
आज की डिजिटल लाइफ में मोबाइल और लैपटॉप केवल गैजेट नहीं, बल्कि हमारे दिनचर्या का जीवन जीने का तरीका बन चुके हैं। काम, पढ़ाई, ऑनलाइन क्लास, गेमिंग और सोशल मीडिया- हर काम लगभग स्क्रीन के सामने बैठकर ही हो रहा है। लेकिन यहीं से शुरू होती है समस्या: घंटों तक गलत पोजीशन में बैठकर मोबाइल या लैपटॉप देखने की आदत धीरे‑धीरे आपके रीढ़ की हड्डी (Spine) के लिए खतरनाक साबित हो रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ठीक से न बैठना, गर्दन आगे झुकाकर फोन देखना, लैपटॉप पर झुककर काम करना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना रीढ़ पर लगातार दबाव डालता है, जिसे मेडिकल भाषा में “टेक्स्ट नेक” या “स्मार्टफोन सिंड्रोम” कहा जा रहा है।
पॉश्चर बिगड़ना और मांसपेशियों का असंतुलन
लखनऊ के अपोलो हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. इमरान अख्तर के अनुसार, जब हम मोबाइल या लैपटॉप देखते समय गर्दन को 45-60 डिग्री तक आगे झुका लेते हैं, तो सिर का प्रभावी वजन गर्दन पर कई गुना बढ़ जाता है। इससे गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियां लगातार तनाव में आती हैं, जिसके कारण गर्दन में अकड़न, कंधों में दर्द और पीठ में खिंचाव जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
लगातार एक ही पोजीशन में बैठने से शरीर की कुछ मांसपेशियां बहुत ज्यादा इस्तेमाल से जकड़ जाती हैं, तो कुछ कमजोर होने लगती हैं; इससे पूरे शरीर की प्राकृतिक संरचना असंतुलित होती है और पोस्चर बिगड़ती है, जिससे कंधे झुकने, पीठ में दर्द और आगे की ओर गिरी हुई मुद्रा जैसी समस्याएं उभरती हैं।
स्पाइनल डिस्क और नसों पर दबाव
रीढ़ की हड्डी में रहने वाली डिस्क झटकों को सोखने का काम करती हैं, जैसे कुशन। लेकिन गलत पोजीशन और लगातार दबाव के कारण ये डिस्क समय से पहले घिसने लगती हैं, जिसे डिजनरेटिव बदलाव कहते हैं। इससे स्लिप डिस्क, कमर दर्द और साइटिका जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जब डिस्क या वर्टेब्रा नर्व पर दबाव डालते हैं, तो हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन और कभी‑कभी कमजोरी तक महसूस हो सकती है। कुछ केसों में दर्द गर्दन से शुरू होकर भुजाओं में फैलता है या निचली पीठ से पैरों तक जाता है, जिससे चलने‑फिरने और रोजमर्रा की गतिविधियों में तकलीफ हो जाती है।
बच्चों और युवाओं पर दोगुना खतरा
ऑनलाइन क्लास और गेमिंग के कारण बच्चों में स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है। छोटी उम्र में ही अगर वे लगातार लटकी गर्दन और झुकी पीठ में बैठते हैं, तो भविष्य में रीढ़ की वक्रता, हाइपर‑काइफोसिस यानी ओवर झुकी पीठ और डिस्क संबंधी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोध बताते हैं कि 20–40 साल की आयु के लोगों में पीठ और रीढ़ की समस्याओं में लगभग 50–60 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है, जिसमें गैजेट्स का अत्यधिक उपयोग एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें, ताकि गर्दन ज्यादा न झुके। जब भी मोबाइल इस्तेमाल करें, उसे हाथ में उठाकर आंखों की ऊंचाई तक ले जाएं, जमीन की तरफ झुककर न देखें। हर 30-40 मिनट में छोटा ब्रेक लें, खड़े होकर गर्दन, कंधे और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करें। बैठते समय पीठ को सीधा रखें, कुर्सी के बैकरेस्ट का पूरा सहारा लें और लंबे समय तक बिना इंटरवल के बैठे रहने से बचें।
नियमित रूप से योग, बैक‑स्ट्रेंथनिंग और कोर एक्सरसाइज करने से न केवल रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है बल्कि मौजूदा पोस्चर भी सुधरती है। स्क्रीन टाइम लिमिट करना और रात को बिस्तर पर लेटकर मोबाइल देखना कम करना भी रीढ़ के लिए बेहद जरूरी है।









