते हैं। यहाँ यह गलत धारणा भी फैली है कि हेपेटाइटिस खाना, गले मिलना या खाँसने से फैलता है, जो सही नहीं है; बल्कि यह सिर्फ संक्रमित खून और शारीरिक द्रव के सीधे संपर्क से ही व्यापक रूप से फैलता है।

जागरूकता की कमी और गलत धारणाएँ

डॉक्टर्स बताते हैं कि बड़ी समस्या यह है कि कई लोग सोचते हैं कि “लिवर की बीमारी सिर्फ शराब पीने वालों” को होती है, जबकि हेपेटाइटिस‑B और C ऐसे लोगों में भी आसानी से फैल सकते हैं जो शराब नहीं छूते। साथ ही टीकाकरण और नियमित जांच के प्रति उदासीनता भी बड़ा कारण है; जबकि आजकल हेपेटाइटिस‑A और B के टीके उपलब्ध हैं और नवजात शिशु को जन्म के 24 घंटे के अंदर B वैक्सीन देना वैश्विक मानक बन चुका है।

इलाज और उम्मीद की किरण

खुशी की बात यह है कि आज हेपेटाइटिस‑C का इलाज और भी आसान हो गया है; आमतौर पर 8-12 हफ्तों की डॉक्सी थेरेपी से 95% से ज्यादा मामले पूरी तरह कंट्रोल किए जा चुके हैं। हेपेटाइटिस‑B भले ही अक्सर लंबे समय तक चलने वाली दवाओं (जैसे टेनोफोविर, एंटेकाविर) की ज़रूरत पड़ती है, पर वायरल लोड को कम करके लिवर के नुकसान और कैंसर के जोखिम को बहुत हद तक रोका जा सकता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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