
केंद्र सरकार के करोड़ों कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए 8वें वेतन आयोग की बहस तेज हो गई है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 14 अप्रैल 2026 को आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम वेतन को ₹69,000 रुपये करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.833 तक बढ़ाने की मांग की है। वहीं, प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (PSNM) जैसे प्रमुख शिक्षक संगठनों ने केंद्रीय शिक्षकों के लिए अलग से न्यूनतम बेसिक पे ₹50,000 से ₹60,000 के बीच सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा है।
PSNM केंद्र शासित प्रदेशों के केंद्र सरकार के शिक्षकों का मजबूत प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है, जो लंबे समय से वेतन संरचना में सुधार की लड़ाई लड़ रहा है।
वर्तमान चुनौतियां और PSNM की मुख्य मांगें
यह मांगें वर्तमान 7वें वेतन आयोग की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए उठाई गई हैं, जहां लेवल-1 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी मात्र ₹18,000 है और फिटमेंट फैक्टर 2.57 पर अटका हुआ है। PSNM का कहना है कि महंगाई, जीवनयापन की लागत और शिक्षकों की सेवा की गरिमा को देखते हुए न्यूनतम पे को दोगुना से अधिक बढ़ाना जरूरी है।
संगठन ने सालाना वेतन वृद्धि को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 7% करने की भी जोरदार मांग की है, ताकि कर्मचारियों की सैलरी में सालाना औसतन 10% की वृद्धि सुनिश्चित हो सके। यह इंक्रीमेंट महंगाई भत्ते (DA) की 50% पहुंच पर उसे मूल वेतन में मर्ज करने के साथ जुड़ेगा, जिससे कुल आय में भारी उछाल आएगा।
भत्तों में बढ़ोतरी: HRA, TA और शिक्षा भत्ता
PSNM की मांगों का दायरा व्यापक है। मकान किराया भत्ता (HRA) को शहरों के आधार पर मौजूदा 10%, 20% और 30% से बढ़ाकर 12%, 24% और 36% करने का प्रस्ताव है। इससे विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में रहने वाले शिक्षकों को किराए की बढ़ती लागत से राहत मिलेगी। इसी तरह, ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) को बेसिक सैलरी का 12-15% करने या कम से कम ₹9,000 + DA की दर तय करने की बात कही गई है। वर्तमान में TA की दरें लेवल के आधार पर ₹1,800, ₹3,600 और ₹7,200 हैं, जो अपर्याप्त साबित हो रही हैं।
इसके अलावा, बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता (Children Education Allowance) को प्रति माह ₹7,000 तक बढ़ाने और 30 साल की सेवा में कम से कम 5 सुनिश्चित पदोन्नतियां देने की मांग ने चर्चा बटोरी है। हर 6, 12, 18 और 24 साल बाद ऑटोमैटिक प्रमोशन से करियर प्रोग्रेशन मजबूत होगा।
डिजिटल युग की नई मांगें
एक नया प्रस्ताव डिजिटल युग को ध्यान में रखते हुए है। कर्मचारी संगठनों ने हर महीने ₹2,000 का डिजिटल सपोर्ट अलाउंस देने की मांग की है, जो ब्रॉडबैंड, AI टूल्स और डिजिटल सिक्योरिटी के लिए होगा। 7वें वेतन आयोग में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जबकि आजकल शिक्षक ऑनलाइन क्लासेस, ई-लर्निंग और डिजिटल एडमिनिस्ट्रेशन पर निर्भर हैं। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली भी प्रमुख डिमांड है, जो न्यू पेंशन स्कीम की अनिश्चितताओं के खिलाफ है। PSNM का तर्क है कि ये बदलाव शिक्षकों की प्रेरणा बढ़ाएंगे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारेंगे।
सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएं
सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय और कार्मिक मंत्रालय में इन प्रस्तावों पर विचार-विमर्श चल रहा है, लेकिन बजट प्रभाव को देखते हुए फैसला आने में समय लग सकता है। कर्मचारी यूनियनें चेतावनी दे रही हैं कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज होगा। 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 2027 तक आने की संभावना है, लेकिन ये मेमोरेंडम नीतिगत दिशा तय करेंगे। शिक्षकों के हित में ये सुधार न केवल वित्तीय राहत देंगे, बल्कि सेवा की गरिमा भी बहाल करेंगे। कुल मिलाकर, कर्मचारी संगठनों की एकजुट मांगें वेतन क्रांति का संकेत दे रही हैं, जिसका असर करोड़ों परिवारों पर पड़ेगा।





