
देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयरों में पिछले चार कारोबारी दिनों में ऐसा भूचाल आया जिसने निवेशकों के हौसले पर सुप्रीम झटका लगा दिया। एक तरफ जहाँ शेयर 12 प्रतिशत से अधिक टूटकर 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुँच गया और बाजार पूंजी से करीब डेढ़ लाख रुपये धुँध गए, वहीँ दूसरी तरफ मंगलवार को अचानक आए 3 प्रतिशत के उछाल ने फिर से बाजार में उम्मीद की किरण दिखाई है।
12% गिरावट का सिलसिला
एचडीएफसी बैंक के पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के 17 मार्च 2026 को रिजाइन करने के बाद से शेयर बाजार में घबराहट का माहौल रहा। 18 मार्च को एक्सचेंज को इस्तीफे की जानकारी मिलते ही बीएसई (BSE) पर बैंक का शेयर एक सत्र में ही 8.6% गिरकर 770 रुपये के 52-सप्ताह के लो पर आ खड़ा हुआ।
इसके बाद भी बिकवाली रुकी नहीं और चार लगातार सत्रों में कुल मिलाकर शेयर 12% से अधिक टूट गया, जिससे निवेशकों की जेब से करीब 1.34-1.50 लाख करोड़ रुपये की धनराशि रिस गयी। सोमवार को शेयर 743.75 रुपये पर बंद हुआ था, जो पिछले कुछ वर्षों का सबसे निचला स्तर था।
इस्तीफे के पीछे ‘नैतिक चिंताओं’ का बड़ा कारण
चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे के पत्र में स्पष्ट किया कि पिछले दो सालों में बैंक में देखी गई कुछ घटनाओं और प्रैक्टिस उनके ‘व्याक्तिगत मूल्यों और नैतिकता’ (personal values and ethics) से मेल नहीं खातीं। हालाँकि, बैंक ने स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे का बैंक की नीतियों या वैल्यूज से कोई तालमेल बिठाने वाला कोई पहलू नहीं है, लेकिन बाजार ने ‘इथिकल कंसर्न’ शब्द को गवर्नेंस में दरार का संकेत मान लिया।
बिकवाली के बीच आया TURNING POINT
मंगलवार को शेयर में अचानक 3% की उछाल का मुख्य कारण बैंक द्वारा उठाया गया एक तेज और पारदर्शी कदम रहा। सोमवार को ही एचडीएफसी बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि चेयरमैन के इस्तीफे के कारणों की गहरी जाँच के लिए बोर्ड ने दो शीर्ष वकील फर्मों (लॉ फर्म्स) का चयन किया है। इनमें से एक फर्म देशी है तो दूसरी कोई दिग्गज इंटरनेशनल फर्म है। बैंक ने दोनों को उचित समय में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दे दिया है।
यह कदम निवेशकों को यह आश्वस्त करने के लिए उठाया गया कि बैंक गवर्नेंस को गंभीरता से ले रहा है और किसी भी तरह की अनियमितता को नहीं बर्दाश्त करेगा। देश की बड़ी फर्म और इंटरनेशनल फर्म की संयुक्त जाँच ने यह संदेश दिया कि मामला सतही नहीं बल्कि गहराई से खंगала जाएगा।
दुबई मामला और बर्खास्तगियों पर बैंक का स्पष्टीकरण
बैंक ने तीन वरिष्ठ कर्मचारियों की बर्खास्तगी को लेकर भी स्पष्टता दी। अपनी फाइलिंग में कहा गया कि यह कार्रवाई दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) के नोटिस के बाद हुई इंटरनल जाँच का नतीजा है, जो क्रె迪त suisse के AT1 बॉन्ड्स के misselling से जुड़ा था। बैंक ने जोर देकर कहा कि इसका बैंक की समग्र वित्तीय स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आरबीआई का भरोसा दिलाता बयान
सबसे महत्वपूर्ण पहलू था भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का त्वरित हस्तक्षेप। रिव्यू के बाद आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एचडीएफसी बैंक एक ‘Domestic Systemically Important Bank’ (D-SIB) है, जिसकी वित्तीय स्थिति मजबूत है, प्रोफेशनल बोर्ड है और प्रबंधन कंपिटेंट है। आरबीआई ने कहा, “हमारी अवधिगत जाँच में गवर्नेंस या परिचालन से जुड़ी कोई भी मटीरियल चिंता दर्ज नहीं है।” यह बयान निवेशकों को यह एहसास दिला कि बैंक की जड़ें मजबूत हैं।
निवेशकों का भरोसा लौटा, तेजी की संभावना
लॉ फर्म्स की नियुक्ति और आरबीआई के भरोसेमंद बयान के बाद निवेशकों ने सोमवार की भारी बिकवाली को रिवर्स करना शुरू कर दिया। मंगलवार को शेयर 743.75 रुपये के बंद होने के बाद 767.75 रुपये पर ओपन हुआ और 3% तक ऊपर चला गया। एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर जाँच रिपोर्ट पारदर्शी आती है और बैंक शीघ्र ही नए चेयरमैन की नियुक्ति कर देता है (जिसके लिए केकी मिस्त्री को अस्थायी चेयरमैन बनाया गया है), तो शेयर 800-850 रुपये की रेंज में तेजी देख सकता है।
इस भूचाल और रौनक के जटिल मोड़ ने एचडीएफसी बैंक के निवेशकों को यह सिखाया है कि चुनौतियों के बावजूद, सही गवर्नेंस और नियामक समर्थन शेयर बाजार में हर अंधेरे के बाद सूरज को ज़रूर निकालता है।









