
उत्तराखंड में भीषण गर्मी और तेजी से बढ़ते तापमान को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने घोषणा की है कि 1 मई 2026 से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के समय में बदलाव किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अप्रैल के आखिरी दिनों में ही गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है और कई जिलों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि नया शेड्यूल बच्चों को लू, तेज धूप और गर्मी से होने वाली परेशानी से काफी हद तक बचाएगा।
नया स्कूल समय
नई व्यवस्था के अनुसार अब उत्तराखंड के सरकारी स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक संचालित होंगे। अभी तक स्कूल सुबह 7:45 बजे खुलते थे और दोपहर 2:05 बजे तक चलते थे। यानी नए समय में बच्चों को स्कूल तो थोड़ा पहले पहुंचना होगा, लेकिन उनकी छुट्टी करीब 35 मिनट पहले हो जाएगी।
इस बदलाव से खासतौर पर उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी जिन्हें दोपहर की तेज धूप में घर लौटना पड़ता था। छोटे बच्चों के लिए यह समय अक्सर सबसे कठिन साबित होता है, क्योंकि इस दौरान गर्मी का असर ज्यादा होता है और थकान, पानी की कमी तथा हीट स्ट्रोक जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है।
अभिभावकों और छात्रों को राहत
शिक्षा विभाग के इस फैसले को अभिभावकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। गर्मी के दिनों में बच्चों का लंबे समय तक स्कूल में रहना और फिर तेज धूप में वापस लौटना स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं माना जाता। खासकर प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं के बच्चों को इससे अधिक परेशानी होती है। कई बार बच्चे स्कूल से लौटते समय चक्कर, कमजोरी और ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याओं से जूझते हैं। ऐसे में समय में यह बदलाव बच्चों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया निर्णय माना जा रहा है।
मौसम का हाल
मौसम विभाग की ओर से भी उत्तराखंड को लेकर अलग-अलग इलाकों में मौसम के बदलते रुख की जानकारी दी गई है। कई पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। वहीं मैदानी हिस्सों में कहीं-कहीं तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश भी हो सकती है।
मौसम में इस बदलाव के कारण अगले कुछ दिनों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि इसके बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर बना हुआ है, इसलिए स्कूलों के समय में बदलाव को व्यावहारिक और समयोचित कदम माना जा रहा है।
सरकार का निर्णय
सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय बच्चों की सेहत, सुरक्षा और पढ़ाई की निरंतरता को ध्यान में रखकर लिया गया है। राज्य में गर्मियों के दौरान स्कूलों के संचालन को लेकर पहले भी समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं। लेकिन इस बार गर्मी का असर अपेक्षाकृत जल्दी और ज्यादा तीव्र दिखाई देने के कारण सरकार ने पहले ही नया शेड्यूल लागू करने का फैसला किया है। इससे विद्यालयों को भी अपनी तैयारी समय से करने का मौका मिलेगा और अभिभावक भी बच्चों की दिनचर्या उसी हिसाब से तय कर सकेंगे।
बच्चों की सुरक्षा का पहलू
इस फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल पढ़ाई के समय को नहीं बदलता, बल्कि बच्चों की रोजमर्रा की सुरक्षा से भी जुड़ा है। तेज गर्मी में स्कूल आने-जाने का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों पर पड़ता है। कई परिवारों को बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने की व्यवस्था में भी परेशानी होती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां परिवहन सीमित है। नया समय सुबह के ठंडे और अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण में स्कूल शुरू करने का अवसर देगा, जिससे बच्चों पर गर्मी का दबाव कम होगा।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि इससे बच्चों को दोपहर की तपती धूप में घर लौटने से राहत मिलेगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में गर्मी को देखते हुए स्कूल समय में बदलाव किए जा रहे हैं। उत्तराखंड सरकार का यह फैसला बताता है कि मौसम की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर शिक्षा व्यवस्था में लचीलापन जरूरी है।









