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Weather Warning: ‘अल-नीनो’ लेकर आ रहा है भयंकर लू! मई में 50 डिग्री छू सकता है पारा; मौसम विभाग (WMO) ने जारी किया बड़ा अलर्ट

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि मई–जुलाई के बीच एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है, जिससे भारत सहित दक्षिण‑एशिया में गर्मी, लू और कमजोर बारिश का खतरा बढ़ेगा। इससे कृषि, जल सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है।

By Pinki Negi

Weather Warning: 'अल-नीनो' लेकर आ रहा है भयंकर लू! मई में 50 डिग्री छू सकता है पारा; मौसम विभाग (WMO) ने जारी किया बड़ा अलर्ट

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की नई चेतावनी ने भारत सहित पूरे दक्षिण‑एशिया के लिए एल नीनो के जल्दी खुलने की आहट बढ़ा दी है। संगठन ने साफ कहा है कि मई से जुलाई के बीच एल नीन Lone की स्थिति विकसित हो सकती है, जिसका सीधा असर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के मौसम पर पड़ेगा। पहले यह आशंका थी कि एल नीनो मानसून के दूसरे हिस्से, यानी अगस्त–सितंबर के दौरान ही सक्रिय होगा, लेकिन अब इसके जल्दी आने की संभावना जताई जा रही है।

एल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है जो हर करीब 2 से 7 साल के अंतराल पर आती है और लगभग 9 से 12 महीने तक रहती है। इसके दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है, जिससे वैश्विक वातावरण‑पैटर्न बदल जाते हैं। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के स्वरूप में बड़ा बदलाव आता है। जहां कुछ इलाकों में सूखा और भीषण गर्मी पड़ती है, वहीं कुछ जगहों पर अचानक बाढ़ या बारिश के अत्यधिक मामले देखने को मिलते हैं।

WMO के मुताबिक, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से बढ़ रहा है, जो अगले महीने तक एल नीनो की स्थिति के विकसित होने की संभावना दिखाता है। संगठन का कहना है कि यह फिलहाल “तटस्थ” स्थिति से धीरे‑धीरे एल नीनो की ओर झुक रहा है, और आने वाले हफ्तों में यह और मजबूत हो सकता है।

मई-जुलाई: ज्यादातर इलाकों में भीषण गर्मी

WMO ने यह भी साफ किया है कि मई, जून और जुलाई के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में जमीन का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। यानी भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण‑पूर्व एशिया सहित कई क्षेत्रों में प्री‑मानसून गर्मी और लू ज्यादा तीव्र हो सकती है। इससे न केवल दैनिक जीवन बाधित होगा, बल्कि कृषि, जल प्रबंधन, ऊर्जा मांग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों पर गहरा दबाव पड़ेगा।

WMO के जलवायु पूर्वानुमान प्रमुख विलफ्रान मौफूमा ओकिया का कहना है कि साल की शुरुआत में जलवायु पैटर्न तटस्थ स्थिति में थे, लेकिन अब वैज्ञानिक मॉडल के अनुसार एल नीनो की स्थिति के विकसित होने और बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। उनके अनुसार, यह माहौल खासकर उन देशों के लिए चिंता की बात है, जहां पहले से ही जल संसाधन सीमित हैं और गर्मी‑से जुड़ी बीमारियां आम हैं।

भारत पर तीनों तरफ से दबाव

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान जारी कर चुका है, और अब एल नीनो के जल्दी आने की संभावना ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। आमतौर पर एल नीनो के दौरान भारत में मानसून कमजोर पड़ता है, जिससे सूखे और कमजोर फसलों की स्थिति बनती है। इस साल अगर यह स्थिति मई–जुलाई के बीच ही सक्रिय हो जाती है, तो यानी गर्मी लंबे और तीव्र हो सकती है, और मानसून की शुरुआत से ही बारिश का दबाव कम रह सकता है।

इसका मतलब यह है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली‑NCR, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में अप्रैल से जून के बीच लू, हीटवेव और तेज धूप की स्थिति ज्यादा समय तक बनी रह सकती है। इससे फसलें सूख सकती हैं, भूजल स्तर नीचे आ सकता है, पानी‑कटौती और बिजली‑आपूर्ति की तनावपूर्ण स्थिति बन सकती है। साथ ही, बुजुर्गों, बच्चों और मैनुअल वर्कर्स में हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सूरज की तेज धूप से जुड़ी स्किन और आंखों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।

हिमालय में बर्फ की कमी

WMO की जलवायु रिपोर्ट में एक और चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है: हिंदू कुश–हिमालय क्षेत्र में इस साल बर्फ की मात्रा सामान्य से करीब 27.8 प्रतिशत कम है, जो पिछले कम से कम 20 सालों में सबसे न्यून स्तर है। यह बर्फ ही गंगा, ब्रह्मपुत्र, इंदस और अन्य बड़ी नदियों के लगातार जल‑प्रवाह की जड़ है। इसके कम होने से नदियों में पानी की मात्रा प्रभावित हो सकती है, जिससे लगभग 2 अरब लोगों की जल सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हो सकता है।

इससे न केवल भारत, बल्कि पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन के कुछ हिस्सों में पानी‑कटौती, कृषि‑उत्पादन में गिरावट और बाढ़‑सूखे के अस्थिर चक्र की आशंका बढ़ती है।

दुनिया भर में असमान मौसम के हालात

एल नीनो के दौरान ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में आमतौर पर कम बारिश या सूखे की स्थिति बनती है, जबकि दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों और मध्य एशिया में अधिक बारिश और बाढ़ के मामले देखे जाते हैं। यानी यह एक “थर्मोस्टैट” की तरह काम करता है- जहां एक तरफ तापमान और बारिश कम होती है, वहीं दूसरी तरफ अत्यधिक बारिश और भारी आंधी‑बारिश हो सकती है।

इस वैश्विक पैटर्न से कृषक, नीति‑निर्माता और आपदा प्रबंधन विभागों को अपनी रणनीतियां बदलनी होंगी। भारत के लिए यह खासतौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां गर्मी और लू के साथ‑साथ मानसून की अनिश्चितता से कृषि, जल सुरक्षा और बुनियादी जीवन‑सुविधाएं एक साथ खतरे में पड़ सकती हैं।

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।