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Uttarakhand Power Crisis: उत्तराखंड में ‘आसमान से बरस रही आग’! बिजली संकट के बीच केंद्र से मांगी 150 मेगावाट की मदद, जानें हालात

उत्तराखंड भीषण गर्मी के चलते गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। बिजली की मांग 5.3 करोड़ यूनिट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है, जबकि उपलब्धता केवल 4.5 करोड़ यूनिट है । इस अंतर को पाटने के लिए यूपीसीएल ने केंद्र से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मांगी है । उम्मीद है कि बेहतर प्रबंधन से 1 मई तक स्थिति सामान्य हो जाएगी ।

By Pinki Negi

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उत्तराखंड इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जिससे राज्य का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ‘आसमान से बरसती आग’ के बीच राज्य के बिजली तंत्र पर दबाव इतना बढ़ गया है कि आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है। अप्रैल 2026 में चढ़ते पारे के साथ ही बिजली की मांग में रिकॉर्ड उछाल आया है, जिसके कारण प्रदेश के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में घंटों की कटौती की जा रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि राज्य की ऊर्जा मांग और आपूर्ति के बीच एक गहरी खाई बन गई है, जो सीधे तौर पर आम नागरिकों और औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही है।

मांग और आपूर्ति में असंतुलन

ऊर्जा विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में बिजली की दैनिक मांग लगभग 5.3 करोड़ यूनिट के स्तर तक पहुंच गई है, जबकि उपलब्धता और उत्पादन क्षमता मिलकर महज 4.5 करोड़ यूनिट के आसपास ही सिमट कर रह गए हैं। यह अंतर पिछले कुछ हफ्तों में और अधिक चौड़ा होता गया है। विशेष रूप से 14 से 22 अप्रैल के बीच स्थिति सबसे अधिक विकट रही, जहां ग्रिड फ्रीक्वेंसी गिरने और मांग को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन बिजली कटौती का सहारा लेना पड़ा। उपभोक्ताओं को कहीं-कहीं ढाई घंटे से अधिक की अघोषित बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है, जिससे भीषण गर्मी में लोगों का जीना दुश्वार हो गया है।

संकट के पीछे के प्रमुख कारण

इस ऊर्जा संकट के पीछे कई बहुआयामी कारक जिम्मेदार हैं। मुख्य रूप से, बेमौसम गर्मी और लू के चलते एयर कंडीशनर (AC), कूलर और अन्य शीतलन उपकरणों का उपयोग पिछले साल की तुलना में तेजी से बढ़ा है । इसके साथ ही, घरेलू स्तर पर बिजली की खपत में पांच प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई है । तकनीकी कारणों में गैस आधारित बिजली संयंत्रों का अपनी पूरी क्षमता पर काम न कर पाना एक बड़ी बाधा बन गया है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेष रूप से इजरायल-ईरान के बीच तनाव ने गैस की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, जिससे उत्तराखंड के 321 मेगावाट क्षमता वाले गैस आधारित पावर प्लांट पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रहे हैं ।

इसके अलावा, जल विद्युत परियोजनाओं पर भी संकट के बादल छाए हुए हैं। सर्दियों में कम बर्फबारी और अपर्याप्त बारिश के कारण नदियों में जलस्तर का प्रवाह ऐतिहासिक रूप से कम हो गया है। जल विद्युत, जो कि उत्तराखंड की ऊर्जा रीढ़ है, का उत्पादन इस कमी के कारण काफी नीचे गिर गया है । यूपीसीएल के निदेशक जीएस बुदियाल के अनुसार, ग्रिड में लोड बढ़ने से कई बार सिस्टम पर अत्यधिक दबाव आता है, जिसे सुरक्षित रखने के लिए कटौती करना आवश्यक हो जाता है ।

केंद्र की मदद और भविष्य की रणनीति

इस विषम परिस्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने सक्रिय रुख अपनाया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त मदद की गुहार लगाई है। सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने केंद्रीय पूल से राज्य को 150 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली आवंटित करने का आश्वासन दिया है । यह मदद राज्य को तात्कालिक राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है ।

भविष्य की तैयारियों को लेकर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। विद्युत नियामक आयोग से अनुमति लेने के बाद, राज्य सरकार ने ऊर्जा एक्सचेंज के माध्यम से अग्रिम बिजली खरीदने की प्रक्रिया को गति दी है । आगामी मई महीने की जरूरतों को देखते हुए, रणनीति यह है कि 1 मई से 15 मई तक 100 मेगावाट और 16 मई से 31 मई तक 225 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की खरीद सुनिश्चित की जाएगी ।

निष्कर्ष और चुनौतियां

फिलहाल स्थिति पर सरकार और ऊर्जा विभाग की पैनी नजर है । हालांकि सरकार का दावा है कि अतिरिक्त बिजली मिलने से कटौती की अवधि कम हो जाएगी, लेकिन गर्मी का बढ़ता प्रकोप नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है । यदि पारा और ऊपर जाता है या अन्य राज्यों में भी मांग अचानक बढ़ती है, तो पावर एक्सचेंज में बिजली की उपलब्धता और कीमतें चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं ।

राज्य सरकार ने वर्तमान में बिजली की दरों में कोई अतिरिक्त इजाफा न करने का फैसला लेकर उपभोक्ताओं को राहत दी है, लेकिन आने वाले दिनों में आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना सरकार के लिए कड़ी परीक्षा जैसा होगा । फिलहाल पूरा तंत्र इस कोशिश में जुटा है कि तपती गर्मी के इस दौर में प्रदेशवासियों को न्यूनतम बिजली कटौती का सामना करना पड़े ।

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।