
आजकल मोबाइल और लैपटॉप हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। काम, पढ़ाई, सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन तक- हर चीज स्क्रीन पर ही निपट रही है। लेकिन अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC.26) की ताजा रिसर्च ने चेतावनी दी है कि 6 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम युवाओं के दिल के लिए घातक साबित हो सकता है। पाकिस्तान में 382 युवाओं पर हुई इस स्टडी में पाया गया कि लंबे स्क्रीन घंटे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को 18 mmHg, LDL कोलेस्ट्रॉल को 28 mg/dL बढ़ा देते हैं और HDL को 3.9 mg/dL घटा देते हैं।
जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की स्टडी
जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन बताता है कि हर अतिरिक्त स्क्रीन घंटा कार्डियोमेटाबॉलिक जोखिम को तेजी से बढ़ाता है। डेनमार्क के 1000 से ज्यादा बच्चों और युवाओं पर आधारित यह रिसर्च दर्शाती है कि फोन, लैपटॉप या टीवी पर बिताया ज्यादा समय हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन रेजिस्टेंस और पेट की चर्बी को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक गतिविधि की कमी के बावजूद यह प्रभाव बरकरार रहता है। अगर व्यायाम न हो, तो जोखिम दोगुना हो जाता है।
नींद की कमी और सेडेंटरी लाइफस्टाइल मुख्य वजह
लंबे समय तक बैठे रहने से सेडेंटरी लाइफस्टाइल बढ़ती है, जो नींद चक्र बिगाड़ती है और तनाव को दोगुना कर देती है। कनाडियन जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी की रिसर्च के अनुसार, आधे घंटे से ज्यादा मोबाइल कॉल करने वाले लोगों में हार्ट डिजीज का खतरा 7% तक बढ़ जाता है, जबकि 1-3 घंटे में यह 13% हो जाता है। अनातोलियन जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी ने भी पाया कि मोबाइल यूज हृदय गति परिवर्तनशीलता (HRV) को प्रभावित करता है। देर रात स्क्रीन से ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को दबाती है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्मोन असंतुलन होता है।
युवाओं पर सबसे ज्यादा असर, भविष्य की चेतावनी
20s में ज्यादा टीवी या स्क्रीन टाइम हार्ट अटैक के जोखिम को 26% बढ़ा देता है, जैसा कि जर्नल ऑफ जनरल इंटरनल मेडिसिन की स्टडी में सामने आया। धूम्रपान या डायबिटीज वाले स्मोकर्स में यह खतरा और गहरा जाता है। विशेषज्ञ चेताते हैं कि कम उम्र की ये आदतें 60 साल तक की उम्र घटा सकती हैं। भारत जैसे देशों में जहां स्मार्टफोन यूज 5 घंटे से ऊपर है, यह महामारी का रूप ले सकता है।
बचाव के आसान उपाय अपनाएं
रिसर्चर्स सलाह देते हैं- स्क्रीन टाइम 6 घंटे से कम रखें, हर घंटे 20-20-20 नियम अपनाएं (20 सेकंड दूर 20 फीट देखें), सप्ताह में 150 मिनट व्यायाम करें और सोने से 1 घंटे पहले स्क्रीन बंद करें। संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और ब्रेक लें। डॉक्टरों का कहना है कि डिजिटल लाइफ और हेल्थ का बैलेंस बनाकर ही युवा हृदय रोगों से बच सकते हैं। कुल मिलाकर, तकनीक जरूरी है, लेकिन सीमित इस्तेमाल ही दिल को स्वस्थ रखेगा। जागरूकता से ही हम इस ‘डिजिटल हार्ट अटैक’ को रोक सकते हैं।









