
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील ने वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत से अधिक टैरिफ को घटाकर मात्र 18 प्रतिशत कर दिया, जो लेदर, टेक्सटाइल, फार्मा और स्मार्टफोन जैसे क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा। लेकिन डील के ऐलान के कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया और प्रभावित पक्षों को मुआवजे का आदेश सुनाया।
इस फैसले के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत डील को महीनों के लिए टाल रहा है, जिससे राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया। इन अफवाहों पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ‘NXT Summit 2026’ में खुलकर मोर्चा खोला।
गोयल का सख्त ऐतराज
‘एनएक्सटी समिट 2026’ में बोलते हुए पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर वायरल उन रिपोर्ट्स को पूरी तरह बेबुनियाद और फर्जी करार दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील को होल्ड कर रहा है। उन्होंने कहा, “कुछ पूरी तरह बेबुनियाद रिपोर्ट्स चल रही हैं… इन पर ध्यान न दें। इनमें किसी तरह की सच्चाई नहीं है। हमारा अमेरिका के साथ बहुत अच्छा ट्रेड एग्रीमेंट है।” गोयल ने जोर देकर स्पष्ट किया कि यह डील भारत और अमेरिका दोनों के लिए विं-विन है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि भारत ने अपने संवेदनशील सेक्टर जैसे कृषि, डेयरी, चावल, मक्का, सोयाबीन, जीएम प्रोडक्ट्स और पोल्ट्री को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। “यह बहुत मजबूत एग्रीमेंट है, जो दोनों देशों के फायदे में है। हर ट्रेड डील इसी तरह की होनी चाहिए,” गोयल ने कहा।
टेक्नोलॉजी और निवेश का बड़ा धमाका
डील के लंबी अवधि के लाभों पर प्रकाश डालते हुए गोयल ने बताया कि इससे भारत को अमेरिका की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी हासिल होगी। इससे भारत दुनिया का प्रमुख डेटा सेंटर बन सकता है और हाल के एआई समिट के बाद बड़े निवेश आकर्षित कर सकता है। क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस प्रोडक्ट्स और अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा, जो भारतीय इकोनॉमी को ग्लोबल लेवल पर मजबूत करेगा।
टेक्सटाइल सेक्टर को विशेष रूप से फायदा होगा, जहां जीरो टैरिफ की संभावना है, जैसा बांग्लादेश को मिला। गोयल ने इसे ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा देने वाला बताया, जो लेबर इंटेंसिव सेक्टर जैसे अपैरल, फुटवेयर और जेम्स एंड ज्वेलरी के लिए अवसर खोलेगा।
इंटरिम से कानूनी समझौता तक
फरवरी 2025 में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा शुरू की गई द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) वार्ताओं का यह इंटरिम फ्रेमवर्क ऐतिहासिक है। पिछले महीने जारी जॉइंट स्टेटमेंट में दोनों देशों ने म्यूचुअल और बैलेंस्ड ट्रेड की प्रतिबद्धता जताई, जो सप्लाई चेन को मजबूत करेगी। वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ट्रेड डील पर कोई रोक नहीं है। फरवरी में टीम भारत अमेरिका गई लीगल फ्रेमवर्क पर चर्चा के लिए, और अप्रैल 2026 तक इसे ऑपरेशनल करने की उम्मीद है। गोयल ने मार्च 13 को ‘होल्ड ऑफ’ रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज किया।
भारत का रणनीतिक प्लान
इधर ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन, बांग्लादेश समेत 16 देशों पर ‘अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस’ की नई जांच शुरू की है, जो सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद टैरिफ दबाव बढ़ा सकती है। लेकिन गोयल ने भरोसा दिलाया कि परिस्थितियां बदलें तो डील को रीबैलेंस किया जा सकता है। भारत ने 2025 से चली वार्ताओं में संवेदनशील क्षेत्र बचाए, जबकि निर्यात में चीन-वियतनाम पर बढ़त हासिल की। कुल मिलाकर, यह डील भारत के हितों को प्राथमिकता देती है, बिना जल्दबाजी के।









