
प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक परिवहन के ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजधानी देहरादून में एलिवेटेड ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) की शुरुआत से देश का पहला ऐसा मॉडल धरातल पर उतरेगा, जहां सड़क के ऊपर पिलर आधारित एलिवेटेड कॉरिडोर पर उच्च क्षमता वाली इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी।
यदि यह परियोजना सफल हुई, तो यह मेट्रो और पारंपरिक बस सिस्टम के बीच संतुलन बनाकर शहरी यातायात की नई दिशा तय करेगी। कम लागत में लग्जरी सुविधाएं प्रदान करने वाली यह व्यवस्था ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और समय की बर्बादी जैसी समस्याओं का समाधान साबित होगी।
परियोजना की पृष्ठभूमि और मंजूरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई वाली सरकार ने केंद्र सरकार की सलाह पर नियो मेट्रो परियोजना को छोड़कर ई-बीआरटीएस को अपनाया है। जनवरी 2026 में उत्तराखंड मेट्रो रेल कार्पोरेशन (यूएमआरसी) की बैठक में फोरलेन ई-बीआरटीएस को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। पहला चरण आईएसबीटी से रायपुर तक होगा, जिसमें दो प्रमुख कॉरिडोर और 35 स्टेशन शामिल हैं।
कुल लागत मात्र 105 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो मेट्रो की तुलना में कहीं सस्ता और तेज निर्माण योग्य है। योजना का विस्तार देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश तक 73 किमी लंबा कॉरिडोर होगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी। डीपीआर तैयार हो रही है और बोर्ड बैठक में अंतिम मंजूरी अपेक्षित है।
तकनीकी डिजाइन और विशेषताएं
एलिवेटेड ई-बीआरटीएस सामान्य ट्रैफिक से पूरी तरह अलग होगा। सड़क के ऊपर बने सुरक्षित ट्रैक पर बसें बिना रुकावट तेज गति से चलेंगी। बसें दो-खंडीय डिजाइन की होंगी, जिनकी क्षमता 150 यात्रियों तक होगी। इलेक्ट्रिक पावर से चलने वाली ये बसें निम्न-उत्सर्जन वाली होंगी, जिससे प्रदूषण और शोर में भारी कमी आएगी।
मेट्रो जैसी सुविधाएं जैसे एसी, वाई-फाई, डिजिटल डिस्प्ले, सीसीटीवी, ऑफ-बोर्ड टिकटिंग, बड़े द्वार (B3-4) और दिव्यांग-अनुकूल डिजाइन मिलेंगी। कम किराए में यह लग्जरी अनुभव आमजन को सुलभ करेगा। फोरलेन कॉरिडोर में दो लेन ई-बसों के लिए आरक्षित रहेंगी, शेष सामान्य बसों के लिए। पार्किंग और बिंदाल-रिस्पना एलीवेटेड रोड से एकीकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
वैश्विक प्रेरणा: शियामेन मॉडल
यह मॉडल चीन के शियामेन शहर से प्रेरित है, जहां 2008 से एलिवेटेड बीआरटीएस सफलतापूर्वक चल रहा है। देहरादून की सीमित सड़क चौड़ाई, भौगोलिक बाधाएं, बढ़ता ट्रैफिक और आबादी इसे आदर्श बनाती हैं। शियामेन की तरह कम लागत-तेज निर्माण से जाम मुक्ति मिलेगी। सूरत का इलेक्ट्रिक बीआरटीएस (108 किमी, 450 बसें) भी सफल उदाहरण है, जहां हर दो मिनट में बस उपलब्ध है।
अपेक्षित लाभ और भविष्य
ई-बीआरटीएस से पर्यावरण संरक्षण, समय बचत और विश्वसनीय परिवहन सुनिश्चित होगा। धामी सरकार का यह प्रयास उत्तराखंड को ग्रीन मोबिलिटी का मॉडल राज्य बनाएगा। परियोजना की प्रगति पर नजरें टिकी हैं।









